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दिल्ली में पाबंदियों पर घिरे गृह सचिव: सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी, बताया- क्यों बंद किया था इंटरनेट

Thu, 15 Oct 2026 09:12 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, टैलाहैसी
पीटीआई, टैलाहैसी Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Thu, 15 Oct 2026 09:12 AM IST
सार

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने दिल्ली में  पाबंदी लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि 9 अक्तूबर के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया गया। मोहन ने अवमानना नोटिस रद्द करने की मांग की। 

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Home Secretary restrictions Delhi Tenders apology Supreme Court, states order not violated intentionally.
केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट के अवमानना नोटिस के जवाब में बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने कहा है कि दिल्ली में लगाई गई पाबंदियों को लेकर 9 अक्तूबर को आए कोर्ट के आदेश का उल्लंघन जानबूझकर नहीं किया गया था।
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केंद्रीय गृह सचिव ने क्या जवाब दिया? 
अपने जवाब में मोहन ने बताया कि 9 अक्तूबर को केंद्र सरकार की ओर से लगाई गई पाबंदियों का मकसद शांति बनाए रखना और कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकना था। उन्होंने इसका कारण एक प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन बताया, जिसके लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी। साथ ही, उन्होंने नीट पेपर लीक को लेकर 20 जुलाई को हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस को मिले अनुभवों का भी हवाला दिया।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था? 
सुप्रीम कोर्ट ने अपने 9 अक्तूबर के आदेश में केंद्र सरकार से कहा था कि वह कुछ सेवाओं पर लगी पूरी पाबंदी को हटा ले और इन सेवाओं को केवल इस हद तक नियंत्रित करे कि इससे दिल्ली के आम नागरिकों को कोई परेशानी न हो।
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इंटरनेट सेवाओं पर क्या बोले? 
इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने के मुद्दे पर, मोहन ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद करने का अनुरोध किया था। इस अनुरोध पर कानून के अनुसार कार्रवाई की गई और मौजूदा हालात को देखते हुए इसे उचित माना गया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि रायसीना हिल के चार किलोमीटर के दायरे में 9 अक्तूबर की रात 10 बजे से 10 अक्तूबर की रात 10 बजे तक इंटरनेट बंद रहा। यह पाबंदी केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर लागू थी, जबकि वाई-फाई और ब्रॉडबैंड कनेक्शन इससे बाहर थे।


मोहन ने क्या मांग की? 
मोहन ने अपने खिलाफ जारी अवमानना नोटिस को रद्द करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 11 अक्तूबर के आदेश में बदलाव का अनुरोध किया है, ताकि कानूनी सुरक्षा उपायों के दायरे में रहते हुए, जरूरत पड़ने पर इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने की अनुमति मिल सके।
 
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