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ED: हाउसिंग कंपनी के प्रमोटरों ने यस बैंक के पूर्व एमडी के साथ मिलकर रची साजिश, लिए 200 करोड़ के छह टर्म लोन

डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Updated Thu, 18 Jun 2026 05:42 PM IST
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Housing Firm Promoters and Former Yes Bank Chief Accused of Conspiracy in rs200-Crore Loan Scam: ED
ईडी की कार्रवाई। - फोटो : एआई।
ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत एक मामले में मुंबई और दिल्ली में 17 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया है। इनमें सुरक्षा एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (एसएआरसीएल), सुरक्षा रियल्टी लिमिटेड, ख्याति रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य संबंधित लोगों के ऑफिस शामिल हैं। हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के प्रमोटरों ने यस बैंक के पूर्व एमडी के साथ मिलकर साजिश रची। धोखाधड़ी से लिए 200 करोड़ रुपये के छह टर्म लोन हासिल किए। 
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तलाशी के दौरान, जांच एजेंसी ने 50 लाख रुपये नकद, 10 किलोग्राम चांदी की छड़ें, बैंक लॉकर और कई आपत्तिजनक सामान/डिजिटल डिवाइस जब्त किए हैं।  ईडी ने सीबीआई और एसीबी द्वारा हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड व अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की थी। यह मामला गैर-कानूनी तरीके से 200 करोड़ रुपये का लोन लेने और उसे दूसरी जगह इस्तेमाल करने से जुड़ा था।
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ईडी की जांच से पता चला है कि हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के प्रमोटर राकेश कुमार वाधवान और सारंग वाधवान ने कथित तौर पर यस बैंक के पूर्व एमडी और सीईओ राणा कपूर के साथ मिलकर साजिश रची। उन्होंने 2011-16 के दौरान मैक स्टार मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर लगभग 200.30 करोड़ रुपये के छह टर्म लोन धोखाधड़ी से हासिल किए।
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लोन की इस रकम का इस्तेमाल उस मकसद के लिए नहीं किया गया, जिसके लिए इसे मंज़ूरी मिली थी। इसे एचडीआईएल ग्रुप की कंपनियों की देनदारियों को चुकाने में लगा दिया गया। इसके अलावा, एमएसएमपीएल की कई संपत्तियों को कथित तौर पर आरोपियों के सहयोगियों को ट्रांसफर कर दिया गया। आगे की जांच से पता चला कि राणा कपूर ने एमएसएमपीएल लोन से मिली रकम को एचडीआईएल की देनदारियों को चुकाने में लगाने में मदद की। लोन अकाउंट को समय से पहले सुरक्षा एआरसी को ट्रांसफर करवा दिया। इससे बैड डेट (फंसा हुआ कर्ज़) को 'एवरग्रीनिंग' (नया लोन देकर पुराना लोन चुकाना) के ज़रिए चालू रखा गया। 

जांच में यह भी पता चला है कि वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान, सुरक्षा एआरसी ने यस बैंक द्वारा ट्रांसफर किए गए स्ट्रेस्ड एसेट्स (फंसे हुए कर्ज़) का एक बड़ा हिस्सा हासिल किया, जिसमें एमएसएमपीएल लोन अकाउंट भी शामिल था। साथ ही, यस बैंक ने वालिया ग्रुप की कई कंपनियों को क्रेडिट सुविधाएं दीं। शक है कि इन फंड्स का इस्तेमाल सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से सुरक्षा एआरसी द्वारा इन लोन अकाउंट्स को हासिल करने के लिए ज़रूरी कैश मार्जिन की ज़रूरतों को पूरा करने में किया गया। कुछ अन्य गैर-कानूनी बातें भी सामने आईं। 

जांच में ग्रुप की कंपनियों के बीच कई सर्कुलर ट्रांज़ैक्शन (आपस में पैसे का लेन-देन) का भी पता चला है। इनमें यस बैंक से लिए गए लोन भी शामिल हैं, जिन्हें एआरसी द्वारा कैश मार्जिन पेमेंट के तौर पर दिखाया गया था, ताकि मुश्किल में फंसी संपत्तियों को लिक्विडिटी और बिना किसी ब्याज के नुकसान के हासिल किया जा सके। 
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