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Mumbai: सांसदों के बगावत के बीच उद्धव ठाकरे को झटका, UBT के पार्षद का जाति प्रमाण पत्र निकला फर्जी; गई कुर्सी
पीटीआई, मुंबई
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Thu, 18 Jun 2026 07:20 PM IST
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सार
मुंबई में जाति प्रमाण पत्र अमान्य पाए जाने के बाद शिवसेना (UBT) के पार्षद दीपक सावंत को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। BMC में उनकी सीट रिक्त घोषित कर दी गई है। वहीं, AIMIM पार्षद समीर रमजान पटेल का भी जाति प्रमाण पत्र अमान्य किया गया, लेकिन अदालत से मिली अंतरिम राहत के कारण वे फिलहाल पार्षद बने रहेंगे।
उद्धव ठाकरे, शिवसेना यूबीटी प्रमुख
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सांसदों की बगावत के अटकलों की खबरों के बीच शिवसेना यूबीटी को जोरदार झटका लगा है। दरसअसल, मुंबई में एक जांच समिति द्वारा जाति प्रमाण पत्र अमान्य किए जाने के बाद शिवसेना (UBT) के एक पार्षद को अयोग्य घोषित कर दिया गया है। मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने गुरुवार को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की आम सभा की बैठक में घोषणा की कि कांजुरमार्ग के वार्ड नंबर 111 से पार्षद दीपक सावंत की सीट खाली हो गई है।
जाति जांच समिति की रिपोर्ट बनी आधार
उन्होंने बताया कि नगर प्रशासन को जाति जांच समिति द्वारा जारी उस आदेश की प्रति मिली है, जिसमें सावंत का जाति प्रमाण पत्र अमान्य कर दिया गया है।
सेना (UBT) की संख्या में आई कमी
सावंत के अयोग्य घोषित होने के साथ ही नगर निकाय में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सेना (UBT) की संख्या 65 से घटकर 64 हो गई है। बता दें कि सावंत वार्ड नंबर 111 से चुने गए थे, जो अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के लिए आरक्षित सीट थी। अधिकारियों ने बताया कि रत्नागिरी की जिला जाति प्रमाण पत्र जांच समिति द्वारा उनका जाति प्रमाण पत्र अमान्य किए जाने के बाद उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई।
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AIMIM पार्षद भी जांच के घेरे में
इस बीच, गोवंडी इलाके के वार्ड नंबर 137 से चुने गए AIMIM पार्षद समीर रमजान पटेल को भी ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा, जब अहिल्यानगर जिले की जांच समिति ने उनका जाति प्रमाण पत्र अमान्य कर दिया। उन्होंने भी OBC श्रेणी के लिए आरक्षित सीट से नगर निकाय चुनाव लड़ा था।
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अदालत से मिली राहत, फिलहाल बची सदस्यता
सावंत के साथ-साथ BMC की आम सभा की बैठक में पटेल की अयोग्यता के बारे में भी घोषणा किए जाने की उम्मीद थी। हालांकि, एक अदालत ने जांच समिति के आदेश पर रोक लगाकर उन्हें अंतरिम राहत दी, जिससे उन्हें अगले आदेश तक पार्षद बने रहने की अनुमति मिल गई।