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Hovercraft Boat: तटीय सुरक्षा में भारत की छलांग, आईसीजी के बेड़े में शामिल हुआ स्वदेशी होवरक्राफ्ट H-561

एएनआई, गोवा। Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 18 Jun 2026 06:49 PM IST
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सार

भारतीय तटीय रक्षक बल ने गोवा के रासईम में आयोजित समारोह में देश के पहले स्वदेशी होवरक्राफ्ट H-561 को अपने बेड़े में शामिल किया है। रक्षा मंत्रालय के अनुबंध के तहत चौगुले एंड कंपनी द्वारा निर्मित यह जहाज तटीय गश्ती और बचाव कार्यों को अत्यधिक तेज और प्रभावी बनाएगा।
 

indian coast guard inducts first indigenous hovercraft h 561 at chowgule shipyard goa
एयर कुशन व्हीकल - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

भारतीय तटीय सुरक्षा के इतिहास में 18 जून 2026 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। देश में ही निर्मित पहले एयर कुशन व्हीकल (एसीवी) यानी होवरक्राफ्ट 'H-561' को आज भारतीय तटीय रक्षक बल (आईसीजी) में शामिल कर लिया गया। इस अत्याधुनिक जहाज के शामिल होने से भारत की समुद्री सीमाओं की निगरानी क्षमता में भारी इजाफा हुआ है। यह देश की सुरक्षा तैयारियों को नई धार देने वाला साबित होगा।


गोवा में हुआ भव्य इंडक्शन समारोह
इस ऐतिहासिक होवरक्राफ्ट का इंडक्शन समारोह गोवा में आयोजित किया गया। चौगुले एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के रासईम स्थित शिपयार्ड में यह कार्यक्रम बेहद गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। इस खास मौके पर भारतीय तटीय रक्षक बल के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके साथ ही जहाजरानी और रक्षा उद्योग जगत के तमाम दिग्गज भी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। सभी अधिकारियों ने इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान की एक बड़ी कामयाबी बताया।
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रफ्तार और सुरक्षा का अनूठा संगम
H-561 एक जल-थल चर (उभयचर) होवरक्राफ्ट है। यह पानी के साथ-साथ उथले दलदली इलाकों और रेतीले किनारों पर भी बेहद तेज गति से चलने में सक्षम है। रक्षा मंत्रालय और चौगुले एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए समझौते के तहत कुल छह अत्याधुनिक होवरक्राफ्ट का निर्माण किया जाना है। H-561 इस शृंखला का पहला स्वदेशी जहाज है। इसके आने से तटीय गश्ती, खोज और बचाव अभियानों तथा खुफिया निगरानी कार्यों में अभूतपूर्व गति आएगी।

आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
इस प्रोजेक्ट का पूरा दारोमदार भारतीय तकनीक और कौशल पर टिका है। गोवा के रासईम स्थित शिपयार्ड में इसका निर्माण होना यह साबित करता है कि भारत अब जटिल समुद्री रक्षा तकनीकों में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो रहा है। यह कदम देश की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देगा।
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