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CISF: 75 करोड़ में तैयार होगा सीआईएसएफ का नया मुख्यालय, मंत्री ने किया ₹136 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar
Updated Mon, 22 Jun 2026 04:13 PM IST
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सार
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने सोमवार को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के नए मुख्यालय भवन की आधारशिला रखी। सीआईएसएफ के नए मुख्यालय का निर्माण केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जाएगा।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने सोमवार को नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के नए मुख्यालय भवन की आधारशिला रखी। मुख्यालय के निर्माण की अनुमानित लागत 75 करोड़ रुपये है। इसके साथ ही गृह राज्य मंत्री संजय कुमार ने 136.03 करोड़ रुपये की लागत वाली सीआईएसएफ की कई नव-निर्मित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया।
सीआईएसएफ के नए मुख्यालय का निर्माण केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जाएगा। नौ मंजिला इस अत्याधुनिक इमारत में महानिदेशक और बल की विभिन्न शाखाओं के कार्यालयों के साथ-साथ एक उन्नत नियंत्रण कक्ष, आधुनिक सम्मेलन कक्ष, विशाल सभागार, पुस्तकालय, व्यायामशाला और अन्य विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
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बंडी संजय कुमार ने तीन अन्य परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया है।
• राष्ट्रीय औद्योगिक सुरक्षा अकादमी हैदराबाद में 34.22 करोड़ रुपये की लागत से बना अधीनस्थ अधिकारी मेस (आदित्य)
• एनआईएसए, हैदराबाद में ही 20.53 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित अत्याधुनिक प्रशिक्षण भवन (अभ्यास)
• चौथी आरक्षित वाहिनी, अमरावतीपुदुर, शिवगंगा (तमिलनाडु) में 5.50 करोड़ रुपये की लागत से बने अधीनस्थ अधिकारी आवास
1-1 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता राशि
समारोह के दौरान, बल के प्रति अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले दिवंगत सीआईएसएफ कर्मियों के आश्रित परिवारों को व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना के तहत 1-1 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता राशि के चेक सौंपे गए। इसके अलावा, बल की 'संरक्षिका' और भारतीय स्टेट बैंक की एक संयुक्त पहल के तहत, बल कर्मियों के विशेष आवश्यकता वाले (दिव्यांग) बच्चों को कस्टमाइज्ड मोटराइज्ड व्हीलचेयर भी प्रदान की गईं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने सीएपीएफ कर्मियों और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया। जवानों के लिए शुरू की गई योजनाओं में 'आयुष्मान सीएपीएफ' और 'कैपफिम्स' के माध्यम से कैशलेस स्वास्थ्य सुविधाएं, 'सीएपीएफ ई-आवास' पोर्टल के जरिए पारदर्शी आवास आवंटन, और एक अत्यंत संवेदनशील विकलांगता नीति शामिल है।
सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने बदलती सुरक्षा चुनौतियों और नए खतरों से निपटने के लिए बल की मुस्तैदी का उल्लेख किया। आज के दौर में सुरक्षा चिंताएं पारंपरिक नहीं रह गई हैं, बल्कि इनमें साइबर हमले, डिजिटल तोड़फोड़, ड्रोन और तकनीक-आधारित 'हाइब्रिड खतरे' शामिल हो चुके हैं। देश की 'ब्लू इकोनॉमी' को सुरक्षित करने की दिशा में, सीआईएसएफ को इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी कोड के तहत एक 'मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन' का दर्जा दिया गया है, जो अब प्रमुख बंदरगाहों के सुरक्षा ऑडिट और मूल्यांकन का काम करेगा। इसके अलावा, बल ने जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उच्च-सुरक्षा वाली जेलों का जिम्मा भी संभाल लिया है, जो आंतरिक सुरक्षा प्रबंधन में सीआईएसएफ की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। तकनीक-आधारित सुरक्षा समाधानों पर जोर देते हुए रंजन ने बताया कि आरटीसी बहरोड़ को 'ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक' के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
खतरनाक ड्रोन हमलों से महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को बचाने के लिए सीआईएसएफ को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, देश के प्रमुख संस्थानों जैसे आईआईटी मद्रास प्रवर्तक, नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी, गांधीनगर और सी-डैक के सहयोग से बल की विशेष साइबर सुरक्षा टीमों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। बल में 'नारी शक्ति' (महिला सशक्तिकरण) की दिशा में उठाए गए एक बड़े कदम का जिक्र करते हुए डीजी ने बताया कि गृह मंत्रालय ने नूंह, हरियाणा में सीआईएसएफ की पहली पूर्ण-महिला आरक्षित बटालियन (जिसमें 1024 महिला कर्मी शामिल होंगी) की स्थापना को भी मंजूरी दे दी है।