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SC: बिना रजिस्ट्रेशन कैसे दौड़ रहे वाहन? चंबल में अवैध खनन पर कोर्ट की फटकार, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रिया दुबे
Updated Thu, 14 May 2026 12:15 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में जारी अवैध रेत खनन पर राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि इससे घड़ियाल समेत कई जलीय और विलुप्तप्राय वन्यजीवों पर खतरा मंडरा रहा है। अदालत ने राजस्थान के कई वरिष्ठ अधिकारियों को 19 मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में जारी अवैध रेत खनन को लेकर राजस्थान सरकार और अधिकारियों पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैले इस अभयारण्य में अवैध खनन से घड़ियाल समेत कई जलीय और विलुप्तप्राय वन्यजीवों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है।
दरअसल, 2 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकारों को अमीकस क्यूरी और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्टों पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। इन रिपोर्टों में चंबल अभयारण्य में बड़े पैमाने पर अवैध खनन गतिविधियों का उल्लेख किया गया था। अदालत ने राज्यों और पर्यावरण मंत्रालय से संरक्षण एवं निगरानी उपायों पर भी हलफनामा मांगा था।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को भी मामले में पक्षकार बनाया है और प्रभावित इलाकों में पुलों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी पूछा कि खनन और परिवहन गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी के लिए CCTV कैमरे लगाने में क्या दिक्कत है।
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कोर्ट ने क्या दिए निर्देश?
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की पीठ ने राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) और खनन, वित्त, वन, पर्यावरण तथा परिवहन व सड़क सुरक्षा विभागों के प्रमुख सचिवों को 19 मई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सभी अधिकारियों से अलग-अलग हलफनामे दाखिल कर 2 अप्रैल के आदेश के पालन की जानकारी देने को कहा है।
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दरअसल, 2 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकारों को अमीकस क्यूरी और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्टों पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। इन रिपोर्टों में चंबल अभयारण्य में बड़े पैमाने पर अवैध खनन गतिविधियों का उल्लेख किया गया था। अदालत ने राज्यों और पर्यावरण मंत्रालय से संरक्षण एवं निगरानी उपायों पर भी हलफनामा मांगा था।
कोर्ट ने क्या सवाल पूछे?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने खास तौर पर सवाल उठाया कि बिना पंजीकरण वाले ट्रैक्टर और खनन वाहन अब भी खुलेआम कैसे चल रहे हैं। अदालत ने राजस्थान परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग से पूछा कि मोटर वाहन अधिनियम के उल्लंघन पर क्या कार्रवाई की गई, दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए और अवैध खनन सामग्री के परिवहन को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को भी मामले में पक्षकार बनाया है और प्रभावित इलाकों में पुलों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी पूछा कि खनन और परिवहन गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी के लिए CCTV कैमरे लगाने में क्या दिक्कत है।