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Kerala: 'पहचान कोई वर्तनी परीक्षा नहीं है', केरलम पर थरूर के सवाल का माकपा नेता जॉन ब्रिटास ने दिया जवाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 25 Feb 2026 06:01 PM IST
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सार
Kerala: माकपा नेता जॉन ब्रिटास ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर के 'केरल' का नाम 'केरलम' किए जाने पर उठाए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि पहचान कोई वर्तनी की परीक्षा नहीं होती। उन्होंने तंज का जवाब देते हुए कहा कि नाम में बदलाव से लोगों की पहचान नहीं बदलती और मलयाली पहले की तरह मलयाली ही रहेंगे।
जॉन ब्रिटास, शशि थरूर
- फोटो : एक्स/जॉन ब्रिटास/शशि थरूर
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विस्तार
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता जॉन ब्रिटास ने बुधवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर के सवाल का जवाब दिया। थरूर ने पूछा था कि केरल का नाम बदलकर 'केरलम' किए जाने से बाद अब 'केरलाइट' और 'केरलन' जैसे शब्दों का क्या होगा। ब्रिटास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, पहचान कोई वर्तनी (स्पेलिंग) की परीक्षा नहीं है।
थरूर ने 'केरल' का नाम बदलकर 'केरलम' किए जाने पर तंज कसा था। कांग्रेस नेता ने एक अन्य पोस्ट को साझा करते हुए यह भी पूछा था कि राज्य का नाम क्यों बदला जा रहा है।
जॉन ब्रिटास ने क्या कहा?
ब्रिटास ने थरूर को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें 'सूक्ष्म जीव' और 'खनिज' वाली चिंता से बाहर आना चाहिए। उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा, हम लोग पहले की तरह मलयाली या मल्लू ही बने रहेंगे, जैसे दशकों से रहे हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'हम सभ्य समाज में मलयाली और दोस्तों के बीच मल्लू बनकर काफी खुशी से जी रहे हैं।। 'केरल' से 'केरलम' की ओर धीरे-धीरे बढ़ने से पहचान का कोई बड़ा संकट नहीं होगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आंध्र प्रदेश का व्यक्ति आज भी तेलुगु है, तमिलनाडु का व्यक्ति अब भी तमिल है और पश्चिम बंगाल के लोग अब भी बंगाली हैं। ब्रिटास ने कहा, किसी ने घबराकर नए शब्द नहीं गढ़े और न ही सोशल मीडिया पर हंगामा किया। उन्होंने आगे कहा, अगर 'केरलम' से आपको नए शब्द बनाने की इच्छा होती है तो आप 'केरलाइट' शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं। हम बाकी लोग तो दशकों की तरह मलयाली या मल्लू ही रहेंगे। उन्होंने आगे कहा, पहचान कोई वर्तनी की परीक्षा नहीं है। यह वह चीज है जो तब भी बनी रहती है, जब आप दिल्ली में बिरयानी मंगाते हैं और कोई मुस्कुराते हुए कहता है- 'मल्लू दा'।
ये भी पढ़ें: बारामती विमान हादसे की FIR दर्ज करने से पुलिस ने किया इनकार, रोहित पवार बोले- शक गहराता जा रहा है
थरूर ने क्या कहा था?
मंगलवार को थरूर ने एक्स पर हल्के-फुल्के अंदाज में पूछा था कि नए 'केरलम' के निवासियों के लिए अब 'केरलाइट' और 'केरलन' जैसे शब्दों का क्या होगा। उन्होंने मजाक में कहा था कि 'केरलमाइट' किसी सूक्ष्म जीव जैसा लगता है और 'केरलमियन' किसी दुर्लभ खनिज जैसा। उन्होंने यह भी कहा था कि केरल के मुख्यमंत्री कार्यालय को इस बदलाव से जुड़े नए शब्दों के लिए प्रतियोगिता शुरू करनी चाहिए।
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थरूर ने 'केरल' का नाम बदलकर 'केरलम' किए जाने पर तंज कसा था। कांग्रेस नेता ने एक अन्य पोस्ट को साझा करते हुए यह भी पूछा था कि राज्य का नाम क्यों बदला जा रहा है।
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जॉन ब्रिटास ने क्या कहा?
ब्रिटास ने थरूर को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें 'सूक्ष्म जीव' और 'खनिज' वाली चिंता से बाहर आना चाहिए। उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा, हम लोग पहले की तरह मलयाली या मल्लू ही बने रहेंगे, जैसे दशकों से रहे हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'हम सभ्य समाज में मलयाली और दोस्तों के बीच मल्लू बनकर काफी खुशी से जी रहे हैं।। 'केरल' से 'केरलम' की ओर धीरे-धीरे बढ़ने से पहचान का कोई बड़ा संकट नहीं होगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आंध्र प्रदेश का व्यक्ति आज भी तेलुगु है, तमिलनाडु का व्यक्ति अब भी तमिल है और पश्चिम बंगाल के लोग अब भी बंगाली हैं। ब्रिटास ने कहा, किसी ने घबराकर नए शब्द नहीं गढ़े और न ही सोशल मीडिया पर हंगामा किया। उन्होंने आगे कहा, अगर 'केरलम' से आपको नए शब्द बनाने की इच्छा होती है तो आप 'केरलाइट' शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं। हम बाकी लोग तो दशकों की तरह मलयाली या मल्लू ही रहेंगे। उन्होंने आगे कहा, पहचान कोई वर्तनी की परीक्षा नहीं है। यह वह चीज है जो तब भी बनी रहती है, जब आप दिल्ली में बिरयानी मंगाते हैं और कोई मुस्कुराते हुए कहता है- 'मल्लू दा'।
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थरूर ने क्या कहा था?
मंगलवार को थरूर ने एक्स पर हल्के-फुल्के अंदाज में पूछा था कि नए 'केरलम' के निवासियों के लिए अब 'केरलाइट' और 'केरलन' जैसे शब्दों का क्या होगा। उन्होंने मजाक में कहा था कि 'केरलमाइट' किसी सूक्ष्म जीव जैसा लगता है और 'केरलमियन' किसी दुर्लभ खनिज जैसा। उन्होंने यह भी कहा था कि केरल के मुख्यमंत्री कार्यालय को इस बदलाव से जुड़े नए शब्दों के लिए प्रतियोगिता शुरू करनी चाहिए।
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