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विदेश से डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले भारत में हो रहे फेल, दो साल में 85 हजार विदेशी डिग्री वाले डॉक्टरों में से 17 हजार पास

Sat, 15 May 2021 06:57 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 15 May 2021 06:57 PM IST
सार

भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम 1956 की धारा 13 (4क) में उल्लेख है कि ऐसे किसी विद्यार्थी, जिसने भारत से बाहर किसी देश से चिकित्सा योग्यता प्राप्त की है, को राज्य चिकित्सा परिषद में नाम दर्ज कराने के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट अर्थात फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन, पास करना होगा...

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In two years, out of 85 thousand foreign degree doctors, only 17 thousand have passed in Foreign Medical Graduate Examination
मेडिकल शिक्षा - फोटो : Amar Ujala (File Photo)

विस्तार

कोरोना से लड़ी जा रही जंग में देश के मेडिकल स्टाफ यानी डॉक्टर एवं दूसरे कर्मियों पर भारी दबाव है। पिछले 16 माह के दौरान यह स्टाफ कोरोना के साथ लगातार जंग लड़ रहा है। अपनी क्षमता से बाहर जाकर कोरोना मरीजों की जान बचाने में जुटे अनेक डॉक्टर मारे जा चुके हैं। इसके मद्देनजर कई विशेषज्ञों ने यह सलाह दी थी कि विदेशों से मेडिकल की पढ़ाई कर स्वदेश लौटने वाले छात्रों को कोरोना की जंग में उतारा जाए। कोरोना की तीसरी लहर से पहले उन्हें प्रशिक्षित किया जा सकता है। उन्हें भारत में मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत ट्रेनिंग दे दी जाएगी। इससे भारतीय डॉक्टरों का कुछ दबाव कम हो सकता है। इस दिशा में कदम बढ़ाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। हालांकि विदेश से डॉक्टरी की डिग्री लेकर आने वाले छात्रों की रिपोर्ट ठीक नहीं है। दो साल में 85 हजार विदेशी डिग्री वाले डॉक्टरों में से केवल 17 हजार ही पास हो सके हैं। बाकी छात्र स्क्रीनिंग टेस्ट यानी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन 'एफएमजीआई' में फेल हो गए हैं।

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यह है विदेशी छात्रों का रिपोर्ट कार्ड....

सत्र             उपस्थित विद्यार्थी      पास विद्यार्थी
जून 2028            9274                2480  
दिसंबर 2018        12077              1969
जून 2019            12934              2992
दिसंबर 2019        15663              4444
जून 2020             17198             1999
दिसंबर 2020        18576              3928  
कुल                    85722             17812

बता दें कि विदेश से डिग्री लेकर आने वाले छात्रों को देश में प्रैक्टिस के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट देना पड़ता है। भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम 1956 की धारा 13 (4क) में उल्लेख है कि ऐसे किसी विद्यार्थी, जिसने भारत से बाहर किसी देश से चिकित्सा योग्यता प्राप्त की है, को राज्य चिकित्सा परिषद में नाम दर्ज कराने के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट अर्थात फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन, पास करना होगा। इसके अलावा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग 'एनएमसी' अधिनियम की धारा 36 में भारत के बाहर स्थित चिकित्सा संस्थानों द्वारा प्रदत चिकित्सा योग्यता की पहचान के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग 'एनएमसी' के तहत अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के लिए प्रावधान किया गया है। इसके उपखंड '4' में प्रावधान है कि एनएमसी अधिनियम के लागू होने की तारीख से पहले मान्यता प्राप्त सभी चिकित्सा योग्यताएं भी इस अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त चिकित्सा योग्यताएं होंगी। आगे धारा 39 और 40 में भारत के बाहर किसी चिकित्सा संस्थान द्वारा प्रदत्त किसी चिकित्सा योग्यता को मान्यता देने तथा उसकी मान्यता समाप्त करने के लिए प्रावधान किया गया है।
 

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