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गगनयान मिशन: समंदर में पलट भी गया केबिन तो खुद-ब-खुद हो जाएगा सीधा, क्या है ISRO की स्वदेशी तकनीक?
Sun, 12 Jul 2026 08:32 PM IST
राहुल कुमार
पीटीआई, बंगलूरू
पीटीआई, बंगलूरू
Published by: राहुल कुमार
Updated Sun, 12 Jul 2026 08:32 PM IST
सार
इसरो ने गगनयान मिशन के लिए क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम के तीन अहम टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। यह आधुनिक तकनीक समंदर में लैंडिंग के बाद मॉड्यूल को सीधा रखकर अंतरिक्ष यात्रियों की जान की रक्षा करेगी। क्या है यह तकनीक जानिए...
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, ISRO
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। इसरो ने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल सिस्टम से जुड़े तीन बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इनमें से पहला और सबसे मुख्य परीक्षण समंदर में लैंडिंग के बाद अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने से जुड़ा था। इसरो के मुताबिक, पूरे मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की जान सुरक्षित रखना सबसे बड़ी जरूरत है।
क्या समंदर की लहरों के बीच अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह सुरक्षित रह पाएंगे?
इसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए इसरो ने एक बेहद खास और आधुनिक तकनीक विकसित की है। इस तकनीक को कोल्ड-गैस आधारित 'क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम' (सीएमयूएस) नाम दिया गया है, जिसका आज पहली बार सफल परीक्षण किया गया। यह सिस्टम उस वक्त काम आएगा जब अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर आ रहा मॉड्यूल अंतरिक्ष से लौटकर समंदर में लैंड करेगा और लहरों के थपेड़ों के बीच उसे सीधा और सुरक्षित रखना होगा।
कैसे काम करती है यह नई तकनीक ?
इसरो ने इस जटिल परीक्षण को अंजाम देने के लिए एक विशेष रणनीति अपनाई। इसके लिए सीएमयूएस के सभी जरूरी हिस्सों को मिलाकर एक उन्नत सिस्टम-लेवल क्वालिफिकेशन टेस्ट सेटअप तैयार किया गया था। इस हाई-टेक सेटअप के जरिए प्राइमरी इन्फ्लेशन मॉड्यूल के लिए इन्फ्लेशन टेस्ट को पूरी सफलता के साथ पूरा किया गया, जिसने वैज्ञानिकों की उम्मीदों के मुताबिक सटीक नतीजे दिए।
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इस पूरी प्रक्रिया के दौरान हाई-प्रेशर गैस बोतल में बेहद उच्च दबाव के साथ भरी गई गैस का उपयोग किया गया। इस गैस को एक कंट्रोल वॉल्व के माध्यम से फ्लोटेशन सिस्टम के भीतर भेजा गया, जिससे वह सिस्टम तुरंत और पूरी ताकत से फूल गया। यह तकनीक सुनिश्चित करेगी कि लैंडिंग के बाद मॉड्यूल पानी में डूबे नहीं और अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित बाहर आ सकें।
यह भी पढ़ें: ISRO: गगनयान मिशन से पहले इसरो को बड़ी कामयाबी, 2.5 किमी ऊंचाई से मुख्य पैराशूट का अहम परीक्षण रहा सफल
इस परीक्षण की पांच बड़ी बातें
इसरो के इस नए सुरक्षा परीक्षण के केंद्र में कई महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदु शामिल हैं, जिन्हें समझना जरूरी है:
अब आगे क्या?
इसरो द्वारा इस सिस्टम के तीनों चरण सफलतापूर्वक पूरे किए जाने के बाद अब गगनयान मिशन अपने अगले पड़ाव की ओर बढ़ गया है। यह कामयाबी इसलिए बड़ी है क्योंकि मानव मिशन में तकनीकी खराबी की गुंजाइश शून्य रखनी होती है। आने वाले दिनों में इसरो इस क्रू मॉड्यूल के कुछ और व्यावहारिक परीक्षण समंदर के वास्तविक माहौल में भी कर सकता है।
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क्या समंदर की लहरों के बीच अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह सुरक्षित रह पाएंगे?
इसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए इसरो ने एक बेहद खास और आधुनिक तकनीक विकसित की है। इस तकनीक को कोल्ड-गैस आधारित 'क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम' (सीएमयूएस) नाम दिया गया है, जिसका आज पहली बार सफल परीक्षण किया गया। यह सिस्टम उस वक्त काम आएगा जब अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर आ रहा मॉड्यूल अंतरिक्ष से लौटकर समंदर में लैंड करेगा और लहरों के थपेड़ों के बीच उसे सीधा और सुरक्षित रखना होगा।
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कैसे काम करती है यह नई तकनीक ?
इसरो ने इस जटिल परीक्षण को अंजाम देने के लिए एक विशेष रणनीति अपनाई। इसके लिए सीएमयूएस के सभी जरूरी हिस्सों को मिलाकर एक उन्नत सिस्टम-लेवल क्वालिफिकेशन टेस्ट सेटअप तैयार किया गया था। इस हाई-टेक सेटअप के जरिए प्राइमरी इन्फ्लेशन मॉड्यूल के लिए इन्फ्लेशन टेस्ट को पूरी सफलता के साथ पूरा किया गया, जिसने वैज्ञानिकों की उम्मीदों के मुताबिक सटीक नतीजे दिए।
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इस पूरी प्रक्रिया के दौरान हाई-प्रेशर गैस बोतल में बेहद उच्च दबाव के साथ भरी गई गैस का उपयोग किया गया। इस गैस को एक कंट्रोल वॉल्व के माध्यम से फ्लोटेशन सिस्टम के भीतर भेजा गया, जिससे वह सिस्टम तुरंत और पूरी ताकत से फूल गया। यह तकनीक सुनिश्चित करेगी कि लैंडिंग के बाद मॉड्यूल पानी में डूबे नहीं और अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित बाहर आ सकें।
यह भी पढ़ें: ISRO: गगनयान मिशन से पहले इसरो को बड़ी कामयाबी, 2.5 किमी ऊंचाई से मुख्य पैराशूट का अहम परीक्षण रहा सफल
इस परीक्षण की पांच बड़ी बातें
इसरो के इस नए सुरक्षा परीक्षण के केंद्र में कई महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदु शामिल हैं, जिन्हें समझना जरूरी है:
- क्रू की सुरक्षा: समंदर में उतरने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को हर तरह के जोखिम से बचाना।
- सीएमयूएस का विकास: मॉड्यूल को पानी के ऊपर सीधा रखने के लिए कोल्ड-गैस तकनीक का इस्तेमाल।
- इन्फ्लेशन टेस्ट: कंट्रोल वॉल्व के जरिए फ्लोटेशन बैग्स को तेजी से फुलाने की क्षमता की जांच।
- हाई-प्रेशर गैस का कमाल: विपरीत परिस्थितियों में भी सिस्टम को तुरंत सक्रिय करने का सफल प्रयोग।
- मिशन की मजबूती: इस सफलता से भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की राह बेहद आसान हो गई है।
अब आगे क्या?
इसरो द्वारा इस सिस्टम के तीनों चरण सफलतापूर्वक पूरे किए जाने के बाद अब गगनयान मिशन अपने अगले पड़ाव की ओर बढ़ गया है। यह कामयाबी इसलिए बड़ी है क्योंकि मानव मिशन में तकनीकी खराबी की गुंजाइश शून्य रखनी होती है। आने वाले दिनों में इसरो इस क्रू मॉड्यूल के कुछ और व्यावहारिक परीक्षण समंदर के वास्तविक माहौल में भी कर सकता है।