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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई, किस-किस ने दायर की है याचिका?
Sun, 12 Jul 2026 08:10 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 12 Jul 2026 08:10 PM IST
सार
अयोध्या राम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ इस स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर विचार करेगी।
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम जन्मभूमि मंदिर के दान में कथित हेराफेरी का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत के दरवाजे पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट कल यानी 13 जुलाई (सोमवार) को इस पूरे मामले की स्वतंत्र और अदालत की निगरानी में जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी की नजरें देश के शीर्ष न्यायालय पर टिकी हैं।
क्या दान के पैसों में वाकई कोई बड़ी गड़बड़ी हुई है?
याचिकाओं में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है। अब इस पूरे कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की गुहार लगाई गई है। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालती गलियारों से लेकर आम जनता के बीच कल होने वाली सुनवाई को लेकर कौतूहल बना हुआ है।
किनके सामने होगी सुनवाई और क्या हैं मुख्य मांगें?
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करने जा रही है। शीर्ष अदालत के सामने दायर की गई याचिकाओं के इस बैच में मुख्य रूप से एक ही मांग उठाई गई है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, जिसकी निगरानी खुद अदालत करे।
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किस-किस ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका?
अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव: सीबीआई की अगुवाई वाली मल्टी-डिसिप्लिनरी एसआईटी जांच, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और ट्रस्ट की अनियमितताओं की जांच की मांग वाली जनहित याचिका। यह सबसे चर्चित याचिका है, जिस पर तत्काल सुनवाई की मांग की गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अवकाश के बाद सुनवाई का निर्देश दिया।
अधिवक्ता अनूप अवस्थी: सीजेआई से याचिका में स्वतंत्र जांच (सीबीआई या कोर्ट निगरानी वाली) और अनियमितताओं की जांच की मांग।
आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह: जुलाई 2026 में दायर चाचिका में ट्रस्ट के फाइनेंस का ऑडिट, पूर्ण दान विवरण (2020 से अब तक) पेश करने, सीबीआई जांच (कोर्ट निगरानी में) और फंड्स के उपयोग पर रोक की मांग।
अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी: फॉरेंसिक ऑडिट, सबूत संरक्षण (सीसीटीवी, रिकॉर्ड्स आदि), ट्रांसपेरेंसी फ्रेमवर्क और जांच की मांग वाली याचिका।
राम मंदिर से क्या-क्या चोरी होने का दावा?
अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए नकद चढ़ावे, सोना-चांदी के आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं में कथित गड़बड़ी और गबन के आरोप लगे हैं। समाजवादी पार्टी नेता पवन पांडे ने शुरुआत में ₹5-7.5 करोड़ की चोरी का दावा किया, जबकि अन्य विपक्षी नेता अरविंद केजरीवाल ने ₹200 करोड़ तक नकद, हीरे-जेवरात, सोने-चांदी की वस्तुएं और 200 किलो चांदी गायब होने का आरोप लगाया।
एसआईटी जांच और एफआईआर के अनुसार, गिनती के दौरान कर्मचारियों द्वारा नोटों की गड्डियाँ, आभूषण और विदेशी मुद्रा चुराने के सीसीटीवी सबूत सामने आए, जिनमें आठ आरोपियों से अब तक लगभग ₹80 लाख नकद, कुछ विदेशी मुद्रा और आभूषण बरामद हुए हैं। एसआईटी अब कुल गबन की राशि और बड़े नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। ट्रस्ट इन आरोपों को कुछ कर्मचारियों की व्यक्तिगत हरकत बताते हुए इनकार कर चुका है।
सुनवाई से क्या निकलेगा रास्ता?
सोमवार 13 जुलाई को होने वाली यह सुनवाई इस मायने में बेहद खास है कि सुप्रीम कोर्ट इन याचिकाओं को स्वीकार करता है या नहीं। यदि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे कदम बढ़ाता है, तो वह केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित मंदिर ट्रस्ट को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांग सकता है।
कैसे सामने आई घोटाले की बात?
बताते चलें कि मामले की शुरुआत समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडे के आरोपों से हुई, जिसके बाद ट्रस्ट की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। एसआईटी पहले से ही मामले की जांच कर रही है, इस बीच कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। इस बीच कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने भाजपा और आरएसएस को घेरना शुरु कर दिया है।
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क्या दान के पैसों में वाकई कोई बड़ी गड़बड़ी हुई है?
याचिकाओं में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है। अब इस पूरे कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की गुहार लगाई गई है। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालती गलियारों से लेकर आम जनता के बीच कल होने वाली सुनवाई को लेकर कौतूहल बना हुआ है।
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किनके सामने होगी सुनवाई और क्या हैं मुख्य मांगें?
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करने जा रही है। शीर्ष अदालत के सामने दायर की गई याचिकाओं के इस बैच में मुख्य रूप से एक ही मांग उठाई गई है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, जिसकी निगरानी खुद अदालत करे।
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किस-किस ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका?
अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव: सीबीआई की अगुवाई वाली मल्टी-डिसिप्लिनरी एसआईटी जांच, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और ट्रस्ट की अनियमितताओं की जांच की मांग वाली जनहित याचिका। यह सबसे चर्चित याचिका है, जिस पर तत्काल सुनवाई की मांग की गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अवकाश के बाद सुनवाई का निर्देश दिया।
अधिवक्ता अनूप अवस्थी: सीजेआई से याचिका में स्वतंत्र जांच (सीबीआई या कोर्ट निगरानी वाली) और अनियमितताओं की जांच की मांग।
आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह: जुलाई 2026 में दायर चाचिका में ट्रस्ट के फाइनेंस का ऑडिट, पूर्ण दान विवरण (2020 से अब तक) पेश करने, सीबीआई जांच (कोर्ट निगरानी में) और फंड्स के उपयोग पर रोक की मांग।
अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी: फॉरेंसिक ऑडिट, सबूत संरक्षण (सीसीटीवी, रिकॉर्ड्स आदि), ट्रांसपेरेंसी फ्रेमवर्क और जांच की मांग वाली याचिका।
राम मंदिर से क्या-क्या चोरी होने का दावा?
अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए नकद चढ़ावे, सोना-चांदी के आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं में कथित गड़बड़ी और गबन के आरोप लगे हैं। समाजवादी पार्टी नेता पवन पांडे ने शुरुआत में ₹5-7.5 करोड़ की चोरी का दावा किया, जबकि अन्य विपक्षी नेता अरविंद केजरीवाल ने ₹200 करोड़ तक नकद, हीरे-जेवरात, सोने-चांदी की वस्तुएं और 200 किलो चांदी गायब होने का आरोप लगाया।
एसआईटी जांच और एफआईआर के अनुसार, गिनती के दौरान कर्मचारियों द्वारा नोटों की गड्डियाँ, आभूषण और विदेशी मुद्रा चुराने के सीसीटीवी सबूत सामने आए, जिनमें आठ आरोपियों से अब तक लगभग ₹80 लाख नकद, कुछ विदेशी मुद्रा और आभूषण बरामद हुए हैं। एसआईटी अब कुल गबन की राशि और बड़े नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। ट्रस्ट इन आरोपों को कुछ कर्मचारियों की व्यक्तिगत हरकत बताते हुए इनकार कर चुका है।
सुनवाई से क्या निकलेगा रास्ता?
सोमवार 13 जुलाई को होने वाली यह सुनवाई इस मायने में बेहद खास है कि सुप्रीम कोर्ट इन याचिकाओं को स्वीकार करता है या नहीं। यदि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे कदम बढ़ाता है, तो वह केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित मंदिर ट्रस्ट को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांग सकता है।
कैसे सामने आई घोटाले की बात?
बताते चलें कि मामले की शुरुआत समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडे के आरोपों से हुई, जिसके बाद ट्रस्ट की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। एसआईटी पहले से ही मामले की जांच कर रही है, इस बीच कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। इस बीच कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने भाजपा और आरएसएस को घेरना शुरु कर दिया है।