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'I will commit suicide...' Why did Dr. Manmohan Singh say this? Revealed in Dr. S.Y. Quraishi's book.
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'मैं आत्मह*त्या कर लूंगा...' क्यों बोले थे Dr. Manmohan Singh? Dr. S.Y. Quraishi की किताब में खुलासा
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Sun, 12 Jul 2026 10:04 PM IST
क्या आपने कभी किसी प्रधानमंत्री को यह कहते सुना है "अगर आप मेरे बारे में ऐसा सोचते हैं, तो मैं आत्महत्या कर लूंगा"? यह सुनकर यकीन करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने अपनी नई किताब "इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज, नॉट ए मेमॉयर" में ऐसा ही एक भावुक प्रसंग साझा किया है। यह कहानी सिर्फ दो लोगों की बातचीत नहीं, बल्कि उस दौर की है जब लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को लेकर देश की सर्वोच्च सत्ता बेहद संवेदनशील थी।
कहानी शुरू होती है साल 2012 से... उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव चल रहे थे। चुनाव आयोग आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन करा रहा था। इसी दौरान तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने चुनाव प्रचार में मुस्लिमों के लिए 4.5 प्रतिशत उप-कोटा बढ़ाकर 9 प्रतिशत करने का वादा कर दिया। भाजपा ने इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
सुनवाई के बाद चुनाव आयोग ने सलमान खुर्शीद को कड़ी फटकार लगाई। लेकिन ये मामला यहीं नहीं रुका। कांग्रेस के कुछ नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। इससे आयोग और केंद्र सरकार के बीच तनाव का माहौल बन गया।
अपनी किताब में एस.वाई. कुरैशी लिखते हैं कि उन्होंने इस बयानबाजी पर अपनी नाराजगी प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई। इसके कुछ ही समय बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उन्हें तत्काल मिलने के लिए बुलाया।
मुलाकात शुरू हुई तो मनमोहन सिंह ने सबसे पहले सफाई दी कि उन्हें मंत्रियों के इन बयानों की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें पहले पता होता तो वे संबंधित मंत्रियों को तुरंत फटकार लगाते। फिर बातचीत के दौरान उन्होंने वह भावुक वाक्य कहा, जिसे कुरैशी ने अपनी किताब में दर्ज किया है "अगर आप मेरे बारे में ऐसा सोचते हैं, तो मैं आत्महत्या कर लूंगा।"
कुरैशी के अनुसार, यह किसी राजनीतिक बयान का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की भावनात्मक प्रतिक्रिया थी, जो चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के सम्मान को लेकर बेहद गंभीर था। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है और उसकी गरिमा हर हाल में बनी रहनी चाहिए।
किताब में दावा किया गया है कि इस मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री ने संबंधित मंत्रियों तक अपना कड़ा संदेश पहुंचाया। इसके बाद चुनाव आयोग के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी लगभग बंद हो गई।
डॉ. मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे और उन्हें हमेशा शांत, संयमित तथा संस्थाओं का सम्मान करने वाले नेता के रूप में याद किया जाता है। वहीं एस.वाई. कुरैशी जुलाई 2010 से जून 2012 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे। उनकी नई किताब में सार्वजनिक जीवन के कई अनसुने किस्से दर्ज हैं, लेकिन यह प्रसंग इसलिए खास बन गया है क्योंकि यह सत्ता और संवैधानिक संस्थाओं के रिश्ते के एक बेहद मानवीय और भावुक पहलू को सामने लाता है।
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