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India-US Trade: कभी हां, कभी ना वाला रुख ही रुकावट... ट्रंप के अनावश्यक दबाव पर ये रणनीति अपनाएगा भारत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sat, 10 Jan 2026 04:12 AM IST
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सार
India-US Relations: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के लगातार बदलते बयानों और दबाव भरी रणनीति के बीच भारत ने चुपचाप बड़ा फैसला कर लिया है। आइए जानते हैं कि व्यापार समझौते से लेकर वैश्विक राजनीति तक, सरकार जल्दबाजी से दूर क्यों रहना चाहती है।
डोनाल्ड ट्रंप, नरेंद्र मोदी
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पीएम नरेंद्र मोदी के सीधे बातचीत न करने को व्यापार समझौते के किसी नतीजे पर न पहुंचने की वजह बता रहे हों, पर स्थिति इसके उलट है। दरअसल, समझौते में रुकावट की असल वजह अमेरिका की कभी हां तो कभी ना की नीति के अलावा ट्रंप के घरेलू राजनीति में भूचाल लाने वाले गैरजरूरी दावे हैं। भले ही रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका 500 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा हो, मगर इससे विचलित हुए बगैर भारत सरकार अपने पुराने रुख देखो और इंतजार करो पर ही कायम रहेगी।
ट्रंप के अस्थिर, अविश्वसनीय और गैरजरूरी दावों की राजनीति से कई देशों की घरेलू राजनीति में घमासान की स्थिति पैदा हुई है। इसी व्यापार समझौते पर ट्रंप के दावे के कारण जापान के पीएम शिगेरु इशिबा को सत्ता गंवानी पड़ी। ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर को देश में आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। वियतनाम से व्यापार समझौते पर बातचीत के बीच समझौते पर मुहर लगने की घोषणा कर ट्रंप ने फाम मिन्ह चिन्ह के लिए घरेलू राजनीति में मुश्किल हालात पैदा किए। सरकारी सूत्र ने बताया कि टैरिफ संबंधी अमेरिका का विधेयक भारत पर दबाव बनाने की नई कोशिश है। हालांकि उल्लेखनीय विकास दर व अमेरिका से इतर नए बाजार तलाशने में सफल भारत ने व्यापार समझौते के लिए जल्दबाजी नहीं दिखाने की रणनीति पर काम करेगा।
ये भी पढ़ें- 'BJP की विचारधारा सबके लिए काम करने की सीख देती है', नितिन गडकरी बोलें- मुसलमानों के खिलाफ नहीं
विपक्ष का निशाना बन सकती है मोदी सरकार
व्यापार समझौते से लेकर ऑपरेशन सिंदूर व अन्य मामलों तक ट्रंप के अविश्सनीय दावों से मोदी सरकार को विपक्ष का निशाना बनना पड़ रहा है। अनिश्चितता का आलम यह है कि बीते सितंबर में ट्रंप ने जन्मदिन की बधाई देते हुए पीएम मोदी को करीबी मित्र बताया। चंद दिनों बाद दावा किया कि व्यापार वार्ता रोकने पर भारत की सहमति है, जबकि तब वार्ता महत्वपूर्ण दौर में थी। बातचीत में मोदी ने गाजा शांति समझौते के लिए ट्रंप को बधाई दी थी।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मोदी-ट्रंप में कोई वार्ता नहीं
पहलगाम हमले के जवाब में आतंकियों के खिलाफ भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मोदी-ट्रंप में कोई वार्ता नहीं हुई। हालांकि ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम कराने का श्रेय लेने की कई बार कोशिश की। हाल में ट्रंप ने अपाचे हेलिकॉप्टर के लिए मोदी के विशेष अनुरोध का जिक्र किया। कहा, भारत 68 हेलिकॉप्टर के लिए अनुरोध कर रहा था। सच्चाई यह है कि भारत ने 28 हेलिकॉप्टर के लिए अनुरोध किया था, जो उसे बीते दिसंबर तक हासिल हो चुके थे।
ट्रंप के संघर्ष विराम का श्रेय लेने के बीच जर्मन मीडिया ने दावा किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ट्रंप ने मोदी से चार बार बात करने की नाकाम कोशिश की थी। लुटनिक ने भी इस बात की पुष्टि की है कि व्यापार समझौते के मामले में अमेरिका का रुख लगातार बदलता रहा है। हालांकि पॉडकास्ट में लुटनिक ने व्यापार समझौते के पटरी से नहीं उतरने का संकेत दिया, इसलिए भारत इसे अमेरिका की दबाव की रणनीति मान रहा है।
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विपक्ष का निशाना बन सकती है मोदी सरकार
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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मोदी-ट्रंप में कोई वार्ता नहीं
पहलगाम हमले के जवाब में आतंकियों के खिलाफ भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मोदी-ट्रंप में कोई वार्ता नहीं हुई। हालांकि ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम कराने का श्रेय लेने की कई बार कोशिश की। हाल में ट्रंप ने अपाचे हेलिकॉप्टर के लिए मोदी के विशेष अनुरोध का जिक्र किया। कहा, भारत 68 हेलिकॉप्टर के लिए अनुरोध कर रहा था। सच्चाई यह है कि भारत ने 28 हेलिकॉप्टर के लिए अनुरोध किया था, जो उसे बीते दिसंबर तक हासिल हो चुके थे।
ट्रंप के संघर्ष विराम का श्रेय लेने के बीच जर्मन मीडिया ने दावा किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ट्रंप ने मोदी से चार बार बात करने की नाकाम कोशिश की थी। लुटनिक ने भी इस बात की पुष्टि की है कि व्यापार समझौते के मामले में अमेरिका का रुख लगातार बदलता रहा है। हालांकि पॉडकास्ट में लुटनिक ने व्यापार समझौते के पटरी से नहीं उतरने का संकेत दिया, इसलिए भारत इसे अमेरिका की दबाव की रणनीति मान रहा है।
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