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पोर्ट पर घटेगी निर्भरता?: ग्रेट निकोबार में आकार ले रहा देश का नया रणनीतिक समुद्री केंद्र, जानें इसका लक्ष्य

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Fri, 01 May 2026 05:01 PM IST
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सार

ग्रेट निकोबार परियोजना का उद्देश्य इस द्वीप को एक रणनीतिक समुद्री और आर्थिक केंद्र के रूप में परिवर्तित करना है। पूर्व-पश्चिम शिपिंग मार्ग से इसकी निकटता का लाभ उठाते हुए, यह परियोजना विदेशी ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों पर निर्भरता को कम करेगी। साथ ही, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्यों को सर्वोपरि रखते हुए यह भारत की समुद्री सीमाओं को नई मजबूती प्रदान करेगी।

India's new strategic maritime hub takes shape at Great Nicobar; News in Hindi
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट - फोटो : IANS
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विस्तार

ग्रेट निकोबार परियोजना भारत के लिए एक नया रणनीतिक समुद्री और आर्थिक केंद्र बन रही है। इसका लक्ष्य ग्रेट निकोबार को वैश्विक पूर्व-पश्चिम शिपिंग मार्ग के करीब होने का लाभ दिलाना है। यह भारत की रक्षा और सुरक्षा के लिए विदेशी ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों पर निर्भरता घटाएगी। यह परियोजना अंडमान सागर और दक्षिण पूर्व एशिया में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करेगी। इसमें बंदरगाह-आधारित आर्थिक वृद्धि को पर्यावरणीय सुरक्षा और स्वदेशी समुदायों के संरक्षण के साथ संतुलित किया जाएगा।
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परियोजना के प्रमुख घटकों में 14.2 मिलियन टीईयू का अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल शामिल है। इसके साथ ही एक ग्रीनफील्ड अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और 450 एमवीए का गैस-सौर ऊर्जा संयंत्र भी बनाया जाएगा। एक नियोजित टाउनशिप भी इस परियोजना का हिस्सा है। भारत के बंदरगाहों में बड़े जहाजों के लिए गहरे पानी के बर्थ की कमी है। इस कारण से, कार्गो कोलंबो और सिंगापुर के माध्यम से भेजा जाता है। इससे भारत को काफी राजस्व का नुकसान होता है।

परियोजना में कई बड़े-बड़े निर्माण कार्य शामिल

  • इसमें एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय कंटेनर टर्मिनल बनाया जाएगा, जिसकी क्षमता 14.2 मिलियन कंटेनर (एमटीईयू) संभालने की होगी। साथ ही एक नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी बनेगा, जहां एक समय में करीब 4000 यात्रियों को संभाला जा सकेगा। इसके अलावा 450 एमवीए का गैस और सोलर से चलने वाला पावर प्लांट और एक नया प्लान किया हुआ शहर (टाउनशिप) भी बनाया जाएगा।
  • यह पूरा काम पर्यावरण के नियमों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इसके लिए सरकार से जरूरी मंज़ूरी ली गई है, जैसे ईआईए 2006 और आईसीआरजेड 2019 के तहत अनुमति मिली है। इस परियोजना में 42 जरूरी शर्तों का पालन करना होगा।
  • इसमें जंगल का बहुत कम हिस्सा, यानी सिर्फ 1.82% ही इस्तेमाल किया जाएगा। इसके बदले में 97.30 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नए पेड़ लगाए जाएंगे, ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे।
  • इस परियोजना में आदिवासी समुदायों का खास ध्यान रखा गया है। शोंपेन और निकोबारी जनजातियों को यहां से हटाने की कोई योजना नहीं है। बल्कि उनके लिए सुरक्षित क्षेत्र (ट्राइबल रिज़र्व) को और बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, ताकि उनका जीवन और संस्कृति सुरक्षित रह सके।
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रणनीतिक महत्व और विकास
गलाथिया खाड़ी में अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट विकसित किया जा रहा है। यह बंदरगाह पूर्व-पश्चिम अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग मार्ग के करीब, लगभग 40 समुद्री मील दूर स्थित है। इसकी प्राकृतिक जल गहराई 20 मीटर से अधिक है। यह रणनीतिक स्थान इसे गेटवे और ट्रांसशिपमेंट कार्गो दोनों को आकर्षित करने का लाभ देता है। इससे कोलंबो, सिंगापुर और क्लांग जैसे विदेशी बंदरगाहों पर भारत की निर्भरता कम होगी।

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पर्यटन और सामुदायिक कल्याण
द्वीप में विश्व स्तरीय पारिस्थितिक संसाधन हैं जो अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं। कनेक्टिविटी सुधारने और द्वीप को पर्यटन के लिए खोलने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा आवश्यक है। नया हवाई अड्डा खुलने पर कम से कम 10 लाख यात्रियों को संभालेगा। आदिवासी कल्याण केंद्रीय रहेगा, शोम्पेन और निकोबारी समुदायों का कोई विस्थापन नहीं होगा। अधिसूचित आदिवासी आरक्षित क्षेत्र में बढ़ोतरी भी होगी।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/may/doc202651860501.pdf
 
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