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यूरोप के बाद अमेरिका से करार: रोजगार समेत इन क्षेत्रों को मिलेगा बढ़ावा, कितनी बदलेगी भारत की आर्थिक तस्वीर?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 04 Feb 2026 05:19 AM IST
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सार

क्या भारत-अमेरिका के बीच हुआ यह व्यापार समझौता भारत को नया बाजार, निवेश और रोजगार देगा? क्या ट्रंप का पुराना रुख बदलेगा? यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को कितनी रफ्तार देगा? ये सवाल आज इसलिए उठ रहे है, क्योंकि भारत ने ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ओमान और यूरोपीय संघ के साथ बड़े व्यापार समझौते कर वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक ताकत दिखा दी है।

India-US trade agreement dubbed the mother of all deals will shape the country economic landscape
पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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भारत ने हाल में ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ व्यापार समझौते किए, फिर यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ मदर ऑफ ऑल डील्स पर मुहर लगाई। माना जा रहा है कि इसके बाद ही अमेरिका पर भारत के साथ व्यापार समझौते का दबाव बढ़ा, क्योंकि करीब छह महीने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारी-भरकम टैरिफ लगाने के दौरान ही भारत को मृत अर्थव्यवस्था करार दिया था। लेकिन, विशाल बाजार और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण भारत को नजरअंदाज करना उनके लिए मुमकिन नहीं था।

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ईयू के साथ सबसे बड़े करार के बाद अमेरिका के साथ समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को और जानदार बनाने वाला साबित होगा। आइए, एक नजर में जानें कि यह समझौता क्या है और भारत के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा....
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कालीन एवं हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मिलेगा बढ़ावा
कपड़े, चमड़े और गैर-चमड़े के जूते, रत्न-आभूषण, कालीन एवं हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बढ़ावा मिल सकता है क्योंकि उच्च टैरिफ के कारण इनके निर्यात में बाधा आ रही थी। कपड़ा और परिधान, रसायन,  फार्मास्यूटिकल्स, आभूषण व झींगा जैसे खाद्य पदार्थों के निर्यात में तेजी आएगी। भारत वियतनाम व बांग्लादेश जैसे एशियाई देशों से प्रतिस्पर्द्धी स्थिति में आ जाएगा। अगस्त अंत में अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से कपड़ा, आभूषण और झींगा जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ा था।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी-नवंबर में अमेरिका को निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 15.9% की वृद्धि हुई और यह 85.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि आयात 46.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया।अमेरिकी सरकार के अनुमान के अनुसार, 2024 में दोतरफा वस्तुओं व सेवाओं का व्यापार 212.3 बिलियन डॉलर रहा, जिसमें अमेरिकी वस्तुओं के व्यापार में 45.8 बिलियन डॉलर का घाटा और सेवाओं के व्यापार में मामूली अधिशेष रहा।

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भारत इन चिजों की बढ़ाएगा खरीद
अमेरिका से भारत पेट्रोलियम, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार उत्पाद एवं विमानों की खरीद बढ़ाएगा। साथ ही, कुछ ऐसे कृषि उत्पादों के लिए पहुंच भी मिल सकती है, जिनसे भारतीय किसानों को नुकसान न हो। 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था।

तेल खरीद पर असर
समझौते के तहत अमेरिका-वेनेजुएला से भारत तेल खरीद बढ़ाएगा। भारतीय तेल शोधक कंपनियां रूस से तेल खरीद घटा रही हैं और अमेरिका, मध्य पूर्व, अफ्रीका व दक्षिण अमेरिका से आपूर्ति बढ़ा रही हैं। हालांकि, मौजूदा रूसी अनुबंधों से बाहर निकलने में कंपनियों को समय लगेगा। फिलहाल, सरकार ने पूरी तरह से रोक का आदेश नहीं दिया है।

इस्पात-एल्युमीनियम पर कितना शुल्क
पारस्परिक टैरिफ कम होंगे, पर इस्पात, एल्युमीनियम, तांबा, ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स और कुछ अन्य वस्तुओं पर अमेरिका धारा 232 के तहत शुल्क लागू रख सकता है। ऐसे में समझौते के बावजूद भारत के अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले कुछ सामानों पर उच्च शुल्क लगता रहेगा या उनमें कृमिक रूप से कमी होगी।

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2024 में किन वस्तुओं और सेवाओं का रहा सबसे बड़ा योगदान?
2024 में भारत के अमेरिका को होने वाले मुख्य निर्यातों में दवा निर्माण और जैविक उत्पाद (8.1 अरब अमेरिकी डॉलर), दूरसंचार उपकरण (6.5 अरब अमेरिकी डॉलर), कीमती और अर्ध-कीमती पत्थर (5.3 अरब अमेरिकी डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (4.1 अरब अमेरिकी डॉलर), वाहन और ऑटो पुर्जे (2.8 अरब अमेरिकी डॉलर), सोने और अन्य कीमती धातुओं के आभूषण (3.2 अरब अमेरिकी डॉलर), सूती कपड़े (सहायक उपकरण सहित) (2.8 अरब अमेरिकी डॉलर), और लोहा और इस्पात उत्पाद (2.7 अरब अमेरिकी डॉलर) शामिल थे।

आयात में कच्चा तेल (4.5 अरब अमेरिकी डॉलर), पेट्रोलियम उत्पाद (3.6 अरब डॉलर), कोयला, कोक (3.4 अरब डॉलर), तराशे व पॉलिश्ड हीरे (2.6 अरब डॉलर), विद्युत मशीनरी (1.4 अरब अमेरिकी डॉलर), विमान, अंतरिक्ष यान और पुर्जे (1.3 अरब अमेरिकी डॉलर) और सोना (1.3 अरब अमेरिकी डॉलर) शामिल थे। अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत से अमेरिका को सेवाओं का आयात 40.6 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें कंप्यूटर/सूचना सेवाओं का आयात 16.7 अरब अमेरिकी डॉलर और व्यवसाय प्रबंधन/परामर्श सेवाओं का आयात 7.5 अरब अमेरिकी डॉलर था।

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