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India US Trade Deal: Opposition enraged over trade deal with America, cornered the government on these issues!
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India US Trade Deal: अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर भड़का विपक्ष, सरकार को इन बातों पर घेरा!
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Wed, 04 Feb 2026 06:45 AM IST
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AAP सांसद संजय सिंह ने कहा, "यह ट्रेड डील भारत के हितों के खिलाफ है। इन्होंने कहा कि भारत में आने वाले अमेरिकी सामानों पर कोई कर नहीं लगेगा और दूसरी ओर भारत से अमेरिका जो सामान जाएगा, उस पर अमेरिका 18% टैक्स लेगा। यह कौनसी अच्छी डील है? अमेरिका कह रहा है कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा.अगर हम रूस से तेल खरीदना बंद कर देंगे तो हमें करीब 70 से 80 हजार करोड़ रुपए का सालाना नुकसान होगा.यह ट्रेड डील भारत के हितों के खिलाफ है
शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कहा, "डोनाल्ड ट्रंप कृतज्ञ होंगे क्योंकि इस डील से अमेरिका को फायदा होगा. MSMEs लगातार पिटे हुए हैं। वे उम्मीद कर रहे थे कि ट्रेड डील बराबर होगी.सच्चाई है कि आज पीयूष गोयल के पास भी जवाब नहीं है.यह डील नहीं हुई है बल्कि अमेरिका से एक फरमान आया है
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और केंद्र सरकार पर देश के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह व्यापार समझौता पूरी तरह से पारदर्शी नहीं है और इसके प्रावधानों को लेकर न तो संसद में व्यापक चर्चा कराई गई और न ही विपक्ष को विश्वास में लिया गया।
कांग्रेस के अनुसार, सरकार अमेरिका के दबाव में आकर ऐसी शर्तें स्वीकार कर रही है, जो भारतीय किसानों, छोटे उद्योगों और घरेलू व्यापार के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। पार्टी ने आशंका जताई कि इस डील के जरिए अमेरिकी कृषि उत्पाद, डेयरी और औद्योगिक सामान भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर प्रवेश करेंगे, जिससे स्थानीय उत्पादकों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस नेताओं ने विशेष रूप से कृषि और डेयरी सेक्टर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत के करोड़ों किसानों और दुग्ध उत्पादकों की आजीविका पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
उनका आरोप है कि सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बात तो करती है, लेकिन व्यवहार में विदेशी कंपनियों के लिए बाजार खोलने की नीति अपना रही है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि ट्रेड डील के नाम पर भारत की रणनीतिक और आर्थिक स्वायत्तता को कमजोर किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्ते महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी भी समझौते में भारत के दीर्घकालिक हित सर्वोपरि होने चाहिए। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि ट्रेड डील से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और संसद में इस पर विस्तृत बहस कराई जाए, ताकि देश को पता चले कि सरकार किन शर्तों पर सहमत हो रही है।
विपक्ष का यह भी आरोप है कि सरकार बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है, जबकि छोटे और मझोले उद्योगों की अनदेखी हो रही है। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि यह डील मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ती है तो वह देशव्यापी आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेगी।
पार्टी नेताओं ने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश को व्यापारिक समझौतों में बेहद सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि एक बार किए गए समझौते का असर वर्षों तक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस का रुख बेहद आक्रामक नजर आ रहा है और उसने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए जवाबदेही तय करने की मांग तेज कर दी है।
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