Army: तकनीक के साथ सेना बढ़ाएगी डाटा क्षमता, दुश्मनों की हर चाल होगी नाकाम; नए साल में बदल जाएगी काम की शैली
भारतीय सेना 2026-27 को नेटवर्किंग और डाटा सेंट्रिसिटी वर्ष के रूप में मनाएगी। नई तकनीक, एआई और रीयल-टाइम नेटवर्क से कमांडरों को साफ तस्वीर मिलेगी।
विस्तार
भविष्य के युद्ध के लिए खुद को तैयार करने में जुटी सेना ने साल 2026 और 2027 को नेटवर्किंग और डाटा सेंट्रिसिटी वर्ष के तौर पर मनाने का फैसला किया है। सैन्य सूत्रों ने बताया कि सेना का यह कदम काम करने की शैली में एक बड़ा बदलाव है।
साल 2024 और 2025 नई तकनीकें अपनाने वाले वर्ष के रूप में मनाए गए। इस दौरान अत्याधुनिक उपकरण व तकनीकें तेजी से सैनिकों तक पहुंचीं। अब इस साल फोकस इन सभी तकनीकों और प्रणालियों को आपस में जोड़ने पर होगा। इस मुहिम का लक्ष्य ड्रोन, सैटेलाइट, शूटर (टैंक, मिसाइल आदि) और निर्णय लेने वालों यानी कमांडरों को एक सुरक्षित रीयल टाइम नेटवर्क से जोड़ना है। साथ ही विशाल डाटा सेट का विश्लेषण कर दुश्मन की चालों का पूर्वानुमान लगाने की क्षमता विकसित की जाएगी।
कमांडरों को मिलेगी साफ तस्वीर : आधुनिक युद्ध में लड़ाई सीमा के अलावा सूचना, डाटा और सोच के स्तर पर होती है। ऐसे में वही सेना आगे रहती है, जिसके पास सही समय पर सही जानकारी हो ताकि तेजी से फैसले लिए जा सकें। इसलिए सेना पहले ही देशभर में डिजिटल नेटवर्क, डाटा सेंटर और कई सॉफ्टवेयर सिस्टम खड़े कर चुकी है। आने वाले दो वर्षों में इन सभी प्रणालियों को आपस में जोड़ा जाएगा, ताकि अलग-अलग जगह से आने वाली जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सके। इससे कमांडरों को हालात की साफ तस्वीर मिलेगी, जिससे फैसले तेज व सटीक हो सकेंगे। इसमें एआई और ऑटोमेशन की मदद ली जाएगी। इस पहल का मकसद नौसेना और वायुसेना के साथ बेहतर तालमेल बनाना भी है। सेना के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि जब सभी सेनाएं एक ही नेटवर्क और जानकारी पर काम करेंगी, तो संयुक्त अभियानों की क्षमता और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।
चीफ डाटा अधिकारी की होगी नियुक्ति
इस बदलाव की नींव तीन मुख्य बातों पर टिकी है- डाटा, नेटवर्क और लोग। डाटा को अब एक रणनीतिक संसाधन के रूप में देखा जाएगा। इसके लिए साफ नियम बनाए जाएंगे कि कौन सा डाटा कहां से आएगा, कौन उसका इस्तेमाल करेगा और कैसे सुरक्षित रखा जाएगा। सेना में एक चीफ डाटा अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। अलग-अलग इकाइयों में भी डाटा अधिकारी होंगे। नेटवर्क सेना की डिजिटल रीढ़ होंगे। संचार व्यवस्था को और सुरक्षित, मजबूत और साइबर हमलों से बचाने योग्य बनाया जाएगा। चुनौतीपूर्ण हालात में संचार बनाए रखने के कदम उठाए जाएंगे।
ऑपरेशन सिंदूर : आतंक पर प्रहार, संप्रभुता से समझौता न करने का संदेश
नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सैन्य इतिहास का ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ करार दिया है। मंत्रालय ने कहा कि इस ऑपरेशन ने न केवल पाकिस्तान के आतंकी बुनियादी ढांचे को ध्वस्त किया, बल्कि वैश्विक स्तर पर संदेश भी दिया कि भारत अपनी संप्रभुता के साथ समझौता नहीं करेगा। 7 मई 2025 की सुबह शुरू हुआ यह ऑपरेशन पहलगाम में हुए उस कायराना आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। एजेंसी भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाक के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए, जिसमें 100 आतंकी मारे गए। इस दौरान थल, नभ और जल सेना के बीच बेमिसाल तालमेल दिखा। भारतीय वायुसेना ने जहां आसमान से दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद किया, वहीं नौसेना ने अरब सागर में अपनी मजबूत उपस्थिति से पाकिस्तान की घेराबंदी कर दी।
2025 में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन घुसपैठ की 791 घटनाएं, 237 ड्रोन गिराए गए : रक्षा मंत्रालय
रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को साल के अंत में जारी समीक्षा रिपोर्ट में बताया कि 2025 के दौरान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन घुसपैठ की कुल 791 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 782 घटनाएं पंजाब और राजस्थान सीमा पर, जबकि 9 घटनाएं जम्मू-कश्मीर में हुईं। भारतीय सुरक्षा बलों ने पश्चिमी मोर्चे पर जैमर्स और स्पूफर्स का प्रभावी उपयोग कर इस खतरे का डटकर मुकाबला किया। सशस्त्र बलों ने इस साल कुल 237 ड्रोनों को मार गिराने में सफलता हासिल की। मंत्रालय के अनुसार, इनमें से 5 ड्रोन युद्ध सामग्री (हथियारों) के साथ, 72 नशीले पदार्थों के साथ और 161 बिना किसी पेलोड के थे। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना के निरंतर प्रयासों के चलते जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
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