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Indian Railways: अब दिल्ली से हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की तैयारी, इस रूट पर जल्द शुरू हो सकता है ट्रायल
Tue, 28 Jul 2026 04:19 PM IST
Pavan
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Tue, 28 Jul 2026 04:19 PM IST
सार
दिल्ली रेल मंडल देश के सबसे व्यस्त रेल सेक्शनों में शामिल है। ऐसे में लगातार चार से पांच दिन तक ट्रायल के लिए अलग ट्रैक और पर्याप्त समय उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रायल के लिए जरूरी परिचालन व्यवस्था और मंजूरियों पर काम चल रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : संवाद
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विस्तार
दिल्ली और हरियाणा के रेल यात्रियों को जल्द नई तकनीक वाली ट्रेन की सौगात मिल सकती है। भारतीय रेलवे दिल्ली सोनीपत रेलखंड पर हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल की तैयारी में जुटा है। शुरुआती परीक्षण सब्जी मंडी स्टेशन से सोनीपत के बीच किया जाएगा। अगर ट्रायल सफल रहता है, तो इस रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन का नियमित संचालन शुरू करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया तेज की जाएगी। रेलवे का मानना है कि इससे आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल रेल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
ट्रायल के लिए फिलहाल उसी ट्रेन रैक का इस्तेमाल किया जाएगा, जो अभी जींद और सोनीपत के बीच संचालित होता है। रेलवे के मुताबिक, एक बार हाइड्रोजन फ्यूल भरने के बाद यह ट्रेन चार फेरे पूरे करने में सक्षम होगी। यदि परीक्षण सफल रहता है तो जींद-नई दिल्ली और नई दिल्ली-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की योजना आगे बढ़ाई जाएगी। इससे यात्रियों को आधुनिक, कम प्रदूषण वाली और पर्यावरण के अनुकूल रेल सेवा मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली सोनीपत रेलखंड पर प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। परीक्षण से पहले ट्रेन में यात्रियों को नहीं बैठाया जाएगा। उनकी जगह रेत की बोरियां रखी जाएंगी। इन बोरियों का कुल वजन करीब 2,600 यात्रियों के बराबर होगा। रेलवे इस तरीके से यह जांच करेगा कि पूरी क्षमता के बराबर भार होने पर ट्रेन का प्रदर्शन कैसा रहता है। ट्रायल के दौरान ट्रेन की रफ्तार, ब्रेकिंग, संतुलन और अन्य तकनीकी पहलुओं का भी परीक्षण किया जाएगा।
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ट्रायल के लिए तैयार की गई हाइड्रोजन ट्रेन में कुल 10 डिब्बे हैं। जिनमें आठ यात्री कोच शामिल हैं। परीक्षण के दौरान हर कोच में उतनी रेत की बोरियां रखी जाएंगी, जितना वजन उस कोच में बैठने और खड़े होने वाले यात्रियों का होता है। रेलवे का उद्देश्य यह परखना है कि पूरी क्षमता के बराबर भार होने पर ट्रेन का प्रदर्शन कैसा रहता है। इस परीक्षण से ट्रेन की क्षमता, स्थिरता और तकनीकी प्रदर्शन का सटीक आकलन किया जा सकेगा।
कब तक शुरू होगी दिल्ली में हाइड्रोजन ट्रेन
रेलवे सूत्रों का कहना है, दिल्ली और सोनीपत के बीच हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल शुरू होने में अभी कुछ समय लग सकता है। इसकी वजह तकनीकी नहीं, बल्कि रेलवे की परिचालन व्यवस्था है। जिस हाइड्रोजन ट्रेन से परीक्षण होना है, वह फिलहाल जींद सोनीपत रूट पर नियमित सेवा में चल रही है। ऐसे में उसे कुछ दिनों के लिए उस रूट से हटाकर ट्रायल में लगाना आसान नहीं है।
दिल्ली रेल मंडल देश के सबसे व्यस्त रेल सेक्शनों में शामिल है। ऐसे में लगातार चार से पांच दिन तक ट्रायल के लिए अलग ट्रैक और पर्याप्त समय उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रायल के लिए जरूरी परिचालन व्यवस्था और मंजूरियों पर काम चल रहा है। जैसे ही सभी तैयारियां पूरी होंगी,दिल्ली सोनीपत रेलखंड पर हाइड्रोजन ट्रेन का परीक्षण शुरू कर दिया जाएगा। इसके सफल रहने पर इस रूट पर नियमित हाइड्रोजन ट्रेन सेवा शुरू करने की दिशा में आगे कदम बढ़ाए जाएंगे।
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ट्रायल के लिए फिलहाल उसी ट्रेन रैक का इस्तेमाल किया जाएगा, जो अभी जींद और सोनीपत के बीच संचालित होता है। रेलवे के मुताबिक, एक बार हाइड्रोजन फ्यूल भरने के बाद यह ट्रेन चार फेरे पूरे करने में सक्षम होगी। यदि परीक्षण सफल रहता है तो जींद-नई दिल्ली और नई दिल्ली-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की योजना आगे बढ़ाई जाएगी। इससे यात्रियों को आधुनिक, कम प्रदूषण वाली और पर्यावरण के अनुकूल रेल सेवा मिलने की उम्मीद है।
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दिल्ली सोनीपत रेलखंड पर प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। परीक्षण से पहले ट्रेन में यात्रियों को नहीं बैठाया जाएगा। उनकी जगह रेत की बोरियां रखी जाएंगी। इन बोरियों का कुल वजन करीब 2,600 यात्रियों के बराबर होगा। रेलवे इस तरीके से यह जांच करेगा कि पूरी क्षमता के बराबर भार होने पर ट्रेन का प्रदर्शन कैसा रहता है। ट्रायल के दौरान ट्रेन की रफ्तार, ब्रेकिंग, संतुलन और अन्य तकनीकी पहलुओं का भी परीक्षण किया जाएगा।
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ट्रायल के लिए तैयार की गई हाइड्रोजन ट्रेन में कुल 10 डिब्बे हैं। जिनमें आठ यात्री कोच शामिल हैं। परीक्षण के दौरान हर कोच में उतनी रेत की बोरियां रखी जाएंगी, जितना वजन उस कोच में बैठने और खड़े होने वाले यात्रियों का होता है। रेलवे का उद्देश्य यह परखना है कि पूरी क्षमता के बराबर भार होने पर ट्रेन का प्रदर्शन कैसा रहता है। इस परीक्षण से ट्रेन की क्षमता, स्थिरता और तकनीकी प्रदर्शन का सटीक आकलन किया जा सकेगा।
कब तक शुरू होगी दिल्ली में हाइड्रोजन ट्रेन
रेलवे सूत्रों का कहना है, दिल्ली और सोनीपत के बीच हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल शुरू होने में अभी कुछ समय लग सकता है। इसकी वजह तकनीकी नहीं, बल्कि रेलवे की परिचालन व्यवस्था है। जिस हाइड्रोजन ट्रेन से परीक्षण होना है, वह फिलहाल जींद सोनीपत रूट पर नियमित सेवा में चल रही है। ऐसे में उसे कुछ दिनों के लिए उस रूट से हटाकर ट्रायल में लगाना आसान नहीं है।
दिल्ली रेल मंडल देश के सबसे व्यस्त रेल सेक्शनों में शामिल है। ऐसे में लगातार चार से पांच दिन तक ट्रायल के लिए अलग ट्रैक और पर्याप्त समय उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रायल के लिए जरूरी परिचालन व्यवस्था और मंजूरियों पर काम चल रहा है। जैसे ही सभी तैयारियां पूरी होंगी,दिल्ली सोनीपत रेलखंड पर हाइड्रोजन ट्रेन का परीक्षण शुरू कर दिया जाएगा। इसके सफल रहने पर इस रूट पर नियमित हाइड्रोजन ट्रेन सेवा शुरू करने की दिशा में आगे कदम बढ़ाए जाएंगे।