'महिलाओं में दम, हम नहीं हैं किसी से कम': अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अनोखा संदेश
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर द्रौपदी मुर्मू ने महिलाओं की उपलब्धियों और शक्ति की सराहना की। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन और उद्यमिता के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के जरिए आत्मनिर्भर बनकर विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर द्रौपदी मुर्मू ने महिलाओं की उपलब्धियों और शक्ति की सराहना की। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन और उद्यमिता के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के जरिए आत्मनिर्भर बनकर विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं।
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिलाओं की शक्ति, उपलब्धियों और योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाएं किसी से कम नहीं हैं और अगर उन्हें सही अवसर और समर्थन मिले तो वे हर क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं। रविवार को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सिर्फ महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान करने का दिन नहीं है, बल्कि यह उनके सशक्तिकरण के लिए देश की प्रतिबद्धता को दोहराने का भी अवसर है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज महिलाएं शिक्षा, प्रशासन, न्यायपालिका, सशस्त्र बल, चिकित्सा, विज्ञान, तकनीक, कला, खेल और उद्यमिता जैसे कई क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूहों के जरिए गांवों की महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और गांव के विकास में नेतृत्व भी कर रही हैं।
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'महिलाओं में दम, हम किसी से नहीं हैं कम'
मुर्मू ने आगे कहा कि महिलाओं में दम है, हम किसी से कम नहीं। हम में भी शक्ति है।” उनका कहना था कि अगर महिलाओं को अवसर और सहयोग मिले तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि हालांकि महिलाओं ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन समाज में समान भागीदारी सुनिश्चित करने के रास्ते में अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। इन चुनौतियों को सिर्फ कानून के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता, बल्कि समाज की सोच में बदलाव लाना भी जरूरी है।
उन्होंने माता-पिता से अपील की कि घर में बेटियों और बेटों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव न करें। साथ ही उन्होंने कहा कि सास को अपनी बेटी और बहू के बीच भी फर्क नहीं करना चाहिए और बहू को भी बेटी की तरह सम्मान मिलना चाहिए। उनके अनुसार असली समानता तब शुरू होती है जब हर महिला को बेटी के रूप में सम्मान दिया जाए।
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मुर्मू ने शक्ति वॉक’ कार्यक्रम की भी सराहना की
राष्ट्रपति मुर्मु ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आयोजित ‘शक्ति वॉक’ कार्यक्रम की भी सराहना की। इस कार्यक्रम का आयोजन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने किया था, जिसमें प्रतिभागियों ने इंडिया गेट से विजय चौक तक पैदल मार्च किया। उन्होंने देशभर से आई महिलाओं के समर्पण और उत्साह की भी प्रशंसा की। राष्ट्रपति ने संविधान निर्माता बीआर आंबेडकर के प्रसिद्ध कथन को याद करते हुए कहा कि किसी समाज की प्रगति का सही मापदंड यह है कि वहां की महिलाओं ने कितनी प्रगति की है।
महिलाओं के लिए चल रहीं कई योजना- मुर्मू
उन्होंने बताया कि भारत सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है। इनमें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और मिशन शक्ति जैसी योजनाएं शामिल हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि आज महिलाएं सिर्फ नौकरी करने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली भी बन रही हैं। स्टार्टअप इंडिया के तहत समर्थित कई स्टार्ट-अप में महिला निदेशक हैं और सरकारी ई-मार्केटप्लेस पर दो लाख से ज्यादा महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई सक्रिय हैं।
ग्रामीणों महिलाओं के लिए योजना का किया जिक्र
राष्ट्रपति ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को बेहतर बाजार देने के लिए बजट 2026-27 में शी-मार्ट पहल शुरू की गई है, जिसके तहत हर जिले में समुदाय द्वारा संचालित रिटेल आउटलेट बनाए जाएंगे। अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति मुर्मु ने लोगों से अपील की कि वे हर बेटी को शिक्षा, सम्मान और अवसर देने का संकल्प लें, महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता दें और समाज से हर तरह के भेदभाव को खत्म करने के लिए मिलकर काम करें। उन्होंने कहा कि ऐसा करके भारत दुनिया के सामने महिला सशक्तिकरण का आदर्श उदाहरण पेश कर सकता है।
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