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Iran: 'युद्ध हम पर थोपा गया, ये हमारे अस्तित्व की लड़ाई', पश्चिम एशिया संकट पर ईरान के महावाणिज्य दूत का बयान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Nitin Gautam
Updated Tue, 24 Mar 2026 08:06 AM IST
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सार
भारत में ईरान के महावाणिज्य दूत सईद रजा मोसायेब मोतलाघ का कहना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा संकट के लिए ईरान जिम्मेदार नहीं हैं बल्कि वे देश जिम्मेदार हैं, जिन्होंने चेतावनियों के बावजूद ईरान पर हमला किया। उन्होंने कहा कि ये लड़ाई हमारे अस्तित्व की लड़ाई है।
ईरान के भारत में महावाणिज्य दूत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूत, सईद रजा मोसायेब मोतलाघ का कहना है कि ईरान पर युद्ध थोपा गया है और अब यह लड़ाई उनके देश के लिए अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने युद्ध के लिए पूरी तरह से अमेरिका और इस्राइल को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दुनिया को दिए संदेश में कहा, 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उस पक्ष के साथ बातचीत करके सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए जिसने युद्ध शुरू किया है, और उन्हें आगे ऐसे कदम उठाने से रोकने के लिए मजबूर करना चाहिए। यह मुद्दा सिर्फ ईरान तक ही सीमित नहीं है।'
'हम पर हमला करने वाले देशों को जवाबदेह ठहराने की जरूरत'
ईरानी राजनयिक ने कहा, 'अतीत में बार-बार देखा गया है कि उन्होंने जिस भी देश को चाहा, उसे तबाह कर दिया, लेकिन आज, उनका सामना एक ऐसे राष्ट्र से है जो पूरी दृढ़ता के साथ उनके विरोध में खड़ा है। इसलिए हम संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, सभी देशों से यह अपील करते हैं कि वे उन्हें जवाबदेह ठहराएं, उन्हें जवाब देने के लिए मजबूर करें, और यह सुनिश्चित करें कि वे भविष्य में किसी भी देश के खिलाफ ऐसे एकतरफा कदम दोबारा न उठाएं।'
'वैश्विक ऊर्जा संकट के लिए हम पर हमला करने वाले देश जिम्मेदार'
जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण पैदा होने वाले वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा संकट को रोकने के प्रति अपनी कोई जिम्मेदारी मानता है, तो ईरान के महावाणिज्य दूत सईद रजा मोसायेब मोतलाघ ने कहा, 'किसी भी हाल में नहीं। जिन लोगों ने हम पर हमला किया, वे ही इसके लिए जिम्मेदार हैं, और हमने जो भी किया, वह पूरी तरह से अपनी आत्मरक्षा में किया। हमारी चेतावनियों और युद्ध जैसे हालात की पूरी जानकारी होने के बावजूद, उन्होंने फिर भी हम पर हमला करने का ही फैसला किया। उन्हें युद्ध के परिणामों के बारे में सोचना चाहिए था।'
'ये हमारे अस्तित्व की लड़ाई है'
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की ईरान की धमकी के बारे में, मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूत, सईद रजा मोसायेब मोतलाघ ने कहा, 'जो युद्ध उन्होंने हम पर थोपा है, उसने हमारे अस्तित्व को प्रभावित किया है। यह हमारे लिए अस्तित्व की लड़ाई है, जिसके जवाब में हमें अपनी पूरी क्षमताओं से जवाब देने की जरूरत है। हालांकि, दुनिया भर के लोगों उदाहरण के लिए, भारत के लोगों के लिए, हमने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया है। इसे केवल शत्रु देशों और उनके हितों के लिए प्रतिबंधित किया गया है, जिसमें उनसे जुड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। युद्ध जैसी स्थिति के कारण, यह एक अत्यंत खतरनाक रूट है।'
ये भी पढ़ें- West Asia Tension: 'रूस दे रहा है ईरान को खुफिया मदद, हमारे पास इस बात के सबूत'; जेलेंस्की ने किया बड़ा दावा
'बातचीत के लिए तैयार, लेकिन शर्तें पूरी होनी चाहिए'
संघर्ष के बीच तेल की कीमतों में वैश्विक उछाल को लेकर उन्होंने कहा, 'हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन जरूरी शर्तें पूरी होनी चाहिए। वरना, कुछ ही महीनों में, वे हम पर फिर से हमला करेंगे और हमें उन्हीं चुनौतियों का सामना करने पर मजबूर करेंगे।' ईरान पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों के असर के बारे में, ईरान के महावाणिज्य दूत ने कहा, 'ईरान दुनिया के तेल उत्पादक देशों में से एक है, और उस पर प्रतिबंध लगाने का असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है। साथ ही ये प्रतिबंध ईरान के प्रति लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी के एक पैटर्न को दिखाते हैं, जो कई साल पुराना है। आज, यह दुश्मनी इतनी बढ़ गई है कि यह सशस्त्र टकराव और ईरान पर सीधे हमलों तक पहुंच गई है। जाहिर है, इन बुनियादी कारणों का मौजूदा संघर्ष के शुरू होने और आज दुनिया जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उन पर काफी असर पड़ा है।'
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'हम पर हमला करने वाले देशों को जवाबदेह ठहराने की जरूरत'
ईरानी राजनयिक ने कहा, 'अतीत में बार-बार देखा गया है कि उन्होंने जिस भी देश को चाहा, उसे तबाह कर दिया, लेकिन आज, उनका सामना एक ऐसे राष्ट्र से है जो पूरी दृढ़ता के साथ उनके विरोध में खड़ा है। इसलिए हम संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, सभी देशों से यह अपील करते हैं कि वे उन्हें जवाबदेह ठहराएं, उन्हें जवाब देने के लिए मजबूर करें, और यह सुनिश्चित करें कि वे भविष्य में किसी भी देश के खिलाफ ऐसे एकतरफा कदम दोबारा न उठाएं।'
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'वैश्विक ऊर्जा संकट के लिए हम पर हमला करने वाले देश जिम्मेदार'
जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण पैदा होने वाले वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा संकट को रोकने के प्रति अपनी कोई जिम्मेदारी मानता है, तो ईरान के महावाणिज्य दूत सईद रजा मोसायेब मोतलाघ ने कहा, 'किसी भी हाल में नहीं। जिन लोगों ने हम पर हमला किया, वे ही इसके लिए जिम्मेदार हैं, और हमने जो भी किया, वह पूरी तरह से अपनी आत्मरक्षा में किया। हमारी चेतावनियों और युद्ध जैसे हालात की पूरी जानकारी होने के बावजूद, उन्होंने फिर भी हम पर हमला करने का ही फैसला किया। उन्हें युद्ध के परिणामों के बारे में सोचना चाहिए था।'
'ये हमारे अस्तित्व की लड़ाई है'
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की ईरान की धमकी के बारे में, मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूत, सईद रजा मोसायेब मोतलाघ ने कहा, 'जो युद्ध उन्होंने हम पर थोपा है, उसने हमारे अस्तित्व को प्रभावित किया है। यह हमारे लिए अस्तित्व की लड़ाई है, जिसके जवाब में हमें अपनी पूरी क्षमताओं से जवाब देने की जरूरत है। हालांकि, दुनिया भर के लोगों उदाहरण के लिए, भारत के लोगों के लिए, हमने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया है। इसे केवल शत्रु देशों और उनके हितों के लिए प्रतिबंधित किया गया है, जिसमें उनसे जुड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। युद्ध जैसी स्थिति के कारण, यह एक अत्यंत खतरनाक रूट है।'
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'बातचीत के लिए तैयार, लेकिन शर्तें पूरी होनी चाहिए'
संघर्ष के बीच तेल की कीमतों में वैश्विक उछाल को लेकर उन्होंने कहा, 'हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन जरूरी शर्तें पूरी होनी चाहिए। वरना, कुछ ही महीनों में, वे हम पर फिर से हमला करेंगे और हमें उन्हीं चुनौतियों का सामना करने पर मजबूर करेंगे।' ईरान पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों के असर के बारे में, ईरान के महावाणिज्य दूत ने कहा, 'ईरान दुनिया के तेल उत्पादक देशों में से एक है, और उस पर प्रतिबंध लगाने का असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है। साथ ही ये प्रतिबंध ईरान के प्रति लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी के एक पैटर्न को दिखाते हैं, जो कई साल पुराना है। आज, यह दुश्मनी इतनी बढ़ गई है कि यह सशस्त्र टकराव और ईरान पर सीधे हमलों तक पहुंच गई है। जाहिर है, इन बुनियादी कारणों का मौजूदा संघर्ष के शुरू होने और आज दुनिया जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उन पर काफी असर पड़ा है।'
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