सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   iran-invites-pm-modi-khamenei-funeral-india-balances-iran-us-israel-relations

Iran: PM मोदी को आमंत्रित कर ईरान ने भारत को उलझन में डाला, खामनेई के अंतिम संस्कार को लेकर कैसे सधेगा संतुलन?

Himanshu Mishr हिमांशु मिश्र
Updated Fri, 26 Jun 2026 06:28 AM IST
सार

ईरान द्वारा अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किए जाने से भारत के सामने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संतुलन का प्रश्न खड़ा हो गया है। भारत को एक ओर ईरान के साथ ऊर्जा, चाबहार बंदरगाह और क्षेत्रीय हितों को ध्यान में रखना है। वहीं, दूसरी ओर अमेरिका, इस्राइल और खाड़ी देशों के साथ रणनीतिक संबंध भी बनाए रखने हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के बजाय किसी वरिष्ठ प्रतिनिधि को भेजने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

विज्ञापन
iran-invites-pm-modi-khamenei-funeral-india-balances-iran-us-israel-relations
पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

ईरान ने अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करके भारत को कूटनीतिक उलझन में डाल दिया है।
विज्ञापन


ऐसे में ईरान और इस्त्राइल-अमेरिका के बीच कूटनीतिक संतुलन साधने के लिए माथापच्ची की जा रही है। हालांकि, प्रधानमंत्री के खामनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने की संभावना नहीं के बराबर है, मगर ईरान को संदेश देने के लिए भारत उच्चस्तरीय प्रतिनिधि भेजने की योजना बना रहा है। 
विज्ञापन


भारत के फैसले पर क्यों टिकी सबकी निगाहें?
दरअसल, खामनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम पर दुनियाभर की निगाहें टिकी है। भारत के लिए एक तरफ अमेरिका-इस्त्राइल हैं तो दूसरी ओर ईरान। ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक व्यापारिक दृष्टि से अहम चाबहार परियोजना के लिए भारत को ईरान की जरूरत है। जबकि नए वैश्विक समीकरण में भारत इस्राइल के साथ लगातार सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। फिर इस कार्यक्रम में उन अरब देशों खासकर ईरान विरोधी संयुक्त अरब अमीरात की भी निगाहें जमी हैं जिनके साथ भारत के बेहतर द्विपक्षीय रिश्ते हैं। सरकारी सूत्र ने इस संदर्भ में ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के अंतिम संस्कार की याद दिलाई। उस समय जब अमेरिका और ईरान के संबंध बेपटरी हो गए थे, तब भारत ने रईसी के अंतिम संस्कार में तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को भेजा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


ईरान से किनारा नहीं करना चाहता भारत
ईरान पर अमेरिका-इस्त्राइल के संयुक्त हमले की भारत ने सीधे तौर पर निंदा नहीं की थी। हमले में खामनेई के मारे जाने पर की भी भारत ने पहले निंदा नहीं की। हालांकि, बाद में ईरानी दूतावास पहुंचकर विदेश सचिव ने शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर जरूर किए थे। भारत कई रणनीतिक और कूटनीतिक कारणों से ईरान से किनारा नहीं करना चाहता। चाबहार परियोजना से भारत के तमाम हित जुड़े हैं, फिर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिया आबादी भी भारत में ही रहती है।


संतुलन की अग्नि परीक्षा
कूटनीतिक विशेषत्र ब्रह्म चेलानी ने कहा कि यह भारत के कूटनीतिक संतुलन की अग्नि परीक्षा है। भारत उच्च स्तरीय प्रतिनिधि भेजकर स्वतंत्र विदेश नीति का ठोस संदेश दे सकता है। हालांकि उसे यह भी देखना होगा कि उसके इस कदम को अमेरिका और इस्राइल किस तरह देखते हैं। भारत को इस राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने या न होने का फैसला बहुत ही सावधानी से लेना चाहिए। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Install AU App

Followed