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NIA: बंगाल-पूर्वोत्तर भारत पर थी इमाम महमूदर काफिला की नापाक नजर, JMB के 11 आतंकियों पर आरोप तय
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 26 Jun 2026 10:36 AM IST
सार
एनआईए ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) से जुड़े 11 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच में आरोप है कि संगठन भारत में कट्टरपंथ फैलाने, युवाओं की भर्ती करने और अपना नेटवर्क मजबूत करने की साजिश रच रहा था।
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एनआईए (प्रतिकात्मत तस्वीर)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन 'जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश' (जेएमबी) की एक शाखा द्वारा रची गई आतंकी साजिश के सिलसिले में 11 आतंकियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। गुवाहाटी (असम) में एनआईए की स्पेशल कोर्ट में दायर चार्जशीट में आरोपियों पर बीएनएस, 2023 और UA(P) एक्ट, 1967 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
एनआईए की जांच से पता चला कि ये सभी आरोपी 'इमाम महमूदर काफिला' (आईएमके) की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे। आईएमके, जेबीएम का ही एक रूप है, जिसका मकसद पश्चिम बंगाल और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (असम और त्रिपुरा सहित) में इस आतंकी संगठन की आतंकवादी विचारधारा को फैलाना था। इस साजिश में आतंकी संगठन के चरमपंथी एजेंडे को बढ़ावा देना, आसानी से प्रभावित होने वाले युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और भारत में संगठन का नेटवर्क बढ़ाना शामिल था। आतंकवाद-विरोधी संगठन की जांच से पता चला कि जेबीएम के सीनियर सदस्य इमाम महमूद हबीबुल्लाह ने भारतीय जमीन पर इस प्रतिबंधित संगठन के खतरनाक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए आईएमके बनाया था।
एनआईए की जांच से यह भी पता चला है कि जिन 11 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, उन्होंने भारत में आईएमके/जेएमबी की मौजूदगी बढ़ाने के लिए साजिश रची थी। इसके लिए उन्होंने गुप्त बैठकें कीं। धार्मिक रूप से प्रेरित करने वाले कार्यक्रम चलाए, चरमपंथी साहित्य का प्रचार-प्रसार किया और भारत-विरोधी प्रोपेगैंडा के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। वे आईएमके/जेएमबी के नेतृत्व के प्रति निष्ठा को बढ़ावा दे रहे थे।चार्जशीट में नामजद मुख्य आरोपियों में से दो की पहचान नसीमउद्दीन और जागीर मिया के तौर पर हुई है।
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ये भी पढ़ें: Iran: PM मोदी को आमंत्रित कर ईरान ने भारत को उलझन में डाला, खामनेई के अंतिम संस्कार को लेकर कैसे सधेगा संतुलन?
नसीमउद्दीन असम में आईएमके की गतिविधियों का नेतृत्व कर रहा था, जबकि जागीर मिया त्रिपुरा में इस संगठन की कमान संभाले हुए था। जांच के दौरान, कई ऐसे दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल रिकॉर्ड मिले थे, जिनसे आरोपियों के खिलाफ मामला मजबूत करने में मदद मिली।
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एनआईए की जांच से पता चला कि ये सभी आरोपी 'इमाम महमूदर काफिला' (आईएमके) की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे। आईएमके, जेबीएम का ही एक रूप है, जिसका मकसद पश्चिम बंगाल और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (असम और त्रिपुरा सहित) में इस आतंकी संगठन की आतंकवादी विचारधारा को फैलाना था। इस साजिश में आतंकी संगठन के चरमपंथी एजेंडे को बढ़ावा देना, आसानी से प्रभावित होने वाले युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और भारत में संगठन का नेटवर्क बढ़ाना शामिल था। आतंकवाद-विरोधी संगठन की जांच से पता चला कि जेबीएम के सीनियर सदस्य इमाम महमूद हबीबुल्लाह ने भारतीय जमीन पर इस प्रतिबंधित संगठन के खतरनाक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए आईएमके बनाया था।
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एनआईए की जांच से यह भी पता चला है कि जिन 11 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, उन्होंने भारत में आईएमके/जेएमबी की मौजूदगी बढ़ाने के लिए साजिश रची थी। इसके लिए उन्होंने गुप्त बैठकें कीं। धार्मिक रूप से प्रेरित करने वाले कार्यक्रम चलाए, चरमपंथी साहित्य का प्रचार-प्रसार किया और भारत-विरोधी प्रोपेगैंडा के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। वे आईएमके/जेएमबी के नेतृत्व के प्रति निष्ठा को बढ़ावा दे रहे थे।चार्जशीट में नामजद मुख्य आरोपियों में से दो की पहचान नसीमउद्दीन और जागीर मिया के तौर पर हुई है।
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नसीमउद्दीन असम में आईएमके की गतिविधियों का नेतृत्व कर रहा था, जबकि जागीर मिया त्रिपुरा में इस संगठन की कमान संभाले हुए था। जांच के दौरान, कई ऐसे दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल रिकॉर्ड मिले थे, जिनसे आरोपियों के खिलाफ मामला मजबूत करने में मदद मिली।