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ISRO: गगनयान मिशन से पहले इसरो को बड़ी कामयाबी, 2.5 किमी ऊंचाई से मुख्य पैराशूट का अहम परीक्षण रहा सफल
Wed, 08 Jul 2026 09:43 PM IST
Pavan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Wed, 08 Jul 2026 09:43 PM IST
सार
गगनयान मिशन की तैयारी में इसरो को बड़ी सफलता मिली है। मध्य प्रदेश में 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से मुख्य पैराशूट का सफल परीक्षण किया गया। परीक्षण के सकारात्मक नतीजे मिले हैं, जिससे मानव मिशन से पहले होने वाले मानव रहित गगनयान अभियान की तैयारियों को महत्वपूर्ण मजबूती मिली है।
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गगनयान मिशन से पहले बड़ी कामयाबी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने गगनयान मिशन के क्रू मॉड्यूल (अंतरिक्ष यात्रियों के कैप्सूल) के मुख्य पैराशूट का एक महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इसरो ने बुधवार को बताया कि यह परीक्षण मंगलवार को मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एडीआरडीई) के ड्रॉप जोन में किया गया। इसरो के अनुसार, इस परीक्षण का उद्देश्य यह जांचना था कि गगनयान के पहले मानव रहित मिशन जी-1 के दौरान अधिकतम भार की स्थिति में मुख्य पैराशूट सुरक्षित और तय मानकों के अनुसार काम करता है या नहीं।
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इस परीक्षण के दौरान मुख्य पैराशूट की एक नमूना व्यवस्था और एक डमी भार को भारतीय वायु सेना के आईएल-76 विमान से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से गिराया गया। सबसे पहले ड्रोग पैराशूट खुला, जिसने नीचे गिर रहे क्रू मॉड्यूल को स्थिर किया और उसकी गति काफी कम कर दी। इसके बाद मुख्य पैराशूट खुला, जिससे डमी भार की रफ्तार और कम हुई और वह सुरक्षित गति से जमीन की ओर उतरा।
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गगनयान के क्रू मॉड्यूल में कुल 10 पैराशूट लगाए गए
इसरो ने बताया कि गगनयान मिशन के लिए मुख्य पैराशूट की विश्वसनीयता जांचने के उद्देश्य से किए जा रहे एकीकृत एयरड्रॉप परीक्षणों की शृंखला में यह पांचवां परीक्षण (आईमैट-05) था। इस परीक्षण की सफलता से पहले मानव रहित गगनयान मिशन जी-1 के लिए मुख्य पैराशूट प्रणाली की क्षमता और विश्वसनीयता पर भरोसा और मजबूत हुआ है। गगनयान के क्रू मॉड्यूल में कुल 10 पैराशूट लगाए गए हैं, जो चार अलग-अलग प्रकार के हैं। इनमें दो एपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट हैं, जो पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश के दौरान पैराशूट वाले हिस्से की सुरक्षा करने वाले कवर को अलग करते हैं। इसके अलावा दो ड्रोग पैराशूट हैं, जो क्रू मॉड्यूल को स्थिर करते हैं और उसकी गति कम करते हैं।
यह भी पढ़ें- Indian Navy: पोरबंदर एयरफील्ड के पास 'दृष्टि-10' UAV क्रैश, ट्रेनिंग के दौरान हादसा; घटना में कोई हताहत नहीं
क्रू मॉड्यूल में तीन पायलट पैराशूट भी
क्रू मॉड्यूल में तीन पायलट पैराशूट भी लगे हैं। इनका काम तीन मुख्य पैराशूटों को बाहर निकालकर खोलना है। इसके बाद तीनों मुख्य पैराशूट पूरी तरह खुलते हैं और क्रू मॉड्यूल की गति को इतना कम कर देते हैं कि वह सुरक्षित तरीके से जमीन या समुद्र में उतर सके। यही प्रणाली भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगी।
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इस परीक्षण के दौरान मुख्य पैराशूट की एक नमूना व्यवस्था और एक डमी भार को भारतीय वायु सेना के आईएल-76 विमान से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से गिराया गया। सबसे पहले ड्रोग पैराशूट खुला, जिसने नीचे गिर रहे क्रू मॉड्यूल को स्थिर किया और उसकी गति काफी कम कर दी। इसके बाद मुख्य पैराशूट खुला, जिससे डमी भार की रफ्तार और कम हुई और वह सुरक्षित गति से जमीन की ओर उतरा।
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गगनयान के क्रू मॉड्यूल में कुल 10 पैराशूट लगाए गए
इसरो ने बताया कि गगनयान मिशन के लिए मुख्य पैराशूट की विश्वसनीयता जांचने के उद्देश्य से किए जा रहे एकीकृत एयरड्रॉप परीक्षणों की शृंखला में यह पांचवां परीक्षण (आईमैट-05) था। इस परीक्षण की सफलता से पहले मानव रहित गगनयान मिशन जी-1 के लिए मुख्य पैराशूट प्रणाली की क्षमता और विश्वसनीयता पर भरोसा और मजबूत हुआ है। गगनयान के क्रू मॉड्यूल में कुल 10 पैराशूट लगाए गए हैं, जो चार अलग-अलग प्रकार के हैं। इनमें दो एपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट हैं, जो पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश के दौरान पैराशूट वाले हिस्से की सुरक्षा करने वाले कवर को अलग करते हैं। इसके अलावा दो ड्रोग पैराशूट हैं, जो क्रू मॉड्यूल को स्थिर करते हैं और उसकी गति कम करते हैं।
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क्रू मॉड्यूल में तीन पायलट पैराशूट भी
क्रू मॉड्यूल में तीन पायलट पैराशूट भी लगे हैं। इनका काम तीन मुख्य पैराशूटों को बाहर निकालकर खोलना है। इसके बाद तीनों मुख्य पैराशूट पूरी तरह खुलते हैं और क्रू मॉड्यूल की गति को इतना कम कर देते हैं कि वह सुरक्षित तरीके से जमीन या समुद्र में उतर सके। यही प्रणाली भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगी।