सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Jairam Ramesh and others condole the demise of renowned environmentalist Madhav Gadgil

Madhav Gadgil: पर्यावरण संरक्षण के मजबूत स्तंभ माधव गाडगिल नहीं रहे, जयराम रमेश ने जताया गहरा शोक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 08 Jan 2026 10:01 AM IST
विज्ञापन
सार

प्रसिद्ध पर्यावरणविद् माधव गाडगिल  के निधन पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि गाडगिल न केवल एक उत्कृष्ट वैज्ञानिक थे, बल्कि ऐसे राष्ट्र निर्माता भी थे जिनका प्रभाव पर्यावरण नीति और जनआंदोलनों पर लंबे समय तक रहा।

Jairam Ramesh and others condole the demise of renowned environmentalist Madhav Gadgil
जयराम रमेश, नेता, कांग्रेस - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद् माधव गाडगिल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने गाडगिल को राष्ट्र निर्माता बताते हुए कहा कि सार्वजनिक नीति पर उनका प्रभाव गहरा और दूरगामी रहा।

Trending Videos


पश्चिमी घाट पर अपने महत्वपूर्ण शोध के लिए पहचाने जाने वाले माधव गाडगिल का बुधवार देर रात पुणे के एक अस्पताल में संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों ने गुरुवार को उनके निधन की पुष्टि की।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Madhav Gadgil: पर्यावरणविद् माधव गाडगिल का 83 वर्ष की उम्र में निधन, आज पुणे में होगा अंतिम संस्कार

पांच दशकों से मित्र और मेंटर की भूमिका निभाते रहे

जयराम रमेश ने कहा कि गाडगिल एक उत्कृष्ट अकादमिक वैज्ञानिक होने के साथ-साथ अथक फील्ड रिसर्चर, अग्रणी संस्थान निर्माता, प्रभावशाली संवादक और जनआंदोलनों में गहरी आस्था रखने वाले विचारक थे। उन्होंने कहा कि पिछले पांच दशकों से गाडगिल अनेक लोगों के लिए मित्र, दार्शनिक, मार्गदर्शक और मेंटर की भूमिका निभाते रहे।


एक्स पर जारी बयान में रमेश ने कहा कि आधुनिक विज्ञान की श्रेष्ठ संस्थाओं में प्रशिक्षित होने के बावजूद गाडगिल पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों विशेषकर जैव विविधता संरक्षण के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने बताया कि 1970-80 के दशक में सेव साइलेंट वैली आंदोलन से लेकर बस्तर के जंगलों की रक्षा में गाडगिल की भूमिका नीति-निर्माण के लिए निर्णायक रही।

गाडगिल ने दी नई दिशा

रमेश ने कहा कि गाडगिल ने बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया और जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को नई दिशा दी। 2009-2011 के दौरान उन्होंने वेस्टर्न घाट्स इकोलॉजी एक्सपर्ट पैनल की अध्यक्षता की और एक संवेदनशील व लोकतांत्रिक दृष्टिकोण के साथ रिपोर्ट तैयार की, जिसकी विषयवस्तु और शैली आज भी मिसाल मानी जाती है।

रमेश ने यह भी याद किया कि गाडगिल ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रसिद्ध जीवविज्ञानी ईओ विल्सन के मार्गदर्शन में अध्ययन किया था, लेकिन विदेश में अवसरों के बावजूद भारत लौटकर देश की शोध क्षमता निर्माण, छात्रों के मार्गदर्शन, स्थानीय समुदायों के साथ काम और नीति-प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया और इन सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता पाई।

पूर्व पर्यावरण मंत्री ने कहा कि गाडगिल का जीवन सच्चे अर्थों में विद्वत्ता को समर्पित था,वे विनम्र, सहज और करुणाशील थे, जिनके पीछे ज्ञान का विशाल भंडार था। 2024 में उन्हें पश्चिमी घाट पर उनके मौलिक कार्य के लिए संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान चैंपियंस ऑफ द अर्थ प्रदान किया गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed