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SC: कार्योत्तर पर्यावरणीय मंजूरी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दायर की याचिका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 23 Jan 2026 03:17 PM IST
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सार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कार्योत्तर पर्यावरणीय मंजूरी को चुनौती दी है। जयराम रमेश का कहना है कि ये मंजूरी शासन का मजाक उड़ाने जैसा है। जानिए याचिका में क्या मुद्दा उठाया गया है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दायर की याचिका
- फोटो : ANI
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विस्तार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कार्योत्तर पर्यावरणीय मंजूरी (एक्स पोस्ट फैक्टो) को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि ये कार्योत्तर पर्यावरण मंजूरी कानून की नजर में गलत हैं और ये शासन का मजाक उड़ाने जैसा है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा, 'अरावली को फिर से परिभाषित करने के पहले के फैसले पर 29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा से उत्साहित होकर, मैंने सुप्रीम कोर्ट में कार्योत्तर पर्यावरण मंजूरी को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की है।'
कांग्रेस नेता ने कार्योत्तर मंजूरी को बताया गलत
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कांग्रेस नेता ने कार्योत्तर मंजूरी को बताया गलत
- पूर्व पर्यावरण मंत्री ने कहा, 'काम होने के बाद दी गई पर्यावरण मंजूरी कानून की नजर में गलत है, सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, और शासन का मजाक उड़ाती है। ये उन लोगों को आसानी से बचने का रास्ता देती हैं जो असल में जानबूझकर पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हैं।' उन्होंने कहा कि कानून का उल्लंघन करने के लिए कानून की जानकारी न होना कोई बहाना नहीं हो सकता।
- पिछले महीने, कांग्रेस महासचिव ने सुप्रीम कोर्ट से तीन जरूरी पर्यावरणीय मामलों पर स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया था। रमेश ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का जिक्र किया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने अरावली को फिर से परिभाषित करने वाले अपने 20 नवंबर के फैसले को वापस ले लिया था और कहा कि यह बहुत जरूरी और स्वागत योग्य था।
- जयराम रमेश ने कहा कि 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने 16 मई के अपने पहले के फैसले की समीक्षा का दरवाजा भी खोल दिया था, जिसमें काम होने के बाद (कार्योत्तर) पर्यावरण मंजूरी पर रोक लगाई गई थी। उन्होंने कहा, 'ऐसी मंजूरियां न्यायशास्त्र की बुनियाद के ही खिलाफ हैं और शासन का मजाक उड़ाती हैं। पिछली तारीख से मंजूरी कभी नहीं दी जानी चाहिए।'
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