सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   India News ›   Justice for Employees After a Long Battle Supreme Court Expresses Displeasure Over UP Gov Lethargy

15 साल बाद कर्मचारी को मिला न्याय: यूपी सरकार की सुस्ती पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी, दिया ये निर्देश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Wed, 22 Apr 2026 07:44 PM IST
विज्ञापन
सार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए एक कर्मचारी को 1 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कर्मचारी को उत्तराखंड में पोस्टिंग देने का निर्देश भी दिया, जो 2011 से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा था।

Justice for Employees After a Long Battle Supreme Court Expresses Displeasure Over UP Gov Lethargy
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक कर्मचारी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि एक कर्मचारी को अपनी पसंद की पोस्टिंग के लिए साल 2011 से दर-दर भटकने के लिए मजबूर किया गया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह उस कर्मचारी को हर्जाने के तौर पर एक लाख रुपये का भुगतान करे।
Trending Videos


सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह कर्मचारी को तुरंत उत्तराखंड राज्य में भेजने की प्रक्रिया पूरी करें। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिसवर सिंह की बेंच ने यह फैसला कर्मचारी की उस अपील पर सुनाया, जिसमें उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट के अप्रैल 2018 के फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। कर्मचारी ने मांग की थी कि उसका कैडर उत्तर प्रदेश से बदलकर उत्तराखंड किया जाए, क्योंकि 1995 की परीक्षा के समय उसने 'पहाड़ी क्षेत्र' का विकल्प चुना था।
विज्ञापन
विज्ञापन


अदालत ने कहा कि यह देखकर बहुत दुख होता है कि एक व्यक्ति 1997 में नियुक्ति के लिए पात्र हो गया था, लेकिन उसे असल में नौकरी 2011 में मिली। आज 2026 में भी वह अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है। बेंच ने नोट किया कि जब 2004 में हाई कोर्ट ने उसकी नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया था, तो उसे तभी नौकरी मिल जानी चाहिए थी। बेंच ने पाया कि सरकार ने अपील की जो 2009 में खारिज हो गई थी, फिर भी उसे नियुक्ति देने में 2011 तक का समय लगा दिया गया।

ये भी पढ़ें:  त्रिशूर पटाखा फैक्ट्री में धमाका: अब तक नौ शव और 32 मानव अंग बरामद, डीएनए टेस्ट से होगी मरने वालों की पहचान

सुप्रीम कोर्ट ने इसे राज्य सरकार की घोर उदासीनता बताया। अदालत ने कहा कि कर्मचारी का बेटा मानसिक रूप से कमजोर है और उसके सुधार की गुंजाइश बहुत कम है। ऐसे समय में परिवार के साथ रहना उसके लिए बड़ा सहारा होता, लेकिन सरकार की बेरुखी की वजह से वह 2011 से अपने परिवार से दूर रहा।

अदालत ने स्पष्ट किया कि 'तबादला' और 'कैडर बदलाव' में अंतर होता है। तबादला प्रशासनिक सुविधा के लिए होता है, जबकि कैडर बदलाव कर्मचारी की सेवा पहचान को बदल देता है। चूंकि कर्मचारी ने राज्यों के बंटवारे से पहले ही पहाड़ी क्षेत्र का विकल्प दिया था, इसलिए उसे उत्तराखंड कैडर मिलना चाहिए था। कोर्ट ने आदेश दिया कि उत्तराखंड भेजने के बाद उसकी सीनियरिटी और सभी लाभ सुरक्षित रखे जाएं। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि वे ऐसे पुराने लंबित मामलों की पहचान करें और उन्हें जल्द निपटाने की कोशिश करें।

अन्य वीडियो-
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed