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Kargil Vijay: बीएसएफ की पांच खुफिया रिपोर्ट; जिससे पता चली पाकिस्तानी सेना की चाल, सबने माना BSF 'G' का लोहा
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सार
बीएसएफ की इंटेलिजेंस इकाई, जिसे 'जी' ब्रांच के नाम से जाना जाता है, उसने पांच ऐसी खुफिया रिपोर्ट दी थी, जिनसे पाकिस्तानी सेना की हर रणनीति मालूम हो गई थी। पाकिस्तान सेना ने कहां पर कब्जे की रणनीति बनाई है, गोला बारूद कहां है, वाहन, हथियार, संचार तकनीक, भूमिगत बंकरों का निर्माण का पता लगाया।
बीएसएफ
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
कारगिल में बीएसएफ ने एक दो नहीं, बल्कि कई खुफिया रिपोर्ट तैयार की थी। बीएसएफ की इंटेलिजेंस इकाई, जिसे 'जी' ब्रांच के नाम से जाना जाता है, उसने पांच ऐसी खुफिया रिपोर्ट दी थी, जिनसे पाकिस्तानी सेना की हर रणनीति मालूम हो गई थी। पाकिस्तान सेना ने कहां पर कब्जे की रणनीति बनाई है, गोला बारूद कहां है, वाहन, हथियार, संचार तकनीक, भूमिगत बंकरों का निर्माण, लगभग पांच सौ आतंकवादियों (सिविल ड्रेस में नॉर्दर्न लाइट इन्फैंट्री के जवान) की आवाजाही और बहुत कुछ ऐसी बातें, जो भारतीय सेना के लिए पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ने में काफी लाभदायक सिद्ध हुई, ये सब बीएसएफ की खुफिया रिपोर्ट में शामिल था।
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कारगिल से सटे नीरू क्षेत्र में तैनात 153 बटालियन बीएसएफ को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। कमांडेंट एसएस तोमर और उनके अधिकारियों की टीम के नेतृत्व में इस यूनिट ने कई सामरिक पहल कीं। दुश्मन की तोपखाने की गोलाबारी के बीच सलिल, झंकार, तायार, नादान, आजाद, गोला, गुजराल और पुराने विश्वास जैसी कई दुर्गम और प्रभावशाली चौकियों पर कब्जा कर लिया। इसका मकसद, उनके क्षेत्र में किसी भी घुसपैठ को रोकना था। कई बीएसएफ कर्मियों को गंभीर चोटें आईं। कई जवानों ने कारगिल एवं उससे बाहर नियंत्रण रेखा व अन्य एफडीएल पर सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।
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कारगिल में तैनात बीएसएफ और सेना की बटालियनों को संयुक्त सहायक निदेशक (जनरल) [जेएडी(जी)] द्वारा खुफिया जानकारी दी गई थी। इन्हें अब श्रीनगर सेक्टर के डिप्टी कमांडेंट (जनरल) [डीसी(जी) के नाम से जाना जाता है। ओम शंकर झा, डिप्टी कमांडेंट [जेएडी(जी)] और उनकी टीम ने इस क्षेत्र में एक उत्कृष्ट खुफिया नेटवर्क स्थापित किया था। घुसपैठ की शुरुआती सूचनाओं के अलावा, उन्होंने 123 सैनिकों की आवाजाही, बंदूकें/हथियार, नई सड़कों और पटरियों का निर्माण, रक्षात्मक स्थितियां, राजनीतिक घटनाक्रम, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के दौरे और मुजाहिदों के जमावड़े आदि जैसी महत्वपूर्ण जानकारी भी प्रदान की थी। एकत्रित की गई खुफिया कारगिल से जुड़ी इस अहम जानकारी से बीएसएफ के उच्च अधिकारियों के साथ-साथ भारतीय सेना के अधिकारियों को भी अवगत कराया गया।
बीएसएफ प्रवक्ता के मुताबिक, बीएसएफ की 'जी' शाखा ने जुलाई 1998 से दिसंबर 1998 तक पांच अलग-अलग खुफिया रिपोर्टें साझा कीं, जिनमें तोपखाने की जगहों का स्थानांतरण, नई तोपों की जगहों का विकास, नियंत्रण रेखा के पास पाक अधिकृत कश्मीर के गांवों को खाली कराना/स्थानांतरित करना, सैन्य कर्मियों की छुट्टियां रोकना और नियंत्रण रेखा के पास कमांडो की तैनाती, प्रमुख इनपुट शामिल किए गए थे। इनके अलावा एफडीएल के पास पटरियों का निर्माण, भारी मात्रा में गोला-बारूद का भंडारण, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का लगातार दौरा, अतिरिक्त वायु रक्षा तोपों की तैनाती, कारगिल सेक्टर के सामने सैकड़ों आतंकवादियों की आवाजाही, नियंत्रण रेखा के पार सैन्य शिविरों में सैकड़ों आतंकवादियों की मौजूदगी, हेलीपैड का निर्माण, नियंत्रण रेखा के पास नए फील्ड इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) कार्यालय का उद्घाटन, भूमिगत बंकरों का निर्माण, लगभग पाँच सौ आतंकवादियों (जाहिर तौर पर सिविल ड्रेस में नॉर्दर्न लाइट इन्फैंट्री के जवान) का स्थानांतरण और उनके नियंत्रण रेखा पार करने की आशंका आदि जैसे विभिन्न पहलुओं को भी खुफिया रिपोर्ट में शामिल किया गया था। इन सूचनाओं में अभूतपूर्व सैन्य निर्माण और संदिग्ध आतंकवादी गतिविधियों के पर्याप्त संकेत थे, जिनके ठोस खुफिया जानकारी के रूप में आगे बढ़ने की जबरदस्त संभावना थी।
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दिसंबर 1998 में, बीएसएफ ने बताया कि लड़ाकू विमान, स्कार्दू में लगातार उतर रहे थे। रात्रिकालीन उड़ान अभ्यास कर रहे थे। इस बारे में सेना और वायु सेना के साथ चर्चा की गई। दोनों ने संकेत दिया कि इस क्षेत्र में ऐसी गतिविधि सामान्य थी। उसी महीने, पिछले महीने की तुलना में सैन्य गतिविधियों में लगभग तीन गुना वृद्धि देखी गई। हालांकि यह दिसंबर 1997 की तुलना में काफी कम थी, इसलिए इसे असाधारण गतिविधि का सूचक नहीं माना गया। यह भी बताया गया कि वाहन और पशु परिवहन गतिविधियाँ नवंबर 1998 की तुलना में दोगुनी और नौ गुना अधिक थीं। 28 कारगिल सेक्टर के सामने वाले क्षेत्र में आतंकवादियों की आवाजाही के बारे में भी कई रिपोर्टें थीं। ये जानकारी मुख्यतः बीएसएफ से आई थी।
अक्टूबर 1998 में, ब्रिगेड इंटेलिजेंस टीम (बीआईटी) ने कारगिल के सामने तालिबान तत्वों की मौजूदगी का संकेत दिया। नवंबर 1998 में, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने रिपोर्ट दी कि आतंकवादियों/तालिबानों को स्कार्दू के पास प्रशिक्षण दिया जा रहा था, जैसा कि बीआईटी ने पहले भी बताया था। वे कारगिल सेक्टर में घुसपैठ की तैयारी में बाल्टी और लद्दाखी भाषा सीख रहे थे। संभवतः अप्रैल 1999 में यह बात बताई गई, जबकि बीएसएफ ने दिसंबर 1998 में रिपोर्ट दी थी कि गुरीकोट में प्रशिक्षित किए जा रहे पाँच सौ तालिबानियों को कश्मीर भेजा गया था। ये सभी रिपोर्टें घुसपैठ का संकेत दे रही थी।