{"_id":"6a854e1ed437e252ab08b38b","slug":"karnataka-b-nagendra-hits-back-on-resignation-demand-dk-shivakumar-defends-in-valmiki-scam-row-2026-08-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"'दलित हूं, इसलिए निशाना बना रहे': इस्तीफे की मांग पर कर्नाटक के मंत्री नागेंद्र का पलटवार; क्या है मामला?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
'दलित हूं, इसलिए निशाना बना रहे': इस्तीफे की मांग पर कर्नाटक के मंत्री नागेंद्र का पलटवार; क्या है मामला?
Wed, 19 Aug 2026 12:03 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, बंगलूरू।
एएनआई, बंगलूरू।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 19 Aug 2026 12:03 PM IST
सार
बी नागेंद्र ने इस्तीफे की मांग को दलित होने और कांग्रेस से जुड़े होने से जोड़ते हुए विपक्ष पर पलटवार किया है। डीके शिवकुमार ने भी उनका बचाव करते हुए कहा कि नागेंद्र की कथित घोटाले में कोई भूमिका नहीं है और 79 करोड़ रुपये बरामद हो चुके हैं। मामला अब विधानसभा में आरोपों, सबूतों और नागेंद्र की मंत्रिमंडल में वापसी को लेकर सियासी टकराव का रूप ले चुका है।
विज्ञापन
बी नागेंद्र, मंत्री, कर्नाटक
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कर्नाटक के मंत्री बी नागेंद्र ने अपने इस्तीफे की मांग पर विपक्ष को जवाब दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कांग्रेस से जुड़े होने और दलित होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। नागेंद्र ने कहा कि जब केंद्र के मंत्रियों और सांसदों पर भी मामले दर्ज हैं, तो सिर्फ उनके इस्तीफे की मांग क्यों की जा रही है? उन्होंने कहा, 'आज आप मुझे इसलिए निशाना बना रहे हैं क्योंकि मैं कांग्रेस पार्टी से हूं और दलित हूं।' नागेंद्र ने दावा किया कि 326 लोगों में से 126 के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले हैं। इनमें अपहरण, दुष्कर्म, हत्या के प्रयास और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराध भी शामिल हैं।
नागेंद्र ने और क्या-क्या कहा?
नागेंद्र ने सत्तारूढ़ दल के नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि पहले उन 126 लोगों के इस्तीफे लिए जाने चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का जिक्र किया और दावा किया कि उनके खिलाफ 29 मामले हैं। इसके अलावा उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के इस्तीफे की भी मांग की। नागेंद्र ने कहा कि वह जमीन से उठकर मेहनत के दम पर आगे बढ़े हैं और उन्हें दलित होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने अपने खिलाफ लगे आरोपों पर कहा कि वह अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं और उन्हें राहत मिल चुकी है। उनके मुताबिक, अदालत ने उन्हें दोषी नहीं माना है। उनके खिलाफ केवल आरोप हैं। नागेंद्र ने कहा कि कोई व्यक्ति खुद न्यायपालिका की भूमिका निभाकर उन्हें आरोपी या दोषी घोषित नहीं कर सकता। उन्होंने संविधान में मिले मौलिक अधिकारों का भी हवाला दिया।
विज्ञापन
अदालत पर पूरा भरोसा: मंत्री नागेंद्र
नागेंद्र ने साफ कहा कि अगर अदालत उन्हें दोषी ठहराती है, तो वह फैसला स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा कि अदालत उन्हें दोषी मानती है और कोई सजा देती है, तो वह न्यायपालिका के सामने सिर झुकाएंगे। इस बीच, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का भी नागेंद्र को समर्थन मिला है। उनके राजनीतिक सचिव एएस पोन्नन्ना ने भाजपा को नागेंद्र के खिलाफ आरोपों के सबूत विधानसभा में रखने की चुनौती दी।
पोन्नन्ना ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय केंद्र और भाजपा का मुखपत्र है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार कर्नाटक पुलिस और अपराध जांच विभाग पर भरोसा करती है। जांच अपराध जांच विभाग को सौंपे जाने के बाद नागेंद्र ने पारदर्शी जांच के लिए तुरंत इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने जांच से खुद को दूर रखा और अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया। पोन्नन्ना ने दावा किया कि 79 करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं। बाकी 4-5 करोड़ रुपये से जुड़े विस्तृत रिकॉर्ड और दस्तावेज भी मौजूद हैं। उनके मुताबिक, निगम का एक भी रुपया नहीं खोया है। अदालत के आदेश के अनुसार बरामद 79 करोड़ रुपये वाल्मीकि निगम को लौटाए जाने हैं और यह रकम खातों में मौजूद है। उन्होंने भाजपा से कहा कि अगर उसके पास कोई सबूत है तो उसे विधानसभा में पेश करे। सदन में इस पर चर्चा हो और सरकार को जवाब देने का मौका दिया जाए।
विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
इससे पहले भाजपा नेताओं ने विधानसभा में काले शॉल पहनकर नागेंद्र को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का विरोध किया था। सप्ताहांत में पार्टी के नेताओं ने बेलगावी में धरना भी दिया और नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की। विधानसभा में लगातार दूसरे दिन विपक्ष ने नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग को लेकर हंगामा किया। नागेंद्र पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में करोड़ों रुपये के कथित गबन से जुड़े आरोप हैं।
डीके शिवकुमार ने विपक्ष की मांग खारिज करते हुए भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) के विरोध को राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को नोटिस देकर सदन में चर्चा करनी चाहिए और सरकार को यह समझाना चाहिए कि नागेंद्र को क्यों हटाया जाना चाहिए। शिवकुमार ने कहा कि नागेंद्र की कथित घोटाले में कोई भूमिका नहीं है। उनके अनुसार करीब 84 करोड़ रुपये की कथित गबन राशि में से 79 करोड़ रुपये बरामद हो चुके हैं। नागेंद्र से कोई रकम बरामद नहीं हुई है।
नागेंद्र ने पहले भी दिया था इस्तीफा
नागेंद्र ने सिद्धारमैया सरकार में मंत्री रहते हुए आरोप लगने के बाद इस्तीफा दिया था। दो साल बाद उन्हें फिर मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। उन्हें 3 अगस्त को डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। वह अब योजना और सांख्यिकी मंत्री हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने जुलाई 2024 में बेल्लारी के विधायक नागेंद्र को वाल्मीकि निगम घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था। बंगलूरू की विशेष अदालत ने अक्टूबर 2024 में उन्हें जमानत दे दी थी। प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की ओर से तैयार आरोपपत्रों में भी उनका नाम है।
सीएम शिवकुमार ने कुमारस्वामी को घेरा
इस बीच, सीएम शिवकुमार ने बंगलूरू दक्षिण जिले के बिदादी के पास ग्रेटर बंगलूरू एकीकृत टाउनशिप परियोजना के लिए किसानों की जमीन के अधिग्रहण के विरोध में जनता दल (सेक्युलर) के प्रदर्शन पर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी को भी घेरा। उन्होंने पूछा कि जब उन्होंने कुमारस्वामी को चर्चा के लिए बुलाया था, तब वह क्यों नहीं आए। शिवकुमार ने कहा कि जनता दल (सेक्युलर) को विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए। कुमारस्वामी के कथित रियल एस्टेट कारोबार वाले आरोप पर शिवकुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत किसने की थी, कुमारस्वामी इसके 'पितामह' हैं। उन्होंने कहा कि सरकार रियल एस्टेट कारोबार नहीं करती, उसका लक्ष्य जनता का कल्याण है।
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी और जनता दल (सेक्युलर) जनता का विकास नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि वे रामनगर, कनकपुरा, चन्नपटना और मगड़ी के लोगों का विकास नहीं चाहते। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह बुधवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली जाएंगे। इसके बाद गुरुवार को तमिलनाडु के मामल्लपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में शामिल होंगे।
विज्ञापन
नागेंद्र ने और क्या-क्या कहा?
नागेंद्र ने सत्तारूढ़ दल के नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि पहले उन 126 लोगों के इस्तीफे लिए जाने चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का जिक्र किया और दावा किया कि उनके खिलाफ 29 मामले हैं। इसके अलावा उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के इस्तीफे की भी मांग की। नागेंद्र ने कहा कि वह जमीन से उठकर मेहनत के दम पर आगे बढ़े हैं और उन्हें दलित होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने अपने खिलाफ लगे आरोपों पर कहा कि वह अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं और उन्हें राहत मिल चुकी है। उनके मुताबिक, अदालत ने उन्हें दोषी नहीं माना है। उनके खिलाफ केवल आरोप हैं। नागेंद्र ने कहा कि कोई व्यक्ति खुद न्यायपालिका की भूमिका निभाकर उन्हें आरोपी या दोषी घोषित नहीं कर सकता। उन्होंने संविधान में मिले मौलिक अधिकारों का भी हवाला दिया।
विज्ञापन
अदालत पर पूरा भरोसा: मंत्री नागेंद्र
नागेंद्र ने साफ कहा कि अगर अदालत उन्हें दोषी ठहराती है, तो वह फैसला स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा कि अदालत उन्हें दोषी मानती है और कोई सजा देती है, तो वह न्यायपालिका के सामने सिर झुकाएंगे। इस बीच, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का भी नागेंद्र को समर्थन मिला है। उनके राजनीतिक सचिव एएस पोन्नन्ना ने भाजपा को नागेंद्र के खिलाफ आरोपों के सबूत विधानसभा में रखने की चुनौती दी।
पोन्नन्ना ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय केंद्र और भाजपा का मुखपत्र है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार कर्नाटक पुलिस और अपराध जांच विभाग पर भरोसा करती है। जांच अपराध जांच विभाग को सौंपे जाने के बाद नागेंद्र ने पारदर्शी जांच के लिए तुरंत इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने जांच से खुद को दूर रखा और अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया। पोन्नन्ना ने दावा किया कि 79 करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं। बाकी 4-5 करोड़ रुपये से जुड़े विस्तृत रिकॉर्ड और दस्तावेज भी मौजूद हैं। उनके मुताबिक, निगम का एक भी रुपया नहीं खोया है। अदालत के आदेश के अनुसार बरामद 79 करोड़ रुपये वाल्मीकि निगम को लौटाए जाने हैं और यह रकम खातों में मौजूद है। उन्होंने भाजपा से कहा कि अगर उसके पास कोई सबूत है तो उसे विधानसभा में पेश करे। सदन में इस पर चर्चा हो और सरकार को जवाब देने का मौका दिया जाए।
विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप
इससे पहले भाजपा नेताओं ने विधानसभा में काले शॉल पहनकर नागेंद्र को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का विरोध किया था। सप्ताहांत में पार्टी के नेताओं ने बेलगावी में धरना भी दिया और नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की। विधानसभा में लगातार दूसरे दिन विपक्ष ने नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग को लेकर हंगामा किया। नागेंद्र पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में करोड़ों रुपये के कथित गबन से जुड़े आरोप हैं।
डीके शिवकुमार ने विपक्ष की मांग खारिज करते हुए भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) के विरोध को राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को नोटिस देकर सदन में चर्चा करनी चाहिए और सरकार को यह समझाना चाहिए कि नागेंद्र को क्यों हटाया जाना चाहिए। शिवकुमार ने कहा कि नागेंद्र की कथित घोटाले में कोई भूमिका नहीं है। उनके अनुसार करीब 84 करोड़ रुपये की कथित गबन राशि में से 79 करोड़ रुपये बरामद हो चुके हैं। नागेंद्र से कोई रकम बरामद नहीं हुई है।
नागेंद्र ने पहले भी दिया था इस्तीफा
नागेंद्र ने सिद्धारमैया सरकार में मंत्री रहते हुए आरोप लगने के बाद इस्तीफा दिया था। दो साल बाद उन्हें फिर मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। उन्हें 3 अगस्त को डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। वह अब योजना और सांख्यिकी मंत्री हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने जुलाई 2024 में बेल्लारी के विधायक नागेंद्र को वाल्मीकि निगम घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था। बंगलूरू की विशेष अदालत ने अक्टूबर 2024 में उन्हें जमानत दे दी थी। प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की ओर से तैयार आरोपपत्रों में भी उनका नाम है।
सीएम शिवकुमार ने कुमारस्वामी को घेरा
इस बीच, सीएम शिवकुमार ने बंगलूरू दक्षिण जिले के बिदादी के पास ग्रेटर बंगलूरू एकीकृत टाउनशिप परियोजना के लिए किसानों की जमीन के अधिग्रहण के विरोध में जनता दल (सेक्युलर) के प्रदर्शन पर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी को भी घेरा। उन्होंने पूछा कि जब उन्होंने कुमारस्वामी को चर्चा के लिए बुलाया था, तब वह क्यों नहीं आए। शिवकुमार ने कहा कि जनता दल (सेक्युलर) को विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए। कुमारस्वामी के कथित रियल एस्टेट कारोबार वाले आरोप पर शिवकुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत किसने की थी, कुमारस्वामी इसके 'पितामह' हैं। उन्होंने कहा कि सरकार रियल एस्टेट कारोबार नहीं करती, उसका लक्ष्य जनता का कल्याण है।
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी और जनता दल (सेक्युलर) जनता का विकास नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि वे रामनगर, कनकपुरा, चन्नपटना और मगड़ी के लोगों का विकास नहीं चाहते। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह बुधवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली जाएंगे। इसके बाद गुरुवार को तमिलनाडु के मामल्लपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में शामिल होंगे।