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Explainer: क्या है कावेरी जल विवाद, जिसके लिए बड़ी तैयारी में कर्नाटक सीएम शिवकुमार; तमिलनाडु से टकराव क्यों?
Sun, 02 Aug 2026 03:45 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 02 Aug 2026 03:45 PM IST
सार
कर्नाटक के मुख्यमंत्री की तरफ से आज कावेरी जल विवाद पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक क्यों बुलाई गई? कावेरी नदी के जल को लेकर क्या विवाद है? हालिया समय में इसे लेकर क्या-क्या हुआ है? आइये जानते हैं...
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तमिलनाडु-कर्नाटक के बीच कावेरी विवाद।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को अपने आधिकारिक आवास पर एक सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक में जिस मुद्दे पर चर्चा तय की गई, वह है कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कई वर्षों से चल रहा कावेरी नदी के जल को साझा करने से जुड़ा विवाद। बताया गया है कि इस बैठक में कांग्रेस से लेकर भाजपा और जेडीएस जैसी प्रमुख पार्टियों के नेता पहुंचे।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर कर्नाटक के मुख्यमंत्री की तरफ से आज कावेरी जल विवाद पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक क्यों बुलाई गई है? कावेरी नदी के जल को लेकर क्या विवाद है? हालिया समय में इसे लेकर क्या-क्या हुआ है? आइये जानते हैं...
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर कर्नाटक के मुख्यमंत्री की तरफ से आज कावेरी जल विवाद पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक क्यों बुलाई गई है? कावेरी नदी के जल को लेकर क्या विवाद है? हालिया समय में इसे लेकर क्या-क्या हुआ है? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- कर्नाटक के सीएम ने क्यों बुलाई कावेरी जल विवाद पर बैठक?
1. तमिलनाडु सरकार की तैयारियांहाल ही में तमिलनाडु सरकार ने कावेरी नदी के जल साझाकरण को लेकर आपत्ति जताई है। तमिलनाडु सरकार ने साफ कर दिया है कि वह अपने हिस्से का पानी पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। राज्य के कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने शुक्रवार को कहा कि कर्नाटक की ओर से पानी छोड़ने से इनकार किया गया है। इसके चलते अब तमिलनाडु कानूनी रास्ता अपनाएगा। कानून मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु को कानून के अनुसार जितना पानी मिलना चाहिए, वह हर हाल में मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है, इसलिए सरकार सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगी।
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण जब भी कर्नाटक को तय मात्रा में पानी छोड़ने का निर्देश देता है, तब भी उसका पालन नहीं किया जाता। राज्य का आरोप है कि इससे तमिलनाडु के किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार ने कहा कि किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सभी कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
तमिलनाडु सरकार फिलहाल कई विकल्पों पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय इस पूरे मामले पर लगातार समीक्षा कर रहे हैं। वह कानूनी विशेषज्ञों, जल विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठकें कर रहे हैं ताकि अदालत में मजबूत पक्ष रखा जा सके। सरकार अगले कुछ दिन के अंदर अपनी विस्तृत कानूनी रणनीति का भी एलान कर सकती है। इसके तहत विजय सरकार सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग, जल बंटवारे से जुड़े कानूनी उपायों को मजबूत करना, कर्नाटक के साथ बातचीत की संभावना तलाशना और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करने का भी तरीका अपना सकती है।
तमिलनाडु सरकार फिलहाल कई विकल्पों पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय इस पूरे मामले पर लगातार समीक्षा कर रहे हैं। वह कानूनी विशेषज्ञों, जल विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठकें कर रहे हैं ताकि अदालत में मजबूत पक्ष रखा जा सके। सरकार अगले कुछ दिन के अंदर अपनी विस्तृत कानूनी रणनीति का भी एलान कर सकती है। इसके तहत विजय सरकार सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग, जल बंटवारे से जुड़े कानूनी उपायों को मजबूत करना, कर्नाटक के साथ बातचीत की संभावना तलाशना और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करने का भी तरीका अपना सकती है।
2. कर्नाटक में तमिलनाडु के कदमों को लेकर विवाद
कावेरी जल विवाद और तमिलनाडु के कदमों के चलते कर्नाटक में मुख्यमंत्री विजय और उनकी सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़क उठा है। आलम यह है कि कर्नाटक से 15 दिनों तक रोजाना कावेरी नदी का 3500 क्यूसेक पानी छोड़ने के कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के आदेश का भी विरोध हो रहा है। इस फैसले का किसान संगठनों और कन्नड़ समूहों ने विरोध किया, उनका कहना है कि कर्नाटक खुद पानी की कमी से जूझ रहा है।
इस विवाद के चलते कर्नाटक में लोगों का गुस्सा विजय की फिल्म जन नायकन के खिलाफ भी भड़का। राज्य में कई जगह फिल्म की स्क्रीनिंग रोकी गई है। हालात को देखते हुए कई थिएटरों ने एहतियात के तौर पर शो कैंसिल कर दिए हैं, वहीं कुछ जगहों पर पोस्टर भी हटा दिए गए हैं, ताकि कोई गलत घटना न हो। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, खासकर उन जगहों पर जहां तमिल भाषी लोगों की संख्या ज्यादा है।
कावेरी जल विवाद और तमिलनाडु के कदमों के चलते कर्नाटक में मुख्यमंत्री विजय और उनकी सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़क उठा है। आलम यह है कि कर्नाटक से 15 दिनों तक रोजाना कावेरी नदी का 3500 क्यूसेक पानी छोड़ने के कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के आदेश का भी विरोध हो रहा है। इस फैसले का किसान संगठनों और कन्नड़ समूहों ने विरोध किया, उनका कहना है कि कर्नाटक खुद पानी की कमी से जूझ रहा है।
इस विवाद के चलते कर्नाटक में लोगों का गुस्सा विजय की फिल्म जन नायकन के खिलाफ भी भड़का। राज्य में कई जगह फिल्म की स्क्रीनिंग रोकी गई है। हालात को देखते हुए कई थिएटरों ने एहतियात के तौर पर शो कैंसिल कर दिए हैं, वहीं कुछ जगहों पर पोस्टर भी हटा दिए गए हैं, ताकि कोई गलत घटना न हो। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, खासकर उन जगहों पर जहां तमिल भाषी लोगों की संख्या ज्यादा है।
कावेरी जल विवाद
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
कर्नाटक में इस बिगड़ती स्थिति के मद्देनजर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी कहा था कि राज्य सरकार कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के फैसले के खिलाफ अपील करेगी। बताया जा रहा है कि रविवार को सीएम ने राज्य में बिगड़ती स्थिति और कावेरी के पानी को लेकर आगे की योजना बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई है।
क्या है कावेरी नदी और इसका विस्तार?
विवाद को समझने से पहले कावेरी नदी के विस्तार को समझना अहम है। दरअसल, कावेरी एक अंतरराज्यीय बेसिन है जिसका उद्गम कर्नाटक है और यह बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले तमिलनाडु और पुडुचेरी से होकर गुजरता है। कावेरी बेसिन का कुल जलसंभरण (वाटरशेड) 81,155 वर्ग किलोमीटर है जिनमें से कर्नाटक में नदी का जल संभरण क्षेत्र सबसे ज्यादा लगभग 34,273 वर्ग किलोमीटर है। इसके बाद केरल में कुल जल संभरण क्षेत्र 2,866 वर्ग किलोमीटर है और तमिलनाडु और पांडिचेरी में शेष 44,016 वर्ग किलोमीटर जल संभरण क्षेत्र है।
अब जानें- कावेरी कावेरी नदी और इसके पानी को साझा करने के विवाद के बारे में
क्या है कावेरी नदी और इसका विस्तार?
विवाद को समझने से पहले कावेरी नदी के विस्तार को समझना अहम है। दरअसल, कावेरी एक अंतरराज्यीय बेसिन है जिसका उद्गम कर्नाटक है और यह बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले तमिलनाडु और पुडुचेरी से होकर गुजरता है। कावेरी बेसिन का कुल जलसंभरण (वाटरशेड) 81,155 वर्ग किलोमीटर है जिनमें से कर्नाटक में नदी का जल संभरण क्षेत्र सबसे ज्यादा लगभग 34,273 वर्ग किलोमीटर है। इसके बाद केरल में कुल जल संभरण क्षेत्र 2,866 वर्ग किलोमीटर है और तमिलनाडु और पांडिचेरी में शेष 44,016 वर्ग किलोमीटर जल संभरण क्षेत्र है।
इसके बाद कावेरी नदी की सहायक नदियों की भूमिका भी अहम होती है। कर्नाटक में हरंगी और हेमावती बांध हरंगी और हेमावती नदियों पर बने हैं। हरंगी और हेमावती कावेरी की ही सहायक नदियां हैं। राज्य में मुख्य कावेरी नदी में इन दो बांधों के निम्न धारा में कृष्णा राजा सागर बांध बनाया गया है। कर्नाटक के कबिनी जलाशय का निर्माण कावेरी नदी की एक सहायक नदी कबिनी नदी पर किया गया है जो कृष्णा सागर जलाशय में जुड़ती है।
अब जब कावेरी तमिलनाडु की ओर आती है तो यहां नदी की मुख्यधारा में मेटुर बांध बनाया गया है। कावेरी के साथ कबिनी और मेटूर बांध के संगम के बीच केन्द्रीय जल आयोग ने मुख्य कावेरी नदी पर दो जीएंडडी स्थलों यानी कोलेगल और बिलीगुंडलू की स्थापना की है। बिलीगुंडुलू जीएंडडी स्थल मेटूर बांध के तहत लगभग 60 किलोमीटर है जहां कावेरी नदी कर्नाटक और तमिलनाडु के साथ सीमा बनाती है।
अब जब कावेरी तमिलनाडु की ओर आती है तो यहां नदी की मुख्यधारा में मेटुर बांध बनाया गया है। कावेरी के साथ कबिनी और मेटूर बांध के संगम के बीच केन्द्रीय जल आयोग ने मुख्य कावेरी नदी पर दो जीएंडडी स्थलों यानी कोलेगल और बिलीगुंडलू की स्थापना की है। बिलीगुंडुलू जीएंडडी स्थल मेटूर बांध के तहत लगभग 60 किलोमीटर है जहां कावेरी नदी कर्नाटक और तमिलनाडु के साथ सीमा बनाती है।
अब जानते हैं कि विवाद क्या है?
तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल विवाद लंबे समय से जारी है। साल 1892 और 1924 में मद्रास प्रेसीडेंसी और मैसूर साम्राज्य के बीच हुए दो समझौतों के तहत दोनों राज्यों में कावेरी नदी के पानी के बंटवारे पर सहमति बनी थी। पानी के बंटवारे पर असहमति को दूर करने के लिए साल 1990 में भारत सरकार ने दो जून 1990 को कावेरी जल विवाद अधिकरण (सीडब्लूडीटी) की स्थापना की।
सीडब्लूडीटी ने कर्नाटक को राज्य में अपने जलाशय से पानी छोड़ने का निर्देश देते हुए 25 जून 1991 को एक अंतरिम आदेश पारित किया था। उस आदेश में कहा गया था कि एक जल वर्ष में (एक जून से 31 मई) मासिक रूप से या साप्ताहिक आकलन के रूप में तमिलनाडु के मेटूर जलाशय को 205 मिलियन क्यूबिक फीट (टलएमसी) पानी सुनिश्चित हो सके।
तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल विवाद लंबे समय से जारी है। साल 1892 और 1924 में मद्रास प्रेसीडेंसी और मैसूर साम्राज्य के बीच हुए दो समझौतों के तहत दोनों राज्यों में कावेरी नदी के पानी के बंटवारे पर सहमति बनी थी। पानी के बंटवारे पर असहमति को दूर करने के लिए साल 1990 में भारत सरकार ने दो जून 1990 को कावेरी जल विवाद अधिकरण (सीडब्लूडीटी) की स्थापना की।
सीडब्लूडीटी ने कर्नाटक को राज्य में अपने जलाशय से पानी छोड़ने का निर्देश देते हुए 25 जून 1991 को एक अंतरिम आदेश पारित किया था। उस आदेश में कहा गया था कि एक जल वर्ष में (एक जून से 31 मई) मासिक रूप से या साप्ताहिक आकलन के रूप में तमिलनाडु के मेटूर जलाशय को 205 मिलियन क्यूबिक फीट (टलएमसी) पानी सुनिश्चित हो सके।
जल शक्ति मंत्रालय के जलसंसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के मुताबिक, किसी विशेष महीने के संदर्भ में चार बराबर किस्तों में चार सप्ताहों में पानी छोड़ा जाना होता है। यदि किसी सप्ताह में पानी की अपेक्षित मात्रा को जारी करना संभव नहीं हो तो उस कमी को पूरा करने के लिए बाद के सप्ताह में छोड़ा जाएगा। वहीं विनियमित तरीके से तमिलनाडु द्वारा पुदुचेरी के काराइकल क्षत्र के लिए छह टीएमसी जल दिया जाएगा।
सीडब्लूडीटी बनने के बाद भी तमिलनाडु और कर्नाटक में कई मुद्दों को लेकर विवाद जारी रहा और अंततः मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंच गया। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कर्नाटक को जून से मई के बीच तमिलनाडु के लिए 177 टीएमसी पानी छोड़ने का आदेश दिया था। कोर्ट ने अंतिम अदालती आदेशों के ढांचे के भीतर राज्यों के बीच विवादों का निपटारा करने के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) और कावेरी जल नियामक समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के गठन का भी आदेश दिया। इसके बावजूद दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर विवाद आज भी बना हुआ है।
सीडब्लूडीटी बनने के बाद भी तमिलनाडु और कर्नाटक में कई मुद्दों को लेकर विवाद जारी रहा और अंततः मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंच गया। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कर्नाटक को जून से मई के बीच तमिलनाडु के लिए 177 टीएमसी पानी छोड़ने का आदेश दिया था। कोर्ट ने अंतिम अदालती आदेशों के ढांचे के भीतर राज्यों के बीच विवादों का निपटारा करने के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) और कावेरी जल नियामक समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के गठन का भी आदेश दिया। इसके बावजूद दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर विवाद आज भी बना हुआ है।