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नीट पीड़ित के परिजनों से मिले राहुल: पूछा- ईमानदार बच्चों ने किस बात की सजा भुगती? छात्रों से माफी मांगे पीएम
Sun, 02 Aug 2026 07:37 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Sun, 02 Aug 2026 07:37 PM IST
सार
राहुल गांधी ने तमिलनाडु में नीट पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले तीन छात्रों के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि छात्रों को किसी माफी की जरूरत नहीं है, बल्कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था की विफलता स्वीकार करते हुए सच बताना, न्याय देना और छात्रों से माफी मांगनी चाहिए। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में प्रदर्शन करने वाले छात्रों को माफ करने की बात कही थी, जिस पर राहुल ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
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राहुल गांधी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को तमिलनाडु में नीट पेपर लीक की वजह से जान देने वाले छात्रों के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों को 'माफ करने' की बात करते हैं, जबकि सच यह है कि छात्रों को किसी माफी की जरूरत नहीं है। सरकार पर छात्रों को सच बताने, उन्हें न्याय दिलाने और उनसे माफी मांगने का नैतिक दायित्व है।
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क्या बोले राहुल गांधी, परिवारों से मुलाकात के बाद?
राहुल गांधी ने कहा कि तमिलनाडु यात्रा के दौरान उन्होंने गोपिका, रोशिनी और वेत्री आनंदन के परिवारों से मुलाकात की। ये तीनों छात्र-छात्राएं नीट पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद गहरे मानसिक तनाव में आ गए थे और उन्होंने अपनी जान दे दी। राहुल ने कहा कि हर परिवार के मन में एक ही सवाल है- जब बच्चे ईमानदारी से मेहनत कर रहे थे, तो उन्हें एक बेईमान व्यवस्था की कीमत क्यों चुकानी पड़ी?
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दोबारा परीक्षा ने कैसे बढ़ाया छात्रों पर दबाव?
राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी और दोबारा नीट परीक्षा आयोजित की गई। इस पूरी प्रक्रिया ने लाखों छात्रों पर असहनीय मानसिक दबाव डाल दिया। उन्होंने कहा कि हर आंकड़े के पीछे एक ऐसा बच्चा है, जिसके सपने थे, और एक ऐसा परिवार है, जो आज अपूरणीय क्षति का दर्द झेल रहा है।
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शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस की लड़ाई किस लिए है?
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने पीड़ित परिवारों का दर्द सुना है। कांग्रेस की लड़ाई ऐसी शिक्षा व्यवस्था के लिए है, जहां मेहनत का सम्मान हो, परीक्षाएं निष्पक्ष हों और संस्थागत विफलताओं की वजह से किसी छात्र को अपनी जिंदगी दांव पर न लगानी पड़े।
प्रधानमंत्री के 'माफ करने' वाले बयान पर राहुल ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री छात्रों को 'माफ करने' की बात करते हैं, लेकिन जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खो दिया है, उनसे मिलने के बाद उनका विश्वास और मजबूत हुआ है कि भारत के छात्रों को किसी माफी की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के सामने सच रखना चाहिए, उन्हें न्याय देना चाहिए और उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
ममल्लापुरम में परिजनों से मिलकर राहुल ने क्या कहा?
ममल्लापुरम में मृतक छात्रों के परिजनों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी माता-पिता के लिए अपने बच्चे को खोने से बड़ा दुख कोई नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हर युवा की मौत के पीछे एक ऐसा परिवार है, जिसका दर्द कभी खत्म नहीं होगा, और साथ ही एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल हैं, जो पूरी तरह विफल और भ्रष्ट हो चुकी है।
क्या राहुल ने शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्ट बताया?
राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और वर्षों की मेहनत एक झटके में खत्म हो जाने से छात्रों का भरोसा टूट रहा है। छात्रों से ईमानदारी की उम्मीद की जाती है, लेकिन व्यवस्था स्वयं ईमानदार नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को खोया है, उनकी चीखें और आंसू जीवनभर उनका पीछा करेंगे और इसके साथ यह सवाल भी बना रहेगा कि आखिर ऐसी व्यवस्था कब बदलेगी।
मोदी पर राहुल ने क्या आरोप लगाया?
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री छात्रों को माफ करने की बात कर रहे हैं, जबकि उन्हें पहले उन परिवारों से मिलना चाहिए था, जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया है या जिनकी वर्षों की मेहनत, समय, बचत और सपने पेपर लीक की घटनाओं में बर्बाद हो गए। उन्होंने कहा कि भारत के छात्रों को प्रधानमंत्री की माफी नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जारी एक वीडियो संदेश में कहा था कि नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे 'भटके हुए बच्चों' को अदालतों में घसीटने से समस्या का समाधान नहीं होगा, इसलिए उन्होंने उन्हें माफ करने का फैसला किया।