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Kerala Assembly Elections: केरल में यूडीएफ गठबंधन की जीत के पांच बड़े कारण, जानें विजयन सरकार को कैसे मिली हार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Mon, 04 May 2026 03:12 PM IST
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सार

Kerala Assembly Elections: यूडीएफ ने दस साल बाद केरल में सत्ता में वापसी का मार्ग प्रशस्त किया है। एलडीएफ को मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के मजबूत प्रदर्शन से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है। पढे़ं, केरल में यूडीएफ गठबंधन की जीत के पांच बड़े कारण..,

Kerala Assembly Elections: Key reasons for UDF alliance's victory, know how Vijayan govt faced defeat
केरल में कैसी हारी एलडीएफ? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) केरल विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत की ओर बढ़ रहा है। मतगणना के रुझान दस साल बाद सत्ता में वापसी का संकेत दे रहे हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के शासन का अंत होगा।
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96 सीटों पर आगे है यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट
चुनाव आयोग के दोपहर 3 बजे के रुझानों के अनुसार, यूडीएफ 140 में से 96 सीटों पर आगे है। यह गठबंधन आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर चुका है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस- 64 सीट, 15 जीत, 49 पर आगे, आईयूएमएल- 22 सीट, दो जीत, 20 पर आगे, केरल कांग्रेस- सात सीट, दो जीत, पांच पर आगे रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी , केरल कांग्रेस (जैकब) एक सीट पर आगे हैं। वहीं, रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने एक सीट पर जीत हासिल की है।
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35 सीटों तक पहुंच रही है लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट
माकपा- 26 सीट, 11 पर जीत और 15 पर आगे, भाकपा- आठ सीट, तीन सीट पर जीत और पांच पर आगे, राजद एक सीट पर आगे चल रही है।

केरल में विधानसभा चुनाव और मतदान प्रतिशत
विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 9 अप्रैल को 140 निर्वाचन क्षेत्रों में हुआ था। इसमें 78.27 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। चुनाव आयोग के अनुसार, कुल 883 उम्मीदवार मैदान में थे। मतगणना प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा के बीच जारी है।

केरल में यूडीएफ गठबंधन की जीत के कारण
एलडीएफ सरकार को अपनी कमजोरियों के चलते हार का सामना करना पड़ा। सत्ता विरोधी लहर और भ्रष्टाचार के आरोपों ने एलडीएफ की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया। एलडीएफ सरकार को 10 साल के शासन के बाद स्वाभाविक सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा। हालांकि, दूसरे कार्यकाल में कोरोना महामारी के दौरान किए गए अच्छे कार्यों से कुछ हद तक फायदा मिला था। लेकिन, सबरीमाला सोना चोरी विवाद ने सरकार की प्रतिष्ठा को धूमिल किया। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके दामाद-बेटी पर भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लगे। इन आरोपों से मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत छवि भी काफी खराब हुई, जिससे पार्टी को नुकसान हुआ। इन घटनाओं ने सरकार की जनधारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया।

कांग्रेस की एकजुटता और वापसी
केरल में कांग्रेस पार्टी ने अपनी आंतरिक एकजुटता बनाए रखी। वीडी सतीशन, एके एंटनी और शशि थरूर जैसे प्रमुख नेताओं ने मिलकर काम किया। वायनाड में हुए एक हादसे ने एलडीएफ सरकार की कमजोरियों को उजागर किया।वायनाड हादसे के बाद राहुल और प्रियंका के लगातार दौरों ने पार्टी को मजबूती दी। इन प्रयासों से कांग्रेस जनता के बीच अपनी खोई हुई पकड़ फिर से बनाने में सफल रही।

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