Kerala: देवी-देवताओं का नाम लेने पर उठे थे सवाल, हाईकोर्ट ने भाजपा पार्षदों को दोबारा शपथ लेने का दिया आदेश
केरल हाईकोर्ट ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 भाजपा पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर दोबारा शपथ लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने माना कि कुछ पार्षदों ने निर्धारित प्रारूप के बजाय देवी-देवताओं के नाम पर शपथ ली थी।
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केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। जिसके कारण राज्य की राजधानी में एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील विवाद को फिर से हवा दे दी है। न्यायालय ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 भाजपा पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर नए सिरे से शपथ लेने का निर्देश दिया है, क्योंकि पदभार ग्रहण करने के बाद उनके शपथ ग्रहण के तरीके पर सवाल उठाए गए थे।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद इसी साल जनवरी में शुरू हुआ था जब उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने सीपीआई (एम) पार्षद एसपी दीपक द्वारा दायर याचिका पर पार्षदों को नोटिस जारी किया था। याचिका में भाजपा सदस्यों द्वारा ली गई शपथ की वैधता को चुनौती दी गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनमें से कई ने नगरपालिका नियमों के तहत निर्धारित प्रारूप का पालन करने के बजाय विशिष्ट देवी-देवताओं के नाम पर शपथ ली थी। दरअसल, तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 पार्षदों ने विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं, भरतम्बा (भारत माता), गुरुदेव और अपने राजनीतिक आंदोलन के शहीदों के नाम पर शपथ ली। एक अलग याचिका में, पलक्कड़ जिले के वडक्केनचेरी ग्राम पंचायत के एक सदस्य ने 'ओम्मन चांडी के नाम पर ईश्वर के आशीर्वाद से' शपथ ली।
'देवी-देवताओं के नाम पर शपथ कैसे ली जा सकती?'
पिछली सुनवाई के दौरान, अदालत ने यह टिप्पणी की थी कि वैधानिक प्रारूप के अनुसार निर्वाचित प्रतिनिधियों को या तो ईश्वर के नाम पर शपथ लेनी होती है या गंभीर प्रतिज्ञा करनी होती है। तब पीठ ने सवाल उठाया था कि जब कानून में एक विशिष्ट प्रारूप निर्धारित है तो कई देवी-देवताओं के नाम पर शपथ कैसे ली जा सकती है। कोर्ट ने आगे कहा कि विशिष्ट देवी-देवताओं, भारत माता, राजनीतिक शहीदों, संगठनों या व्यक्तियों के नामों को शामिल करना कानूनों के तहत अनुमत नहीं है। याचिका पर कार्रवाई करते हुए अदालत ने बुधवार को 20 पार्षदों को चार सप्ताह के भीतर फिर से शपथ लेने का निर्देश दिया।
धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता लेकिन...
न्यायमूर्ति कुन्हीकृष्णन ने साफ किया कि नागरिकों को किसी भी देवता की पूजा करने या किसी भी धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है, लेकिन शपथ के वैधानिक स्वरूप में किसी भी प्रकार के परिवर्धन या प्रतिस्थापन की अनुमति नहीं है। फैसले में कहा गया, 'जब कानून में शपथ लेने का एक विशेष तरीका निर्धारित किया गया हो... तो 'ईश्वर' शब्द का विस्तार करना अनुमेय नहीं है।' इसके साथ ही, अदालत ने निर्वाचित प्रतिनिधियों के लोकतांत्रिक जनादेश को रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि दोषपूर्ण शपथ ग्रहण समारोह के बावजूद उनके चुनाव वैध बने हुए हैं।
इससे पहले, याचिकाकर्ता ने मामले के अंतिम निर्णय होने तक पार्षदों को निगम की बैठकों में भाग लेने और मानदेय लेने से रोकने के लिए एक अंतरिम आदेश की भी मांग की थी। हालांकि, अदालत ने उस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति दी। इसके साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी शपथ की वैधता मामले के अंतिम परिणाम पर निर्भर रहेगी। राज्य के इतिहास में पहली बार, भाजपा ने एक आश्चर्यजनक जीत दर्ज करते हुए, चार दशकों से अधिक समय से शासन कर रही सीपीआई (एम) को सत्ता से हटाकर तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर कब्जा कर लिया।