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Khabaron Ke Khiladi: यूपी में कितना बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगा चन्दा चोरी, विश्लेषकों बताया फायदे-नुकसान का गणित

Sat, 11 Jul 2026 09:16 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 11 Jul 2026 09:16 PM IST
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Khabaron Ke Khiladi Ayodhya Ram Mandir Donation Scam Controversy Uttar Pradesh Assembly Elections Politics BJP
खबरों के खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
राम मंदिर चाढ़ावा चोरी का मुद्दा सियासी रंग ले चुका है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। राजनीतिक दल विरोधियों को वर्तमान से लेकर इतिहास तक बता रहे हैं। उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव होने हैं। ऐसे में क्या यह मुद्दा आगे चलकर चुनावी मुद्दा बनेगा, या चुनाव आने तक सब रफादफा हो जाएगा। इसी पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पीयूष पंत, पूर्णिमा त्रिपाठी, अनुराग वर्मा और श्रीनिवास मौजूद रहे।  
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पूर्णिमा त्रिपाठी: उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अभी समय है। इतने लंबे समय तक किसी मुद्दे को जिंदा रखना मुश्किल होता  है। इसलिए अभी इस पर ये बताना कि चुनाव में ये मुद्दा रहेगा या नहीं मुश्किल है। अभी की स्थिति में ये कहना तो मुश्किल है कि इससे किसे फायदा होगा। ये जरूर लग रहा है कि इसका थोड़ा बहुत नुकसान भाजपा को हो सकता है, लेकिन समाजवादी पार्टी को भाजपा का नुकसान होने से फायदा हो जाए इसकी संभावना मुझे कम लगती है।
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रामकृपाल सिंह: इंसान कोई भी सौ फीसदी सही नहीं होता है। सारी दुनिया में जितने भी बड़े कत्लेआम हुए हैं सब ईमानदारी का चोला ओढ़कर हुए हैं। इस देश में कोई भी स्वायत्ता संविधान के तहत है। कोई भी संविधान के ऊपर नहीं है। कोई ट्रस्ट ही क्यों न हो। आप अगर किसी को अकाउंटिंग के लिए रखेंगे तो उसकी न्यू्न्तम अहर्ता तो देखेंगे। ईमानदारी का अहंकार से बड़ा कोई गुनाह नहीं होता है। जनता सब जानती है। अगर जनता को ये लग गया कि सत्ता किसी को संरक्षण दे रही है तो नुकसान हो सकता है। 

पीयूष पंत: मुझे लगता है कि भ्रष्टाचार का एक बड़ा मुद्दा इस उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उभरकर सामने आएगा। सिर्फ यही नहीं  (राम मंदिर चढ़ावा चोरी) बाकी मुद्दे भी इसमें शामिल होंगे। सिर्फ राम मंदिर चढ़ावा चोरी अकेले बहुत बड़ा मुद्दा नहीं बन सकता है। आस्था का मुद्दा लोगों की भावना से जुड़ा मुद्दा है। अलग-अलग मुद्दों में ये एक छौंक का काम कर सकता है। भावनात्मक मुद्दे चुनाव को प्रभावित करते हैं, इसलिए विपक्ष इस मुद्दे को मरने नहीं देगा। भ्रष्टाचार का मुद्दा बनेगा उसमें ये मुद्दा आइसिंग के रूप में लगाया जाएगा। 

श्रीनिवास: कार्ल मार्क्स ने कहा था कि शासक वर्ग धर्म को धर्म की तरह इस्तेमाल नहीं करता है, वो धर्म को आध्यात्मिक हथियार की तरह इस्तेमाल करता है। जहां तक बात है कि वोट बढ़ेंगे-घटेंगे, ये बताना बहुत मुश्किल है। भाजपा के पास जो राम नाम का हथियार था वो कहीं न कहीं थोड़ा कुंद पड़ गया है। हिंदुस्तान की जनता बहुत जल्दी जागती है और बहुत जल्दी सो जाती है। अगर कोई ये कह दे कि चंपत राय निर्दोष हैं तो ये नहीं मना जा सकता है। 

अनुराग वर्मा: बहुत सी चीजें को समय बताता है वो कैसे आएंगी, लेकिन एक चीज स्पष्ट है कि इस मामले में न तो भाजपा हारी है और न ही सपा जीती है। इसके बाद भी ये नहीं कहा जा सकता है कि कुछ हुआ ही नहीं है। चंपत राय अपनी मर्जी से चंपत हुए हैं। भारतीय लोगों भ्रष्टाचार कभी मुद्दा नहीं बनता है। उसे कुछ दिनों बाद लोग भूल जाते हैं। 

विनोद अग्निहोत्री: राम मंदिर के मुद्दे से ही भाजपा की राजनीति परवान चढ़ी है। उसी राम मंदिर में ये मामला आ गया है। इसलिए ये राजनीतिक मुद्दा तो बन गया है। सवाल ये है कि क्या विपक्ष उसे सस्टेन कर पाएगा। इस मुद्दे की सुई अयोध्या में अटकी है। जो लोग इससे जुड़े रहे हैं वो इसे ठंडा नहीं होने देंगे। भाजपा के सामने चुनौती ये है कि ये उसकी अपनी पिच है, भाजपा इसका डैमेज कंट्रोल कैसे करती है ये मुद्दा उसी पर निर्भर करेगा।
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