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Khabaron Ke Khiladi: एनसीईआरटी की किताबों में बदलाव कितना जरूरी, कितना सियासी; विश्लेषकों से समझें
Sat, 27 Jun 2026 05:06 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 27 Jun 2026 05:06 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी ने कक्षा नौ की नई सामाजिक विज्ञान की किताब गुरुवार को जारी की। नई किताब में कई नई चीजें जोड़ी गई हैं। इनमें आपातकाल, चुनाव आयोग और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों को शामिल किया गया। इसके साथ ही मनुस्मृति के एक श्लोक का भी इसमें उल्लेख किया गया है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, समीर चौगांवकर और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
समीर चौगांवकर: सरकार ये बताना चाहती है कि छात्र इस बात को समझें कि किस तरह से इंदिरा गांधी ने उस वक्त आपातकाल लगाया। भाजपा की कोशिश है कि ये लोगों के जहन में बना रहे। निश्चित रूप से ये राजनीतिक फैसला है। क्योंकि कांग्रेस इससे बचना चाहती है और भाजपा कांग्रेस की इस ऐतिहासिक गलती को लगातार उधेड़ना चाहती है।
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पूर्णिमा त्रिपाठी: ये एक राजनीतिक मसला है। एक बच्चा जो आगे चलकर देश का वोटर बनेगा, उसे सरकार इसी स्तर पर ये बताना चाहती है। जब वो बच्चा ये पढ़ेगा और आज के माहौल से तुलना करेगा तो सवाल भी पूछेगा। वेदों को पढ़ाने की जहां तक बात है तो ये अच्छी चीज है। ये धर्म का मामला नहीं है ये हमारे संस्कार हैं। इसे हमारे बच्चों को जानना चाहिए। मुझे इसमें कोई बुराई नजर नहीं आती है।
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समीर चौगांवकर: सरकार ये बताना चाहती है कि छात्र इस बात को समझें कि किस तरह से इंदिरा गांधी ने उस वक्त आपातकाल लगाया। भाजपा की कोशिश है कि ये लोगों के जहन में बना रहे। निश्चित रूप से ये राजनीतिक फैसला है। क्योंकि कांग्रेस इससे बचना चाहती है और भाजपा कांग्रेस की इस ऐतिहासिक गलती को लगातार उधेड़ना चाहती है।
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पूर्णिमा त्रिपाठी: ये एक राजनीतिक मसला है। एक बच्चा जो आगे चलकर देश का वोटर बनेगा, उसे सरकार इसी स्तर पर ये बताना चाहती है। जब वो बच्चा ये पढ़ेगा और आज के माहौल से तुलना करेगा तो सवाल भी पूछेगा। वेदों को पढ़ाने की जहां तक बात है तो ये अच्छी चीज है। ये धर्म का मामला नहीं है ये हमारे संस्कार हैं। इसे हमारे बच्चों को जानना चाहिए। मुझे इसमें कोई बुराई नजर नहीं आती है।
रामकृपाल सिंह: मैं हमेशा ये बात कहता हूं कि सच्चाई हमेशा वस्तुनिष्ठ होती है। जो तथ्य हैं, जो घटनाएं हैं वो तो आप कहेंगे ही ना। विज्ञान में क्या है जिसने जो खोजा उसके आगे जो खोज हुई उन सबका जिक्र तो करना होता है। ऐसे ही जो घटना हुई, जो तथ्य है उसे जरूर बताना चाहिए। उसे किसी पार्टी लाइन में नहीं बांधना चाहिए।
अनुराग वर्मा: क्या एनसीईआरटी की किताबों में बदलाव की जरूरत है या नहीं। राजनीति पहले भी हुई है इन किताबों को लिखने में, राजनीति आज भी हो रही है। इसमें कुछ गलत नहीं है। गलत ये है कि जो घटना हुई है उसे नहीं बताया जाए। बदलाव प्रकृति का नियम है। ये बदल गई तो इसमें क्या गलत है।
विनोद अग्निहोत्री: आपताकाल का अध्याय डालना ही चाहिए, लेकिन इसे सिलेक्टिव तौर पर नहीं डालना चाहिए। ये लोकतंत्र का काला अध्याय था इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन इसे समग्रता से डालना चाहिए। इतिहास के तथ्य लिखने वाले के नजरिए के हिसाब से लिखे जाते हैं।
अनुराग वर्मा: क्या एनसीईआरटी की किताबों में बदलाव की जरूरत है या नहीं। राजनीति पहले भी हुई है इन किताबों को लिखने में, राजनीति आज भी हो रही है। इसमें कुछ गलत नहीं है। गलत ये है कि जो घटना हुई है उसे नहीं बताया जाए। बदलाव प्रकृति का नियम है। ये बदल गई तो इसमें क्या गलत है।
विनोद अग्निहोत्री: आपताकाल का अध्याय डालना ही चाहिए, लेकिन इसे सिलेक्टिव तौर पर नहीं डालना चाहिए। ये लोकतंत्र का काला अध्याय था इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन इसे समग्रता से डालना चाहिए। इतिहास के तथ्य लिखने वाले के नजरिए के हिसाब से लिखे जाते हैं।