Khabaron Ke Khiladi: बीएमसी चुनाव में किसका अस्तिव दांव पर, गठबंधन के बनते बिगड़ते खेल को विश्लेषकों ने बताया
महाराष्ट्र में बीएमसी चुनावों के लेकर सियासत तेज हो गई है। गठबंधनों में टिकट को लेकर बवाल हुआ। वहीं शिवसेना लंबे समय से नगर पालिका चुनावों को जीतती रही है। इसलिए मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है।
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महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले राज्यभर की सियासत में गर्माहट तेज हो गई है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच कहां कौन सा दल किस दल के साथ चुनाव लड़ रहा है कौन किसके खिलाफ ये बहुत जटिल हो गया। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा बीएमसी के चुनाव की हो रही है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, राकेश शुक्ल, अजय सेतिया, अनुराग वर्मा और हर्षवर्धन त्रिपाठी मौजूद रहे।
हर्षवर्धन त्रिपाठी: जिस महानगरपालिका का बजट 90 हजार करोड़ रुपये हो। जिस पर 20 साल से ज्यादा समय से शिवसेना का कब्जा है। बीएमसी ही नहीं पूरे महाराष्ट्र में टिपिकल महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स हो रही है। पूरे राज्य में यह तय नहीं हो पा रहा है कि ‘नारी बीच सारी है या सारी बीच नारी’। पूरे महाराष्ट्र की सियासत को देवेंद्र फडणवीस चला रहे हैं और यहां का पूरा चुनाव माया का चुनाव बन गया है।
अजय सेतिया: 1996 से लेकर 2022 तक बीएमसी में शिवसेना का नियंत्रण रहा है। ये नियंत्रण भाजपा के समर्थन से था। 2022 के बाद ये नियंत्रण बना रहे कांग्रेस के समर्थन से रहा। आज तारीख में स्थितियां बहुत बदल चुकी है। कांग्रेस और शरद पवार पिक्चर से बाहर हो गए हैं। अजित पवार को भाजपा ने गठबंधन से बाहर कर दिया है। इससे यह तय हो गया है कि आगे भाजपा का गठबंधन किस ओर जाएगा।
अनुराग वर्मा: महाराष्ट्र की राजनीति पूरी तरह पारंपरिक क्षेत्रीय राजनीति का उदाहरण है। जहां तक बात शिवसेना यानी ठाकरे परिवार और एनसीपी यानी शरद पवार की तो ये दोनों कभी अलग थे ही नहीं। महाराष्ट्र की राजनीति में हमेशा से नगर निगम की राजनीति में ज्यादा फोकस रहा है। इस चुनाव के बाद तय होगा कि कौन कहां रहेगा। शरद पवार प्रासंगिक रहेंगे या नहीं ये तय होगा। ठाकरे परिवार महाराष्ट्र की सियासत में प्रासंगिक रहेगा या नहीं यह भी तय होगा।
राकेश शुक्ल: देवेंद्र फडणवीस ने जिस तरह से पूरी सियासी बिसात बिछाई है उसमें सबसे ज्यादा नुकसान जिसे हो रहा हैं वो एकनाथ शिंदे। जो लोग मुंबई में साथ-साथ लड़ रहे हैं वो पूरे महाराष्ट्र में अलग-अलग लड़ रहे हैं। महाराष्ट्र में एक ऐसी राजनीतिक खिचड़ी बन गई है, जिसने ये जताया है राजनीति हमसे सीखिए। स्थानीय निकाय चुनाव में एक नया चुनावी मॉडल महाराष्ट्र पेश कर रहा है।
विनोद अग्निहोत्री: शिवसेना का जो अध्याय है वो तो खत्म हो गया है। ये लड़ाई तो अस्तित्व की लड़ाई है। लड़ाई ठाकरे परिवार के अस्तित्व की, पवार परिवार के अस्तित्व की और एकनाथ शिंदे के अस्तित्व की है। ये चुनाव बॉलीवुड की मल्टी स्टारर जबरदस्त फिल्म जैसा दिखाई दे रहा है। जमीन पर जो जीतेगा उसकी पकड़ होगी। मुझे लगता है कि इस पूरे गेम में भाजपा गेनर हो सकती है। अगर भाजपा बीएमसी का चुनाव जीतती है तो देवेंद्र फडणवीस का भाजपा के अंदर कद बहुत बड़ा हो जाएगा।