West Bengal: कोलकाता पुलिस ने पार्क सर्कस हिंसा का सीन रिक्रिएट किया, सुरक्षाकर्मियों पर हुआ था पथराव
कोलकाता पुलिस ने पार्क सर्कस हिंसा मामले में क्राइम सीन रिक्रिएट किया। पुलिस सुरक्षाकर्मियों पर हमले, पथराव और तोड़फोड़ की जांच कर रही है। मामले में 40 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं, जबकि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
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कोलकाता पुलिस ने आज पार्क सर्कस सात-बिंदु चौराहे पर क्राइम सीन रिक्रिएट किया। इस दौरान चार गिरफ्तार आरोपियों को मौके पर ले जाया गया। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षाकर्मियों पर हमले के मामले में शहर में यह पहला केस है जिसमें क्राइम सीन रिक्रिएट किया गया।
रिक्रिएट का उद्देश्य घटनाक्रम को स्थापित करना था। इसमें यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भीड़ किन गलियों से इकट्ठा हुई और हमले से पहले पत्थर कहां से लाए गए और जमा किए गए थे। रविवार दोपहर को मध्य कोलकाता का पार्क सर्कस क्षेत्र, जो मुस्लिम बहुल इलाका है, एक युद्धक्षेत्र में बदल गया था।
हमले में आठ सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे घायल
प्रदर्शनकारियों ने व्यस्त सात-बिंदु चौराहे को अवरुद्ध कर दिया और पुलिस तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के कर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की गई और भीड़ के हमले में कम से कम आठ सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। इस मामले में 40 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, पहले ऐसे क्राइम सीन रिक्रिएट केवल हत्या, चोरी और डकैती के मामलों में किया जाता था, सुरक्षाकर्मियों पर हमले के लिए नहीं। पुलिस घटना के सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से आरोपियों की पहचान कर रही है और हिंसा के कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर चुकी है।
अतिक्रमण विरोधी अभियान के बाद हुई हिंसा
यह अशांति पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा तिलजला क्षेत्र में चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के बाद हुई थी। सार्वजनिक सड़कों पर नमाज अदा करने के लिए लोगों के इकट्ठा होने पर भी कार्रवाई की गई थी। इन घटनाओं के बाद ही पार्क सर्कस में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया और वाहनों को नुकसान पहुंचाया।
मुख्यमंत्री ने दी चेतावनी
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को कोलकाता पुलिस के दक्षिण पूर्व डिवीजन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने स्थिति की समीक्षा की और घायल कर्मियों से भी मिलने गए। अधिकारी ने जम्मू और कश्मीर का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां पथराव समाप्त हो गया है, वहीं पश्चिम बंगाल में भी ऐसी संस्कृति अब जारी नहीं रहेगी।