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कोलकाता: नीट आंदोलन के विरोध में संघ से जुड़े छह संगठनों का प्रदर्शन, अराजकता फैलाने का लगाया आरोप
Tue, 28 Jul 2026 10:30 PM IST
एन अर्जुन
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
Published by: एन अर्जुन
Updated Tue, 28 Jul 2026 10:30 PM IST
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आरएसएस से जुड़े करीब छह संगठनों ने मंगलवार को कोलकाता में मार्च
- फोटो : अमर उजाला
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नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े करीब छह संगठनों ने मंगलवार को कोलकाता में दो मार्च निकाले। इन संगठनों ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन की आड़ में राज्य और देश में अराजकता फैलाने की कोशिश की जा रही है। हावड़ा और सियालदह से निकले दोनों मार्च धर्मतला पहुंचे, जहां रानी रासमणि एवेन्यू में सभा आयोजित की गई।
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'शिक्षा संस्कृति सुरक्षा मंच' के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य संगठनों के छात्र, शिक्षक, प्रोफेसर, शिक्षाकर्मी और शिक्षाविद शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार, दक्षिण बंगाल के विभिन्न जिलों में कार्यक्रम आयोजित करने के बाद कोलकाता में केंद्रीय प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। इसके तहत अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में छात्र और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग राजधानी पहुंचे।
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हावड़ा से मार्च निर्धारित समय पर शुरू हुआ, जबकि सियालदह से भी प्रदर्शनकारी जुलूस के रूप में धर्मतला पहुंचे। दोनों मार्च के धर्मतला पहुंचने के बाद रानी रासमणि एवेन्यू में सभा हुई। आयोजकों ने इसे शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ नीट आंदोलन के दौरान सामने आए घटनाक्रम के विरोध के रूप में पेश किया।
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सभा में वक्ताओं ने नीट आंदोलन के दौरान देश के राजनीतिक नेतृत्व के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों और इंटरनेट पर प्रसारित पोस्टर व मीम की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के नाम पर राजनीतिक विरोध को उग्र रूप देने और देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
सभा में पिछले शुक्रवार को कोलकाता के धर्मतला में वामपंथी छात्र संगठनों के मार्च के दौरान पत्रकारों पर कथित हमले का मुद्दा भी उठाया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वामपंथी संगठन लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास नहीं रखते और अब अराजकता का माहौल बनाने के साथ मीडिया को भी निशाना बना रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित वामपंथी संगठनों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।