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West Bengal: 'शिकायत थी तो पार्टी नेतृत्व से बात करते', टीएमसी के निष्कासित विधायकों को कुणाल घोष ने दी नसीहत
पीटीआई, कोलकाता
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 01 Jun 2026 06:17 PM IST
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सार
टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि निष्कासित विधायकों को शिकायत लेकर स्पीकर के पास जाने के बजाय पार्टी नेतृत्व से मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि ये विधायक ममता बनर्जी के नाम पर जीते हैं और अब गद्दारी कर रहे हैं। घोष ने अपने हस्ताक्षर पर सफाई दी और अन्य विधायकों को लालच से बचने की सलाह दी।
टीएमसी नेता कुणाल घोष
- फोटो : ANI
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विस्तार
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रवक्ता कुणाल घोष ने सोमवार को पार्टी से निकाले गए दो विधायकों पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि फर्जी हस्ताक्षर मामले में इन विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के पास जाने के बजाय पहले पार्टी नेतृत्व से बात करनी चाहिए थी।
क्या है मामला?
पार्टी ने विधायक संदीपान साहा और ऋतब्रत बनर्जी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इन पर पार्टी की बैठकों में न आने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की एक मीडिया वार्ता के तुरंत बाद हुई। मुख्यमंत्री ने बताया था कि इन दोनों विधायकों ने विधानसभा में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता चुनने के लिए हुए फर्जी हस्ताक्षर मामले में शिकायत दर्ज कराई थी।
कुणाल घोष ने क्या कहा?
कुणाल घोष ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन विधायकों के नाम सार्वजनिक कर दिए जिन्होंने स्पीकर से शिकायत की थी। इससे टीएमसी का उन्हें निकालने का फैसला सही साबित हो गया है। मीडिया वार्ता में घोष ने कहा कि अगर किसी विधायक को हस्ताक्षर विवाद में कोई गलती लग रही थी, तो उसे सबसे पहले अपने नेता को बताना चाहिए था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब हस्ताक्षर लिए जा रहे थे, तब ममता बनर्जी वहां मौजूद नहीं थीं।
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घोष ने याद दिलाया कि सभी विधायक टीएमसी के चुनाव चिह्न और ममता बनर्जी की लोकप्रियता की वजह से जीते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर टीएमसी खराब है, तो इन लोगों ने पार्टी के टिकट पर चुनाव क्यों लड़ा और ममता बनर्जी के नाम पर वोट क्यों मांगे? उन्होंने कहा कि कुछ लोग हमेशा सत्ता के करीब रहना चाहते हैं, इसलिए वे अपनी वफादारी बदलते रहते हैं। घोष ने कहा कि उन्हें उन लोगों ने वोट दिया है जो ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री देखना चाहते थे, इसलिए वे उनके साथ गद्दारी नहीं कर सकते।
ये भी पढ़ें: Supreme Court: वक्फ ट्रिब्यूनल में फीस विवाद पर कोर्ट ने उठाए सवाल, पूछा कानूनी आधार; जानें क्या है पूरा मामला
खुद पर उठ रहे सवालों पर घोष ने दिया जवाब
शोभनदेब चट्टोपाध्याय के समर्थन में अपने खुद के हस्ताक्षर पर उठ रहे सवालों का भी घोष ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनके हस्ताक्षर में कोई गड़बड़ी नहीं है। उन्होंने फॉर्म में निर्धारित जगह पर अपना नाम बड़े अक्षरों में लिखा था और जहां जरूरत थी वहां अलग से हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने यही बात सीआईडी (CID) को भी बताई है। अंत में घोष ने अन्य विधायकों से अपील की कि वे किसी भी तरह के लालच में न आएं। उन्होंने कहा कि अगर कोई समस्या है तो उसे पार्टी के सामने रखें। ऐसी गतिविधियों में न पड़ें जिससे संगठन को नुकसान हो।
क्या है मामला?
पार्टी ने विधायक संदीपान साहा और ऋतब्रत बनर्जी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इन पर पार्टी की बैठकों में न आने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की एक मीडिया वार्ता के तुरंत बाद हुई। मुख्यमंत्री ने बताया था कि इन दोनों विधायकों ने विधानसभा में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता चुनने के लिए हुए फर्जी हस्ताक्षर मामले में शिकायत दर्ज कराई थी।
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कुणाल घोष ने क्या कहा?
कुणाल घोष ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन विधायकों के नाम सार्वजनिक कर दिए जिन्होंने स्पीकर से शिकायत की थी। इससे टीएमसी का उन्हें निकालने का फैसला सही साबित हो गया है। मीडिया वार्ता में घोष ने कहा कि अगर किसी विधायक को हस्ताक्षर विवाद में कोई गलती लग रही थी, तो उसे सबसे पहले अपने नेता को बताना चाहिए था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब हस्ताक्षर लिए जा रहे थे, तब ममता बनर्जी वहां मौजूद नहीं थीं।
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खुद पर उठ रहे सवालों पर घोष ने दिया जवाब
शोभनदेब चट्टोपाध्याय के समर्थन में अपने खुद के हस्ताक्षर पर उठ रहे सवालों का भी घोष ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनके हस्ताक्षर में कोई गड़बड़ी नहीं है। उन्होंने फॉर्म में निर्धारित जगह पर अपना नाम बड़े अक्षरों में लिखा था और जहां जरूरत थी वहां अलग से हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने यही बात सीआईडी (CID) को भी बताई है। अंत में घोष ने अन्य विधायकों से अपील की कि वे किसी भी तरह के लालच में न आएं। उन्होंने कहा कि अगर कोई समस्या है तो उसे पार्टी के सामने रखें। ऐसी गतिविधियों में न पड़ें जिससे संगठन को नुकसान हो।