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कम पानी, ज्यादा पैदावार: बाजरे की पहfली थ्री-वे हाइब्रिड किस्म से 27% तक बढ़त, किसानों को ऐसे होगा दोहरा फायदा

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Sat, 24 Jan 2026 03:51 PM IST
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सार

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने बाजरे की एक ऐसी किस्म विकसित की है, जिसे बहुत कम पानी की जरूरत होती है। इसे ऐसे इलाकों के लिए विकसित किया गया है जो सूखे से प्रभावित रहते हैं। 

Less water, more yield India first three-way hybrid pearl millet variety offers up to 27% increase in yield
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने बाजरे की एक नई उन्नत किस्म विकसित की - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सूखा प्रभावित और बारिश पर निर्भर इलाकों के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने बाजरे की एक नई उन्नत किस्म विकसित की है, जो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम है। इस किस्म को आरएचबी 273 नाम दिया गया है। यह दुनिया की पहली तीन-स्तरीय संकर (थ्री-वे हाइब्रिड) बाजरा किस्म है।

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आईसीएआर ने आरएचबी 273 को खासतौर पर उन क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है, जहां सिंचाई की सुविधा सीमित है और खेती मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर रहती है। वर्ष 2022 से 2024 के बीच देश के 30 अलग-अलग स्थानों पर किए गए परीक्षणों में यह किस्म लगातार बेहतर प्रदर्शन करती नजर आई। ट्रायल के दौरान इसकी औसत पैदावार करीब 2239 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो मौजूदा प्रचलित किस्मों की तुलना में 13 से 27 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही इस किस्म से चारे की अच्छी पैदावार भी मिलती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है।

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राजस्थान, गुजरात और हरियाणा में खेती के लिए मंजूरी

बीमारियों के लिहाज से भी आरएचबी 273 को मजबूत माना जा रहा है। इसमें मिल्ड्यू, ब्लास्ट और स्मट जैसी प्रमुख बीमारियों के खिलाफ बेहतर प्रतिरोधक क्षमता पाई गई है। पोषण के स्तर पर भी यह किस्म खास है। इसमें आयरन, जिंक, प्रोटीन और फैट की संतुलित मात्रा मौजूद है, जो पोषण सुरक्षा को मजबूती देती है। आईसीएआर की बाजरा परियोजना की 60वीं वार्षिक बैठक (मई 2025) में इस किस्म को जारी करने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद 31 दिसंबर 2025 को केंद्र सरकार ने इसे औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया। फिलहाल इस किस्म को राजस्थान, गुजरात और हरियाणा में खेती के लिए मंजूरी दी गई है। यह वर्षा आधारित और सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।



इसलिए किसानों के लिए है खास?

आरएचबी 273 के विकास में आईसीएआर, आरएआरआई दुर्गापुरा (जयपुर), आईसीआरआईसैट हैदराबाद और जोधपुर स्थित परियोजना इकाई के वैज्ञानिकों ने मिलकर काम किया। वर्षों की रिसर्च, फील्ड ट्रायल और डेटा विश्लेषण के बाद यह किस्म तैयार हो सकी।

कम अवधि में पकने वाली, सूखा सहने वाली, अधिक उत्पादन देने वाली और पोषण से भरपूर यह बाजरा किस्म सूखे और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के किसानों के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभरी है। यह पहल दर्शाती है कि कृषि अनुसंधान किस तरह बदलती जलवायु की चुनौतियों के बीच किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा को मजबूत कर रहा है।

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