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डराया, धमकाया... बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट करके लूटे 23 करोड़: एक महीने तक कैद रखा; अब SC ने मांगी रिपोर्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवीन पारमुवाल Updated Sat, 24 Jan 2026 04:19 PM IST
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सार

एक महीने तक डिजिटल गिरफ्तारी में रहे 78 साल के रिटायर्ड बैंकर से 23 करोड़ की ठगी हो गई। धोखेबाजों ने खुद को CBI-ED अफसर बताकर पुलवामा हमले तक में नाम घसीटा। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र, CBI और RBI से जवाब मांगा है।

supreme court notice centre cbi on 23 crore digital arrest scam retired banker
digital arrest - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड बैंकर को एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट करके 23 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में केंद्र सरकार, सीबीआई और अन्य को तलब किया है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच ने नरेश मल्होत्रा की याचिका पर भारत संघ, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य को नोटिस जारी किया है।
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याचिका में शामिल बैंकों को धोखाधड़ी की गई 22.92 करोड़ रुपये की राशि याचिकाकर्ता के खातों में जमा करने का निर्देश देने की मांग की गई है। मल्होत्रा ने इस मामले में कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, इंडसइंड बैंक, सिटी यूनियन बैंक और यस बैंक को भी पार्टी बनाया है।
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पुलवामा हमले का डर दिखाकर की ठगी
साइबर धोखेबाजों ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और CBI का अधिकारी बताकर दक्षिणी दिल्ली के गुलमोहर पार्क इलाके के रिटायर्ड बैंकर को लगभग एक महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और उनसे 23 करोड़ रुपये ठग लिए। आरोपियों ने पीड़ित को डराया कि उनका आधार कार्ड नशीले पदार्थों की तस्करी, आतंकी फंडिंग और पुलवामा आतंकी हमले में शामिल है। जांच के बहाने उन्हें उनके ही फ्लैट में कैद कर दिया गया। ठगों ने उन्हें घर से बाहर न निकलने का निर्देश दिया और एक महीने के दौरान अपनी बचत को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया।

यह भी पढ़ें: SC: अनिल अंबानी समूह से जुड़े मामले में CBI-ईडी से रिपोर्ट तलब; पुणे पोर्श हादसे के आरोपी ने मांगी जमानत

ऐसे जाल में फंसाया गया
पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया कि पिछले साल 4 अगस्त को उनके पास एक शख्स का फोन आया, जिसने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया। फोन करने वाले ने उन पर ड्रग-ट्रैफिकिंग रैकेट से जुड़े होने का आरोप लगाया। इसके बाद, ED और CBI अधिकारी बनकर दूसरे धोखेबाजों ने भी उनसे संपर्क किया। डर के मारे पीड़ित ने उनके निर्देशों का पालन किया और अपने बैंक खातों से धोखेबाजों के खातों में पैसे ट्रांसफर करते रहे। आरोपियों ने पीड़ित को यह भी धमकी दी कि अगर उन्होंने इस मामले के बारे में किसी को बताया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

12 करोड़ रुपये फ्रीज, जांच जारी
जब मल्होत्रा को एहसास हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है, तो उन्होंने पिछले साल 19 सितंबर को नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मामला इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट को ट्रांसफर कर दिया गया। पुलिस ने कहा था कि एक FIR दर्ज कर ली गई है और ठगी गई राशि में से 12.11 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज कर दिए गए हैं।

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