कर्नाटक SI भर्ती घोटाला: ईडी की बड़ी कार्रवाई, IPS अमृत पॉल और हेड कॉन्स्टेबल की संपत्तियां जब्त की
कर्नाटक पुलिस भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच में ईडी ने आईपीएस अमृत पॉल और हेड कॉन्स्टेबल श्रीधर एच की 1.53 करोड़ की संपत्तियां जब्त कीं। आरोप है कि पॉल ने ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं तक अनधिकृत पहुंच दी और हेरफेर में भूमिका निभाई।
विस्तार
कर्नाटक से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां कर्नाटक पुलिस भर्ती और शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। इसके तहत ईडी ने कर्नाटक कैडर के आईपीएस अधिकारी अमृत पॉल और एक हेड कॉन्स्टेबल श्रीधर एच की संपत्तियां मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत जब्त कर ली हैं। यह कार्रवाई 2021-22 में पुलिस उप-निरीक्षक (एसआई) भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़ी है।
संयुक्त संपत्तियों की कीमत 1.53 करोड़ रुपये बताई गई है, जिसमें आवासीय इकाइयां भी शामिल हैं। इस आदेश को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जारी किया गया। बता दें कि 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी अमृत पॉल को 2022 में कर्नाटक क्राइम इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) ने गिरफ्तार किया था। उस समय वह अतिरिक्त महानिरीक्षक (भर्ती) के पद पर थे।
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जांच में कौन-कौन सी बातें आई सामने?
इसके बाद मामले की जांच में सामने आया कि उन्होंने एसआई भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ईडी के अनुसार, पॉल ने ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं के स्ट्रांगरूम तक अनधिकृत पहुंच की सुविधा दी और इसकी चाबियां डिप्टी एसपी शांति कुमार को सौंपी।
इसके जरिए श्रीधर एच और अन्य साथियों ने अनुचित उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर किया, ताकि उनकी चयन सुनिश्चित हो सके। आरोप है कि प्रत्येक उम्मीदवार से 30 से 70 लाख रुपये की रिश्वत ली गई, जिसे आवासीय संपत्तियों के निर्माण में लगाया गया। मामले में ईडी ने पहले ही इस मामले में अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी।
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ईडी की एक और कार्रवाई
वहीं दूसरी ओर कर्नाटक में बीएमसएस एजुकेशनल ट्रस्ट के खिलाफ भी ईडी ने 21 जनवरी को 19.46 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने का प्रावधिक आदेश जारी किया। ट्रस्ट पर आरोप है कि उसने इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीट ब्लॉकिंग घोटाला किया और फीस के अलावा नकद राशि छात्रों से वसूली।
ईडी के अनुसार, यह नकद राशि छात्रों और एजेंट्स से सीधे वसूली गई और इसे ट्रस्ट की किताबों में दर्ज नहीं किया गया। यह अघोषित पैसा ट्रस्ट के ट्रस्टीज के व्यक्तिगत फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया। इस जांच से कर्नाटक पुलिस भर्ती और शैक्षिक संस्थाओं में चल रहे भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की गंभीरता सामने आई है।
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