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विदेशों में छिपे 70+ भगोड़ों पर सरकार का शिकंजा, एक दशक की सबसे बड़ी कामयाबी; अब तक कितने भारत लाए गए?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवीन पारमुवाल Updated Sat, 24 Jan 2026 05:11 PM IST
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सार

केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। साल 2024-25 के दौरान विदेशों में छिपे भारत के 70 से ज्यादा भगोड़ों का पता लगाया गया। यह पिछले एक दशक में सबसे बड़ी कामयाबी है।

over 70 indian fugitives located abroad in 2024 25 government report cbi interpol action
सीबीआई - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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पिछले एक साल में भारतीय जांच एजेंसियों को भगोड़ों के खिलाफ बड़ी सफलता हाथ लगी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत को वांछित 70 से ज्यादा अपराधियों और भगोड़ों को विदेशों में लोकेट (चिह्नित) कर लिया गया है। वहीं, इसी दौरान भारत में छिपे दूसरे देशों के 203 भगोड़ों का भी पता लगाया गया है। केंद्र सरकार ने आंकड़ों को लेकर रिपोर्ट जारी की है। 
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कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि 2024-25 के दौरान कुल 71 भगोड़ों की लोकेशन विदेशों में ट्रेस की गई। अधिकारियों का कहना है कि पिछले एक दशक में यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
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27 अपराधी लाए गए वापस
रिपोर्ट के अनुसार, विदेशों में छिपे भारतीय भगोड़ों को ना केवल ट्रेस किया गया, बल्कि पिछले वित्तीय वर्ष में 27 भगोड़ों को विदेश से भारत वापस भी लाया गया है। भारत में इंटरपोल की नोडल एजेंसी के तौर पर काम करने वाली सीबीआई (CBI) इन अपराधियों को वापस लाने के लिए गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के साथ तालमेल बिठाकर काम कर रही है।

सरकारी रिपोर्ट में क्या-क्या?
  • लैटर्स रोगेटरी (LR): अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच कुल 74 'लैटर्स रोगेटरी' (विदेशों से कानूनी मदद मांगने के लिए न्यायिक अनुरोध) भेजे गए। इनमें से 54 सीबीआई के मामलों से जुड़े थे और 20 राज्यों की कानून प्रवर्तन और अन्य केंद्रीय एजेंसियों से जुड़े थे। इस दौरान कुल 47 'लेटर रॉगेटरी' (LR) यानी विदेशों से कानूनी मदद के अनुरोधों को पूरी तरह पूरा कर लिया गया है। वहीं, 29 ऐसे अनुरोध थे जिन्हें आंशिक कार्यवाही के बाद या तो बंद कर दिया गया या वापस ले लिया गया।
  • पेंडिंग मामले: 31 मार्च 2025 तक कुल 533 ऐसे अनुरोध अलग-अलग देशों में लंबित हैं। इनमें से 276 मामले सीबीआई के हैं, जबकि बाकी 257 मामले राज्यों की पुलिस और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों से जुड़े हैं। भारत को भी अलग-अलग देशों से आपराधिक जांच में मदद के लिए करीब 32 कानूनी अनुरोध प्राप्त हुए हैं।
भगोड़ों पर कसता इंटरपोल का शिकंजा
भारतीय जांच एजेंसियों ने विदेशों में छिपे भगोड़ों को वापस लाने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। इस साल NCB-India ने अलग-अलग श्रेणियों में कई इंटरपोल नोटिस जारी किए हैं। इनमें 126 रेड नोटिस सबसे अहम हैं, जिनका मकसद दुनिया भर की पुलिस की मदद से आरोपियों को गिरफ्तार करना है।

इसके अलावा, अन्य अलर्ट भी जारी किए गए हैं:
  • ब्लू नोटिस (89): संदिग्धों की पहचान और ठिकाने का पता लगाने के लिए।
  • येलो नोटिस (24): लापता लोगों की तलाश के लिए।
  • ब्लैक नोटिस (7): अज्ञात शवों की पहचान के लिए।
  • ग्रीन नोटिस (1): समाज के लिए खतरा बन सकने वाले अपराधियों की चेतावनी के लिए।
सीबीआई का 'ग्लोबल ऑपरेशन'
सीबीआई अपने ग्लोबल ऑपरेशंस सेंटर (GOC) के जरिए विदेशी पुलिस और इंटरपोल से लगातार संपर्क में है। जैसे ही किसी भगोड़े की लोकेशन का पता चलता है, उसे भारत वापस लाने के लिए गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच सीबीआई ने भारतीय नागरिकता छोड़ने के 22,200 से अधिक आवेदनों पर अपनी रिपोर्ट दी है।

पासपोर्ट की सुरक्षा और निगरानी
पासपोर्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इंटरपोल के डेटाबेस (SLTD) पर अब तक 1.91 लाख से ज्यादा चोरी हुए या रद्द किए गए भारतीय पासपोर्ट की जानकारी अपलोड की जा चुकी है। रिकॉर्ड बताते हैं कि 31 मार्च 2025 तक ऐसे संदिग्ध पासपोर्ट के इस्तेमाल के 30 मामले दुनिया भर की अन्य एजेंसियों ने पकड़े हैं।
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