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Bihar Bhawan News: By opposing Bihar Bhawan, Raj Thackeray has again started a war against North Indians!
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Bihar Bhawan Controversy : बिहार भवन का विरोध कर राज ठाकरे ने फिर छेड़ी उत्तर भारतीयों के खिलाफ जंग
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Sat, 24 Jan 2026 06:41 PM IST
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मुंबई में बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘बिहार भवन’ के निर्माण को लेकर सियासत गरमा गई है, जहाँ राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और शिवसेना (UBT) ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है, जिससे यह केवल एक इमारत बनाने का मुद्दा नहीं रह गया बल्कि एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। बिहार सरकार ने मुंबई के एलफिंस्टोन एस्टेट (मुंबई पोर्ट ट्रस्ट की जमीन) में लगभग 314 करोड़ रुपये की लागत से एक 30‑मंजिला बिहार भवन बनाने की योजना बनाई है, जिसका उद्देश्य वहां इलाज, आवास और अन्य सेवाओं के लिए आने वाले बिहार के लोगों के लिए सहूलियत प्रदान करना है, खासकर कैंसर के मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए भी एक बड़ा हॉस्टल शामिल है।
लेकिन मनसे के नेताओं, विशेष रूप से नवनिर्वाचित कॉर्पोरेटर यशवंत किल्लेदार ने कहा है कि मनसे किसी भी हालत में इस बिहार भवन को मुंबई में नहीं बनने देगा और उन्होंने इसका विरोध तेज़ तरीके से किया है, उनका यह भी कहना है कि बिहार में अपनी स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा समस्याओं को पहले सुधारा जाना चाहिए और मुंबई में ऐसे भवन बनाने की बजाय वहां के स्थानीय हितों की प्राथमिकता होनी चाहिए। शिवसेना (UBT) ने भी मनसे के साथ मिलकर इस योजना पर आपत्ति जताई है, उन्होंने कहा है कि प्रस्तावित बिहार भवन स्थानीय संसाधनों और भूमि के लिए बोझ बढ़ा सकता है।
मनसे‑शिवसेना के इस विरोध को बिहार सरकार की योजनाओं के खिलाफ क्षेत्रीय राजनीतिक व्यवहार के रूप में भी देखा जा रहा है, जहाँ मनसे पारंपरिक रूप से महाराष्ट्र में बाहरी राज्यों के प्रभाव के खिलाफ रुख अपनाती आई है। विरोध के जवाब में बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने मनसे और शिवसेना दोनों को चेतावनी देते हुए कहा है कि कोई भी इसे रोक नहीं सकता और उन्होंने आरोप लगाया है कि मनसे के बयान निराधार हैं और कोई भी “राजतंत्र” जैसा किनहीं है कि वे निर्माण को रोक सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यह भवन लोकहित का काम है और इसे किसी भी कीमत पर बनाया जाएगा।
विपक्ष के इस विरोध के बीच भाजपा समेत अन्य पक्षों ने बिहार भवन के समर्थन में बयान दिए हैं और इसे राज्य के लोगों की सेवा तथा उनके हक़ के लिए जरूरी कदम बताया है। इस बहस ने महाराष्ट्र‑बिहार के बीच सियासी व सामाजिक चर्चा को तेज़ कर दिया है और अब यह मामला केवल निर्माण परियोजना नहीं रहकर दोनों राज्यों के राजनीतिक समीकरण का हिस्सा बन गया है।
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