जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सामने आया यह दर्दनाक सड़क हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में सैन्य आवाजाही कितनी जोखिमभरी होती है। भारतीय सेना का एक ट्रक अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा था, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से वह गहरी खाई में जा गिरा। इस भीषण दुर्घटना में कई जवानों के शहीद होने की खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।प्रारंभिक जांच और मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान इस ओर इशारा करते हैं कि हादसा किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई कारकों के एक साथ सामने आने के कारण हुआ। पहाड़ी रास्ते पहले से ही संकरे और घुमावदार होते हैं। ऐसे में अगर सड़क की हालत खराब हो, मौसम प्रतिकूल हो और सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त न हों, तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बताया जा रहा है कि हादसे के समय सड़क फिसलन भरी थी और दृश्यता भी सीमित थी, जिससे चालक को स्थिति संभालने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका।
इसके अलावा, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर सुरक्षा रेलिंग या मजबूत अवरोधकों की कमी पहले से एक बड़ा मुद्दा रही है। अगर सड़क किनारे पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होते, तो संभव है कि ट्रक खाई में गिरने से रोका जा सकता था। तकनीकी पहलुओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं वाहन की नियमित जांच, ब्रेक सिस्टम की स्थिति और आपातकालीन सुरक्षा उपायों की उपलब्धता पर अब जांच एजेंसियां गंभीरता से नजर डाल रही हैं। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यह बताता है कि दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों की सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचे, वाहन रखरखाव और मूवमेंट प्लानिंग को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है। शहीद जवानों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।