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Mayawati on Swami Shankaracharya Row: Did Mayawati speak on the Shankaracharya controversy?
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Mayawati on Swami Shankaracharya Row: शंकराचार्य विवाद पर बोलीं मायावती?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Sat, 24 Jan 2026 09:19 PM IST
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प्रयागराज में मौनी अमावस्या स्नान से पहले पालकी को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद ने अब सियासी रंग ले लिया है। इस मामले में बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती की एंट्री के बाद विवाद और भी राजनीतिक हो गया है। मायावती ने इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा है कि धर्म के कार्यों में राजनीति का बढ़ता हस्तक्षेप नए-नए विवादों, तनाव और टकराव की वजह बन रहा है।
बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए कहा कि न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी धार्मिक पर्व, त्योहार, पूजापाठ और स्नान जैसे आयोजनों में राजनीतिक लोगों का दखल लगातार बढ़ रहा है। उनके मुताबिक यह प्रवृत्ति समाज में अनावश्यक विवाद और टकराव को जन्म दे रही है, जो सही नहीं है। मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि इससे लोगों में दुख और चिंता की लहर स्वाभाविक है।
मायावती ने अपने बयान में धर्म और राजनीति को जोड़ने की प्रवृत्ति को खतरनाक बताया। उन्होंने लिखा कि संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म को राजनीति से और राजनीति को धर्म से जोड़ने के कई खतरे हमेशा बने रहते हैं। प्रयागराज में स्नान और पालकी को लेकर चल रहा विवाद, एक-दूसरे पर अनादर और आरोप-प्रत्यारोप, इसका ताजा उदाहरण है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों से हर हाल में बचना ही बेहतर है।
बसपा सुप्रीमो ने यह भी रेखांकित किया कि देश का संविधान और कानून जनहित और जनकल्याण को ही वास्तविक राष्ट्रीय धर्म मानता है। उन्होंने अपील की कि राजनीति को धर्म से और धर्म को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए, ताकि राजनेता बिना द्वेष और पक्षपात के अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें। मायावती के मुताबिक वर्तमान हालात में भी आम लोगों की यही अपेक्षा है कि राजनीति समाज के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हित में ईमानदारी और निष्ठा से काम करे।
मायावती ने यह भी कहा कि प्रयागराज में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर चल रहा यह कड़वा विवाद आपसी सहमति से जितनी जल्दी सुलझ जाए, उतना ही बेहतर होगा। उन्होंने इसे आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए सभी पक्षों से संयम और समझदारी से काम लेने की सलाह दी।
इस बीच इस पूरे विवाद पर सियासत और तेज हो गई है। बसपा से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में बयान दे चुकी हैं। इससे साफ है कि यह मामला अब सिर्फ धार्मिक या प्रशासनिक नहीं रह गया है, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक बहस का मुद्दा बनता जा रहा है।
प्रयागराज में मौनी अमावस्या स्नान जैसे बड़े धार्मिक आयोजन से पहले इस तरह का विवाद प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और सुरक्षा का सवाल है, तो दूसरी तरफ राजनीति और धार्मिक नेतृत्व के बीच टकराव का माहौल। ऐसे में मायावती का बयान इस बहस को एक नए संवैधानिक और नैतिक नजरिए से देखने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन, धार्मिक नेतृत्व और राजनीतिक दल मिलकर इस विवाद को किस तरह सुलझाते हैं, ताकि आस्था का यह बड़ा पर्व किसी नए टकराव की वजह न बने।
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