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असम विधानसभा चुनाव: घोषणा पत्र के लिए जनसंपर्क करेगी भाजपा; CM सरमा ने मतदाता सूची को लेकर नोटिस का खंडन किया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: शुभम कुमार Updated Sat, 24 Jan 2026 08:58 PM IST
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सार

असम में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासत में गर्माहट तेज हो गई है। इसका पहला बड़ा कारण यह है कि राज्य में मतदाता सूची संशोधन को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है, जिसके बाद अब सीएम सरमा ने इस पूरे मामले अपनी सफाई दी है। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने घोषणा पत्र के लिए जनसंपर्क अभियान शुरू करने का एलान किया है।

Assam CM Sarma Said No controversy over SR Assam BJP launch outreach initiative formulate election manifesto
असम विधानसभा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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असम में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी ने जनता से सीधे संवाद कर घोषणा पत्र तैयार करने के लिए राज्यव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू करने का एलान किया है। वहीं दूसरी ओर मतदाता सूची संशोधन (स्पेशल रिवीजन) को लेकर सियासी टकराव भी चरम पर है। जहां अब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस पूरे मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इस प्रक्रिया में न तो किसी हिंदू और न ही किसी असमिया मुस्लिम को नोटिस दिया गया है। 

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सीएम ने शनिवार को कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर कोई विवाद नहीं है, जैसा कि विपक्ष दावा कर रहा है। सीएम सरमा ने कहा कि न तो किसी हिंदू को और न ही किसी असमिया मुस्लिम को नोटिस दिया गया है। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया में सिर्फ ‘मिया’ समुदाय, यानी बंगाली भाषी मुसलमानों को ही नोटिस दिए जा रहे हैं। नलबाड़ी जिले में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए सरमा ने कहा कि कौन सा हिंदू है जिसे नोटिस मिला? कौन सा असमिया मुस्लिम है जिसे नोटिस मिला? नोटिस सिर्फ मिया लोगों को दिए गए हैं, नहीं तो वे हमारे सिर पर चढ़ जाएंगे।
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समझिए असम में 'मिया' शब्द का अर्थ
हम यहां स्पष्ट कर दें कि सीएम सरमा द्वारा कहे जाने वाले 'मिया' शब्द असम में बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिसे पहले अपमानजनक माना जाता था। हालांकि हाल के वर्षों में समुदाय के कुछ लोग इस शब्द को अपने लिए इस्तेमाल करने लगे हैं।

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अब समझिए क्या है विपक्षी दलों का आरोप
बता दें कि इस पूरे मामले में विपक्षी दलों का आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पहले एसआई अभियान का इस्तेमाल असली नागरिकों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को। उनका कहना है कि भाजपा से जुड़े लोग फॉर्म-7 का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। फॉर्म-7 के जरिए कोई व्यक्ति अपना नाम मतदाता सूची से हटाने का अनुरोध कर सकता है या किसी दूसरे मतदाता के नाम को हटाने की मांग कर सकता है। इसके बाद संबंधित अधिकारी जांच और सुनवाई करते हैं।

इस बीच, कांग्रेस के एक राज्य स्तरीय नेता ने शुक्रवार को बोको-छायगांव विधानसभा क्षेत्र में भाजपा नेताओं और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने में अनियमितताएं की जा रही हैं।

सीएम सरमा ने सभी आरोपों को किया खारिज
मुख्यमंत्री सरमा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि छिपाने के लिए कुछ नहीं है। हम उन्हें परेशानी दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह सब कानून के दायरे में रहकर किया जा रहा है। सरमा ने आगे कहा कि यह दबाव बनाने की रणनीति है ताकि लोग समझें कि असम की जनता इसका विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि किसी को मतदाता नोटिस मिलेगा, किसी को अतिक्रमण हटाने का नोटिस और किसी को सीमा पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनकी सरकार गरीब और कमजोर लोगों के साथ है, लेकिन उन लोगों के खिलाफ है जो राज्य की जाति और पहचान को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने पहले यह दावा भी किया था कि आने वाली जनगणना में ‘मिया’ समुदाय राज्य की आबादी का करीब 40 प्रतिशत हो सकता है।

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारी
असम भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अपनी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी रविवार से एक विशेष जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रही है, जिसके तहत जनता से सुझाव लेकर अपना चुनावी घोषणापत्र तैयार किया जाएगा। भाजपा प्रवक्ता प्रणजल कलिता ने शनिवार को बताया कि इस अभियान की शुरुआत गुवाहाटी से होगी। इसे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

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इस अभियान के तहत खास तौर पर तैयार किए गए वीडियो वैन, जिन्हें ‘सुझाव वाहन’ नाम दिया गया है, पूरे राज्य की 126 विधानसभा सीटों में जाएंगी। इन वैनों के जरिए समाज के हर वर्ग से सुझाव, राय और समस्याएं जुटाई जाएंगी, जिनके आधार पर पार्टी का ‘संकल्प पत्र’ तैयार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भाजपा का लक्ष्य दो लाख से ज्यादा सुझाव इकट्ठा करने का है। इसके लिए राज्यभर में 75 से अधिक वीडियो वैन को पांच अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात किया गया है।

इन जगहों पर होगी इस अभियान की शुरुआत
गौरतलब है कि गुवाहाटी के अलावा नलबाड़ी, सिलचर, शिवसागर और बिश्वनाथ में भी एक साथ इस अभियान की शुरुआत होगी। स्थानीय भाजपा विधायक, जिला अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता अपने-अपने क्षेत्रों में इस अभियान में सक्रिय रूप से हिस्सा लेंगे। जनता की भागीदारी बढ़ाने के लिए भाजपा ने एक हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किया है। असम के किसी भी हिस्से से लोग इस नंबर पर मिस्ड कॉल देकर अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं।

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