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Doda Army Truck Accident Jammu & Kashmir: One-year-old son lit the funeral pyre in Hapur, DM broke down
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Doda Army Truck Accident Jammu & Kashmir: हापुड़ में एक साल के बेटे ने दी मुखाग्नि, DM रो पड़े
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Sat, 24 Jan 2026 09:43 PM IST
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जम्मू के डोडा में सड़क हादसे में बलिदान हुए यूपी के हापुड़ जिले के गांव भटैल निवासी जवान रिंखिल बालियान जब शनिवार सुबह तिरंगे में लिपटकर अपने गांव पहुंचे, तो पूरे इलाके में कोहराम मच गया। दो दिनों से जिस बेटे का इंतजार बेसब्री से हो रहा था, वह अब ताबूत में लौटा। जैसे ही सेना का ट्रक गांव में दाखिल हुआ, चीख-पुकार से माहौल गूंज उठा।
पत्नी रिंकी, मां मंजू और परिवार के अन्य सदस्य शव को देखते ही बेसुध हो गए। मां की चीखें, पत्नी की सिसकियां और भाई ऋषभ की टूटी हुई आवाज ने हर मौजूद शख्स को झकझोर कर रख दिया। गांव में पिछले दो दिनों से मातम पसरा हुआ था। खराब मौसम के कारण जब शुक्रवार को शव नहीं पहुंच पाया था, तो परिजनों की आंखें इंतजार में पथरा गई थीं। शनिवार सुबह करीब नौ बजे जैसे ही रिंखिल का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, इंतजार आंसुओं के सैलाब में बदल गया।
घर में अंतिम दर्शन के दौरान हर कोई तिरंगे में लिपटे उस बेटे को निहार रहा था, जो कल तक गांव की गलियों में हंसता-खेलता नजर आता था। हर आंख नम थी और हर जुबां पर बस एक ही बात थी देश के लिए शहीद हुए रिंखिल अमर रहें। कुछ देर बाद पार्थिव शरीर को गांव के श्मशान घाट ले जाया गया, जहां पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
श्मशान घाट तक पहुंचने वाली शव यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। जिन गलियों से रिंखिल की अंतिम यात्रा गुजरी, वहां पैर रखने तक की जगह नहीं थी। छतों से महिलाएं उस जांबाज बेटे को आखिरी विदाई दे रही थीं, जिसने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, रिंखिल तेरा नाम रहेगा’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से पूरा गांव गूंज उठा।
सेना के जवानों ने बिगुल की धुन के साथ शहीद को आखिरी सलामी दी। विधायक विजयपाल आढ़ती, जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय, एसपी ज्ञानंजय सिंह और पूर्व विधायक गजराज सिंह ने भी मौके पर पहुंचकर शहीद को श्रद्धांजलि दी। लेकिन इन औपचारिकताओं के बीच सबसे भारी था परिवार का दर्द, जो किसी भी प्रोटोकॉल से कहीं बड़ा था।
सबसे भावुक पल तब आया, जब मात्र एक साल के मासूम बेटे राघव को गोद में लेकर छोटे भाई ऋषभ ने बड़े भाई की चिता को मुखाग्नि दी। एक हाथ में मासूम बेटा और दूसरे हाथ में अग्नि यह मंजर हर किसी की आंखों को भिगो गया। पत्नी रिंकी बार-बार बेहोश हो रही थीं, मां मंजू की हालत संभालना मुश्किल हो गया था। यहां तक कि हापुड़ के डीएम भी इस दृश्य को देखकर अपने आंसू नहीं रोक सके।
रिंखिल बालियान अब इस गांव की मिट्टी में सो गए हैं, लेकिन उनकी शहादत हर गली, हर घर और हर दिल में जिंदा रहेगी। गांव ने अपना बेटा खोया है, देश ने अपना एक और वीर सपूत।
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