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Amar Ujala Batras: माइनस 28 डिग्री में कारगिल युद्ध लड़े योद्धा की कहानी, खुद उन्हीं की जुबानी, देखें पॉडकास्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 24 Jan 2026 08:02 PM IST
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अमर उजाला बतरस।
- फोटो : AUW
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भारत की आजादी की जंग से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक देश में जब-जब शौर्य की बात आई है, तब लोगों के जहन में सिर्फ एक ही आवाज आती है। यह आवाज है सुरक्षाबलों की, जो कि हर वक्त देश की सीमाओं की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। इस हफ्ते अमर उजाला बतरस पर चर्चा हुई ऐसे ही एक शूरवीर और उनसे जुड़े वीरता और साहस के घटनाक्रम की।
इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी सुन सकते हैं।
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इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी सुन सकते हैं।
लोकप्रिय एंकर नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते बतरस में जिन दो लोगों से बात की, उनमें करगिल युद्ध में शामिल रहे भारत के सैन्य योद्धा कैप्टन अखिलेश शर्मा और शरीद कैप्टन शशिकांत शर्मा के भाई नरेश शर्मा शामिल रहे। दोनों ने ही पॉडकास्ट में करगिल युद्ध के अनछुए पहलुओं, जवानों के संघर्ष और उनके जीवन को लेकर कई बातें साझा कीं।
कैप्टन अखिलेश शर्मा ने बताया कि माइनस 28 डिग्री में कारगिल युद्ध का उनका अनुभव क्या था। उन्होंने पॉडकास्ट के दौरान वर्दी में लिपटे साहस, भारत के असली कवच शौर्य और शहादत की शानदार गाथा बयां की। वहीं, नरेश शर्मा ने अपने भाई कैप्टन शशिकांत के सियाचिन में बलिदान की कहानी से लेकर उनके साहस की विरासत तक पर बात की। उन्होंने बताया कि कैप्टन शशिकांत ने सियाचिन में वॉलंटियर सेवा खुद चुनी थी। उनकी अक्तूबर 1998 में सियाचिन में पोस्टिंग थी और जब दुश्मन से जंग हुई तो चोट लगने के बावजूद अपनी चौकी की रक्षा करना जारी रखी।
कैप्टन अखिलेश शर्मा ने बताया कि माइनस 28 डिग्री में कारगिल युद्ध का उनका अनुभव क्या था। उन्होंने पॉडकास्ट के दौरान वर्दी में लिपटे साहस, भारत के असली कवच शौर्य और शहादत की शानदार गाथा बयां की। वहीं, नरेश शर्मा ने अपने भाई कैप्टन शशिकांत के सियाचिन में बलिदान की कहानी से लेकर उनके साहस की विरासत तक पर बात की। उन्होंने बताया कि कैप्टन शशिकांत ने सियाचिन में वॉलंटियर सेवा खुद चुनी थी। उनकी अक्तूबर 1998 में सियाचिन में पोस्टिंग थी और जब दुश्मन से जंग हुई तो चोट लगने के बावजूद अपनी चौकी की रक्षा करना जारी रखी।