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Khabaron Ke Khiladi: भाजपा के 'नवीन' युग के सामने कौन सी चुनौतियां, चयन की वजह क्या? विश्लेषकों ने बताया सबकुछ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Sat, 24 Jan 2026 09:11 PM IST
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सार

नितिन नवीन भाजपा के नए अध्यक्ष बन गए हैं। महज 45 साल की उम्र में दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के प्रमुख की कुर्सी पर पहुंचे नीतिन नवीन के सामने कौन सी चुनौतियां होंगी? आगे संगठन में उनकी पकड़ कितनी मजबूत होगी? ऐसे ही सवालों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। 
 

Khabaron Ke Khiladi What challenges face the BJP's new era, and what were the reasons for the selection?
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नितिन नवीन भाजपा के नए अध्यक्ष बन गए हैं। उनके अध्यक्ष पद ग्रहण करने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बॉस कह कर भी बड़ा संदेश दिया। महज 45 साल की उम्र में दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के प्रमुख की कुर्सी पर पहुंचे नीतिन नवीन के सामने कौन सी चुनौतियां होंगी? आगे संगठन में उनकी पकड़ कितनी मजबूत होगी? सरकार और संगठन में वो कैसे समन्वय बनाएंगे? ऐसे ही सवालों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, अजय सेतिया और संजय राणा मौजूद रहे। 
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अजय सेतिया: इस चर्चा की वजह ये है कि वो बहुत कम आयु के हैं, दूसरी वजह ये है कि जाति का जो ध्यान रखा जाता है, इस बार उसका ध्यान नहीं रखा गया। ये भाजपा की उस सोच को दर्शाता है कि हिंदू एक है जाति कोई भी हो। दिल्ली के लिए एक अननोन चेहरा होने की वजह से भी चर्चा ज्यादा है। जब कोई पार्टी सत्ता में होती है तो वैसे अध्यक्ष की ज्यादा भूमिका नहीं होती है। बॉस कह देने से भी चर्चा ज्यादा हो रही है। 

पूर्णिमा त्रिपाठी: कहने का एक लहजा होता है, वो उस दिन अध्यक्ष का पद संभाल रहे थे इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी तारीफ की, लेकिन असली बॉस कौन है ये सभी को पता है। जहां तक राजनीतिक संदेश की बात है तो मुझे इसमें कोई बहुत बड़ा मैसेज नहीं दिखाई देता है। बंगाल में भाजपा का बहुत महत्वकाक्षाएं हैं हो सकता है कि भाजपा ने इसे देखते हुए उन्हें चुना हो। इसके अलावा कहीं कोई खास हासिल होगा यह मुझे नहीं लगता है। शायद भाजपा एक प्रायोगिक तौर पर लेकर आई है। 

राकेश शुक्ल: नवीन शब्द का आप प्रयोग कर रहे हैं तो भाजपा के लिए नए युग की शुरुआत तो 2014 में शुरू हुआ था। अब उस पर इमारत खड़ी है। नितिन नवीन के लिए चुनाव जिताने की चुनौती नहीं है, बल्कि उनके लिए पार्टी के अंदर स्वीकार्यता की है। जेपी नड्डा जो लंबे समय तक पार्टी के अध्यक्ष रहे वो भी अपनी स्वीकार्यता पार्टी के अंदर नहीं दिला पाए। 

संजय राणा: नितिन नवीन भाजपा के अश्वमेघ यज्ञ का चेहरा हैं। प्रधानमंत्री हमेशा भविष्य की बात करते हैं। जहां तक नितिन नवीन के आने से चुनाव में बदलाव होगा, तो जवाब नहीं है। नीतिन नवीन की संगठनात्मक शैली की वजह से उन्हें चुना गया है। प्रधानमंत्री जो बात बोलते हैं उसका बड़ा संदेश होता है। उनके कहने का मतलब है कि मैं बॉस बोल रहा हूं तो सारे सवाल यहीं खत्म हो जाते हैं। 

विनोद अग्निहोत्री: भाजपा में कभी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव नहीं हुए। हमेशा से ही यहां चयन होते रहे हैं। जहां तक पीढ़ीगत बदलाव की बात है तो ये कोई पहली बार नहीं है। इस पार्टी में इस तरह के बदलाव की प्रक्रिया होती रही है। चाहे राजनाथ सिंह को जब पहली बार अध्यक्ष बनाया गया हो, चाहे नितिन गडकरी का मामला हो या फिर अमित शाह का रहा हो। खुद जब नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बने तब भी यही बातें कहीं गईं थीं। भाजपा में अध्यक्ष की शक्तियां नहीं है ये मैं नहीं मानता हूं।

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