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Letter to PM Modi: भारत-PAK संवाद पर क्या बोलीं महबूबा मुफ्ती? 115 से अधिक हस्तियों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

Wed, 01 Jul 2026 02:22 PM IST
Jyoti Bhaskar एएनआई / न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
एएनआई / न्यूज डेस्क, अमर उजाला। Published by: Jyoti Bhaskar Updated Wed, 01 Jul 2026 02:22 PM IST
सार

Letter to PM Modi: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती समेत 100 से अधिक हस्तियों ने भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद पर जोर दिया है। 100 से अधिक हस्तियों ने ने इस संबंध में पीएम मोदी के अलावा पाकिस्तानी समकक्ष को भी संबोधित किया है। पत्र लिखने वाले लोगों में किनके नाम शामिल हैं? इन्होंने क्या अपील की है? इस खबर में जानिए ऐसे सवालों के जवाब

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Letter to PM Modi India Pak People appeal over ending hostility and dialogue mehbooba mufti and others know
भारत पाकिस्तान के बीच संवाद की अपील - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक प्रमुख नागरिकों ने संयुक्त अपील की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ से शांति बहाली के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है। यह अपील दोनों देशों के बीच सामान्य द्विपक्षीय संबंधों और संवाद को फिर से शुरू करने के लिए है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों को पत्र लिखे जाने के मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पदाधिकारियों की द्विपक्षीय बातचीत के समर्थन वाली हालिया टिप्पणियों का स्वागत भी किया।

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महबूबा ने संघ पदाधिकारियों की किस बात का हवाला दिया?
मुफ्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जम्मू-कश्मीर मुद्दे को बातचीत से हल करने का अवसर भुनाने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे पूरे क्षेत्र को स्थायी शांति मिलेगी। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए मुफ्ती ने कहा कि दत्तात्रेय होसबाले और मोहन भागवत जैसे वरिष्ठ आरएसएस नेताओं ने पाकिस्तान से बातचीत की बात कही है। उन्होंने वाजपेयी के कथन 'आप दोस्त बदल सकते हैं, पड़ोसी नहीं' को दोहराया। मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुधार से दक्षिण एशिया और मध्य एशिया जुड़ सकते हैं। यह क्षेत्र आर्थिक गतिविधि का केंद्र बन सकता है। उन्होंने LoC और LAC पर बातचीत, सीमाएं खोलने और जम्मू-कश्मीर को शांति का पुल बनाने का सुझाव दिया।
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भाजपा ने पत्र लिखे जाने की आलोचना क्यों की?
इस घटनाक्रम पर जम्मू-कश्मीर के विधायक और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि बातचीत का आह्वान करना गलत है। पत्र लिखे जाने की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद कम हो रहा है, ऐसे में बातचीत का समय उचित नहीं है। शर्मा ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान से जुड़ाव के मामले केवल भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने ऐसे बयानों को निंदनीय बताया और कहा कि भविष्य की पीढ़ियां इन्हें माफ नहीं करेंगी।
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भारत और पाकिस्तान की तरफ से किसने भेजा पत्र?
यह अपील सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस द्वारा जारी की गई है। इस पर 117 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें भारत से 61 और पाकिस्तान से 56 नागरिक शामिल हैं। अपील में दोनों सरकारों से लंबे समय से चली आ रही शत्रुता को समाप्त करने का आग्रह किया गया है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि यह शत्रुता लाखों युवाओं को अवसर, समृद्धि और सुरक्षित भविष्य से वंचित कर रही है। पत्र में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान मिलकर लगभग एक-पांचवें मानव समुदाय का घर हैं। दोनों देशों के लोग शांति, विकास और सहयोग से परिभाषित भविष्य के हकदार हैं।

विश्वास बहाली के कौन से उपाय सुझाए?
हस्ताक्षर करने वाले लोगों ने पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने की मांग की है। उन्होंने नई दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों को फिर से नियुक्त करने का आग्रह किया है। सामान्य वीजा सेवाओं को फिर से शुरू करने और वाणिज्यिक उड़ानों के लिए हवाई क्षेत्र खोलने की भी बात कही गई है। इसके अलावा, अटारी-वाघा भूमि सीमा को व्यापार और यात्रा के लिए फिर से खोलने की मांग की गई है। श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा और अन्य सीमा पार संपर्क पहलों को पुनर्जीवित करने का भी अनुरोध किया गया है।

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले लोगों में कौन?
यह अपील करने वाले भारतीय लोगों में नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं। राजद सांसद मनोज झा और पूर्व टीएमसी मंत्री व वर्तमान एजेयूपी नेता हुमायूं कबीर ने भी हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तानी हस्ताक्षरकर्ताओं में पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी प्रमुख हैं। पूर्व राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी, नेशनल असेंबली सदस्य इस्फान्यार भंडारा और परमाणु भौतिक विज्ञानी परवेज हुदभोय भी शामिल हैं।


संवाद और सहयोग को लेकर क्या बोले पत्र लिखने वाले लोग?
अपील में जम्मू और कश्मीर सहित सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक द्विपक्षीय संवाद फिर से शुरू करने का आह्वान किया गया है। इसमें 2004 से 2007 के बीच बातचीत किए गए ढांचे पर फिर से विचार करने की बात कही गई है। दोनों देशों की वैध सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के साथ-साथ विसैन्यीकरण और तनाव कम करने पर जोर दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि दशकों के अलगाव ने हमारी सामूहिक क्षमता को बाधित किया है। स्थायी जुड़ाव और संवाद ही मतभेदों को सुलझाने का एकमात्र व्यवहार्य मार्ग है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर को फिर से खोलने का भी आग्रह किया है। पाकिस्तान की नीलम घाटी में शारदा पीठ तक पहुंच और सीमा के दोनों ओर धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत स्थलों की आसान यात्रा की भी मांग की गई है।

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