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High Court: विजय सरकार को मद्रास हाईकोर्ट से झटका, करूर भगदड़ पीड़ित परिजनों को नौकरी देने के आदेश पर लगाई रोक
Mon, 27 Jul 2026 05:32 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 27 Jul 2026 05:32 PM IST
सार
Madras High Court On Karur Stampede: तमिलनाडु के करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के राज्य सरकार के आदेश को मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने रद्द कर दिया। अदालत ने यह फैसला जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। वहीं, मामले की सीबीआई जांच और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी का भी जिक्र किया गया। आखिर हाई कोर्ट ने यह फैसला किन आधारों पर दिया? आइए, विस्तार से पूरे मामले को समझते हैं...
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मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के किस फैसले पर लगाई रोक?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने राज्य सरकार के उन सरकारी आदेशों (जीओ) को रद्द कर दिया, जिनके तहत भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने का फैसला लिया गया था। यह आदेश करूर भगदड़ पीड़ितों के परिवारों के पुनर्वास पैकेज का हिस्सा था। अदालत ने इस मामले में दायर जनहित याचिकाओं (पीआईएल) का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया।
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हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते समय क्या कहा?
मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि करूर भगदड़ मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है और इस जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट कर रहा है। अदालत ने कहा कि चूंकि मामला जांच के दायरे में है और सर्वोच्च अदालत इसकी निगरानी कर रही है, इसलिए वह मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी। इसी के साथ अदालत ने तमिलनाडु सरकार के सरकारी आदेशों को निरस्त कर दिया।
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सरकार ने किसे और कब सरकारी नौकरी दी थी?
- मुख्यमंत्री विजय ने 10 जुलाई को मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार करूर का दौरा किया था।
- इस दौरान उन्होंने सितंबर 2025 की करूर भगदड़ से प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास कार्यक्रम की शुरुआत की थी।
- मुख्यमंत्री ने जान गंवाने वाले 41 लोगों के परिवारों में से 32 पात्र सदस्यों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे थे।
- राज्य सरकार ने प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया था।
करूर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने क्या किया था?
करूर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने जिला कलेक्टर कार्यालय में मृतकों के परिजनों से मुलाकात की थी और उनकी समस्याएं सुनी थीं। इसके बाद उन्होंने एक सार्वजनिक सभा को भी संबोधित किया। सरकार ने इसे प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम बताया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अब सरकारी आदेश को रद्द कर दिया है।
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